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Wednesday, May 27, 2026

ईश्वरमयी मामला ?

ईश्वर के घर देर है, अँधेर नहीं 

ईश्वर सब देखते हैं, सब सुनते हैं 

और 

दान लेने में कोई भेदभाव नहीं रखते 

जो आपका है, वो सब ईश्वर का है 

मगर, जो ईश्वर का है, 

वो अपना समझने की गलती ना करें   

आप ईश्वर की भक्ति में लीन हों जाएँ 

आपकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा 


साक्षात ईश्वर!

हे ईश्वर, 

आप इससे पहले कहाँ थे?

लुटेरों ने, 

पढ़े लिखे मगर कढ़े,

गुंड़ों ने सब लूट लिया  

घर को सँभालने वाली, 

उसकी ज़मीन, 

उसकी बच्ची और नन्द की ज़मीन का, 

नाज़ायज और घटिया लोगों द्वारा  घेराव, 

मारकूट पीटकर शिक्षा के मंदिर से निकालना, 

जमा पूँजी को भी ईधर से उधर करना !


इतना कुछ खाकर भी लोन ग्रषित घोषित करना?

ऐसा कितना लोन था?

और जमा पूंजी कितनी?

और कितना वो दे चुकी?    

लोन के अकॉउंट में रोज रोज, नए नए नंबर धरना 

लोन? 

"वन क्लीक लोन का जबरदस्ती किया गया, 

ऑनलाइन धँधा (Fraud)" 


खाते-पीते लोगों के मुँह से निवाले छीन लिए गए 

कपड़े तार-तार कर दिए गए 

अच्छे खासे घर से निकाल 

अच्छी खासी ज़िंदगियों को रौंद 

बीमारियों, 

और अनपढ़ गँवारों के कुरड़ पर धर दिए गए 

इतने काँड होते रहे और आप नदारद रहे? 

हे ईश्वर, अभी तक कहाँ थे आप?

कौन से मँदिर में?  

और ईश्वर गुल?


हे ईश्वर कहाँ गए? 

बालिका, आप प्रश्न बहुत ज्यादा करते हो   

आपको अपने इन सब प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए 

ईश्वर के मँदिर आना पड़ेगा 

वहाँ आपको बड़े ईश्वर मिलेँगे 

वही आपके उत्तर दे सकते हैं 

आपका दिन शुभ हो। 

मैं आपकी कोई और सहायता कर सकता हूँ?


और मेरे दिमाग़ में जाने क्यों पड़ोस वाली दादी 

ईधर वाली काकी, उधर वाली ताई, वो वाली बहन 

ये वाली बुआ, वो वाली भाभी के शब्द आ रहे थे 

"बाहण बेटियाँ के खसमों, आपणी माँ के लोगो,

..................."


मगर, मैंने फ़ोन काटना ही बेहतर समझा।

मगर, फ़ोन काटके बहुत भड़ास निकाली 

मैं जैसे-तैसे लकवे से बचा हुआ बीमार इंसान 

इतनी गर्मी में बिना गाड़ी के,

यूँ रोज-रोज,

इस दो टका पेँशन के लिए कहाँ धक्के खाऊँगी? 

सुना है, 

मेरी कार भी इन्हीं ईश्वर वालोँ ने हड़पी हुई है।  


शायद ईश्वरमयी लोगों ने वो सब सुन ली 

और एक मैसेज भेजा 

मँदिर में धोक लगाएँ 

ओह ! 

मतलब, अपना SBI अकॉउंट चैक करें। 

अकॉउंट खोला,

ये क्या?

फिर वही पड़ोस की दादी वाले शब्द दिमाग़ में आ रहे थे      

"बाहण बेटियाँ के खसमों, आपणी माँ के लोगो,

..................."


मगर, 

मैंने मँदिर के कपाट बँध करना ही बेहतर समझा।

ओह ! 

SBI अकॉउंट से log out करना। 

SBI, दुनियाँ का सबसे बड़ा फ्रॉड? 

ऐसा क्या था उस मँदिर में?

जो इतना गुस्सा आ रहा था?

ईश्वर इस महीने भी,

मेरी पेंशन की धोक अपने दान पात्र में लगा चुके थे।   


जबकी, 

मैं तो पेँशन के दान पात्र वाला मँदिर ही बदल चुकी 

SBI to ICICI 

सिर्फ, दो ही अकॉउंट हैं मेरे पास 

ओह्हो ! 

मँदिर? 

महज़ खाते नहीं? 

फिर ये क्या था? 

साँडाँ की लड़ाई मैं झाडाँ का खो। 

जैसे अम्बानी-अडानी आमने सामने।


फिर आप कौन? 

बैंक उनके?

ज़मीन उनकी? 

तुम्हारा कमाया पैसा भी उनका? 

हो कौन तुम?

क्या औकात तुम्हारी?

महज़ एक गोटी?

जिसे वो जिधर चाहें, उधर चल दें? 

जितना चाहें, जब चाहें, जैसे चाहें 

तब, सब हड़प जाएँ? 

और तुम्हेँ उसी में से, 

एक कुत्ते के टुकड़े-सा, निवाला निकाल

पेँशन के नाम पर धर दें? 


वो भी तुम्हारे लिए नहीं 

अपने दान पात्र के लिए। 

और तुम्हें बोलें, तुम उनके गांडुओं की। 

ओह ! 

ये क्या गोबर निकलने लगा मुँह से?  

"खाटुओं की खाट पे बिछ जाओ? 

"म्हारे दयानन्द नै माफ़ करियो?" 

कहाँ सुना था?

इस दयानन्द ने ऐसे क्या काँड किए हुए हैं? 

और कौन से वाला दयानन्द है ये? 


या?  

बहुत अपवित्र हो? 

पवित्र होने का यही एक मात्र रस्ता है, बालिके?   

क्या-क्या चल रहा है ये? 

वो भी तुम्हारी मर्जी के बैगर, 

नहीं! नहीं! 

सिर्फ़ मर्जी के बैगर नहीं, 

यहाँ तो मर्जी के खिलाफ !   


वन क्लीक फ्रॉड ऑनलाइन होगा 

पेँशन धँधा रुपी फ्रॉड ऑनलाइन होगा 

मगर, 

बैंक ऑनलाइन नहीं बदल सकते?

उसके लिए तो बड़े ईश्वरों के दर्शन करने ही पड़ेंगे?

ईश्वरमयी मामला कितना रौचक है ना? 

या ये ईश्वर ही गड़बड़ घौटाला है?     


आप क्या कहते हैं? जो ये सब पढ़ रहे हैं?  

Comments, even constructive criticism invited.

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