सोचो
एक तरफ़?
टीम 1 या A?
दूसरी तरफ?
टीम 2 या B?
ऐसे ही कितनी ही राजनितिक पार्टियाँ
या टीमें?
और
बीच में Chess Board?
उस Chess Board पर
आप और हम?
ज़िंदा, जीते जागते इंसान?
तो Chess Board कितना बड़ा हुआ?
जितना बड़ा आपका समाज?
या आपकी Constituency?
किसी भी इलेक्शन की
छोटी या बड़ी यूनिट?
छोटी यूनिट जैसे
कोई एक क्लास?
बड़ी यूनिट?
प्राइमरी, मिडल, सैकंडरी
कॉलेज या यूनिवर्सिटी?
या किसी राज्य
या देश की यूनिवर्सिटी?
वहाँ पर आपकी पहचान क्या है?
या क्या क्या हैं?
आपका ID?
नाम, क्लॉस, कोर्स, सब्जेक्ट्स
उनमें नंबर्स
और उनके मिलाकर कुल नंबर्स?
किसी भी वक़्त के अनुसार
उनकी अहमियत?
वक़्त के अनुसार क्यों?
क्यूँकि
जो एक वक़्त में खास अहमियत रखता है
जरुरी नहीं
वो
किसी और वक़्त में ऐसी ही अहमियत रखता हो?
जैसे किसी जमाने में
अगर फर्स्ट डिवीज़न अच्छी होती थी
तो किसी और जमाने में?
शायद 90s में फाइट होती है?
ऐसा क्यों?
ये उस वक़्त के
सिस्टम का हिसाब किताब बता रहे हैं।
यही फाइट एक ही वक़्त में
अलग अलग बोर्ड
या यूनिवर्सिटी के सिस्टम में
अलग अलग हो सकती है।
जैसे आजकल
कहीं 70s में ही चल रही है
तो कहीं 100 के आसपास की होड़ मिलेगी।
ये डिग्रीयाँ ये तो बता सकती हैं
हम किस तरह का काम करेंगे
जैसे अध्यापक, डॉक्टर या कुछ और बनेंगे।
क्या ये डिग्रीयाँ
ये भी बता सकती हैं
आपकी शादी कब होगी?
या कितनी होंगी?
बच्चे कब होंगे?
या कितने होंगे?
या जितने हैं
उतने ही क्यों है?
शायद हाँ?
और शायद ना?
क्या कभी आपने
अपनी डिग्रीयों को इस नज़र से देखा?
या सोचा तक?
या ये कैसा बेतुका सा लॉजिक है?
ये Chess Board
अभी पिछले कुछ सालों ने दिखाया है
सच है या नहीं?
ये आपको देखना बताना है
खुद अपनी डिग्रीयों से
और अपने आसपास की डिग्रीयों से
अरे !
पिछली बार
ऐसे से पहचान पत्र
आपने कब देखे थे?
कौन सी अलमीरा में दबे पड़े हैं वो?
ढूंढों? और देखो
जानो और पहचानो
अपने खास पहचान पत्रों को।
उनमें आपके होने वाले
पति, पत्नी, BF, GF या BFF?
या बच्चों तक का लिखा हुआ है क्या?
कैसे संभव है?
थोड़ा सा और पढ़ो
उनपर किसके हस्ताक्षर हैं?
कैसी कैसी कुर्सियों के?
आपने कैसे कैसे पेपर दिए हैं?
वो पेपर किसी डिग्री के लिए थे?
या नौकरी के लिए दिए थे?
या?