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Thursday, August 6, 2026

System, Code and Conflict of Interest Politics 3

दुनिया के बड़े बड़े झगड़े 

ज्यादातर, 

अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं?

 

Conflict of Interest Politics क्या है? 

इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?

इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?

इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?

अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?  

क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ 

Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?

इससे आगे कुछ भी नहीं?   


Child Production Factory जरुरी नहीं है 

मगर, 

बच्चे तो जरुरी हैं? 

और शादी भी? 

किसी भी इंसान के लिए ?

किसी भी घर के लिए ?

समाज के लिए? 

इस पर कोई प्रश्नचिन्ह हो सकता है क्या?

सारा खेल यही है?


सारा खेल डाटा में है?

डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने 

हथियार बना लिया है 

कैसा हथियार भला?   


किसकी शादी होगी?

और किसकी नहीं?

कब, किससे और कैसे?

कहाँ?

किस तारीख, महीना या साल?  

और करवाने वाले कौन होंगे?

या किसकी नहीं होगी?

ये जहाँ कहीं आप हैं 

वहाँ का सिस्टम निर्धारित करता है। 


किसके बच्चे पैदा होंगे?

और किसके नहीं?

कब, कहाँ और कैसे?

और कितने? 

किस घर या हॉस्पिटल?

या कहीं और?

पैदा करवाने वाले कौन होंगे?


किस तारीख, महीना या साल?

कितने बजे?

AM?

Before Noon?

Noon?

After Noon?

Evening?

After Evening?

Night?

Late Night?

Early Night?

At Dawn?                


कहाँ बच्चे पढ़ेंगे और कहाँ नहीं?

कहाँ तक पढ़ेंगे? 

और कब वो उन्हें स्कूल से ही 

या कॉलेज से चलता कर देंगे?   


किसकी नौकरी लगेगी और किसकी नहीं?

कब लगेगी?

और कब वो उन्हें वहाँ से चलता कर देंगे?


कौन अपना खुद का बिज़नेस करेंगे 
और कौन नहीं?
या?
किसे सिस्टम करने देगा?
और किसे नहीं?
किस किसकी उस सिस्टम को सर्विस चाहिएँ?
और किसकी नहीं?      


ऐसे ही और भी 

कितने ही जोड़ तोड़?

आपके और आपके सिस्टम के? 

डाटा के किए धरे?  


इसका मतलब?      

DATA ही दाता है?


इसमें छुपे हैं राज 

हर जीव 

और निर्जीव की कहानी के? 

उसके जन्म के 

और मौत के 

और 

इन दोनों के बीच 

जो कुछ होता है 

उस सबके? 


मतलब 

आज इंसान की हर समस्या का समाधान है 

मगर 

Conflict of Interest Politics को 

वो पसंद नहीं? 


और सबसे बड़ी बात 

वो समस्याएँ खड़ी करने वाले कौन हैं?

वो भी डाटा में ही छुपा है। 


आपके अपने सिस्टम में 

आपके घर के सिस्टम में 

और जहाँ कहीं आप रहते हैं 

वहाँ के सिस्टम में।   

ज़्यादातर 

जहाँ आप रहते हैं 

वहाँ के सिस्टम में। 


तभी हम बोलते हैं 

यहाँ का तो सिस्टम ही खराब है 

या 

यहाँ का सिस्टम बड़ा सही है। 


तो कोशिश करते हैं 

कुछ एक सिस्टम को पढ़ने की 

समझने की। 

System, Code and Conflict of Interest Politics 2

दुनिया के बड़े बड़े झगड़े 

ज्यादातर, 

अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं 

किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था में 

ज़्यादातर सँसाधन प्रयोग में होते हैं 

सबको उनके हिस्से का 

उनकी मेहनत 

और काबिलियत के अनुसार मिलता है।  


और कमजोर अर्थव्यवस्था में?

ज़्यादातर सँसाधन चंद लोगों के कब्जे में होते हैं 

ज़्यादातर संसाधनों का दुरुपयोग होता है 

या शायद,

उन्हें पता ही नहीं होता, 

सदुपयोग कैसे करना है? 


जैसे 

शरीर के अगर सभी हिस्से सही से काम नहीं करेंगे 

तो कहीं न कहीं गड़बड़ जरुर होगी 

ऐसे ही, किसी भी घर या समाज का है 

और ये सब अक्सर 

Conflict of Interest की राजनीती के कारण होता है। 


Conflict of Interest Politics क्या है? 

इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?

इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?

इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?

अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?  

क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ 

Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?

इससे आगे कुछ भी नहीं?   


अगर इसे ही सच मान लें 

तो 

सविँधान लड़कियों को दादालाही ज़मीन में 

उनका हिस्सा कैसे देता है? 

उन ज़मीनो या प्रॉपर्टियों के नाम के 

वहीँ बच्चे पैदा करवाता है क्या?


कौन हैं ये दोगले?

तर्क वितर्क वाले इंसान?

या कुतर्की?

अर्थ का अनर्थ करने वाले?

  

शिक्षा के सँस्थान?

या धब्बा शिक्षा के नाम पर? 

जो समाज की भलाई के नाम पर 

गरीबों के पैसे और ज़मीने खाते हैं?

या लड़कियों की ज़मीनो पर 

ज़बरदस्ती 

और धोखाधड़ी से कब्ज़े किए होते हैं।  

बस ऐसा मौका हासिल हो 

ना हो तो?

षड्यंत्र करके ही सही बना लें?    


यहाँ Conflict of Interest Politics है 

और सिस्टम भी 

मगर कोड या कोढ़ क्या है?

कुछ एक और पोस्ट 

और 

शायद आप ही मुझे बताने लगें?  

System, Code and Conflict of Interest Politics 1

दुनियाँ के किसी भी सिस्टम से शरीर का सिस्टम 

आज भी 

दुनियाँ के सबसे बेहतरीन सिस्टम में से एक है

या कहना चाहिए 

दुनियाँ का सबसे बेहतरीन सिस्टम है 

इसे पढ़कर 

कोई भी सिस्टम बेहतर बनाया जा सकता है 


वो फिर चाहे शिक्षा का हो 

या स्वास्थ्य का 

घर का हो, 

आसपास का या मौहल्ले का  

राज्य का हो 

या देश का 

या फिर 

देशो के आपसी रिश्तों का 

या वाद विवाद का 


वो फिर चाहे घर के अंदर का हो 

या उसकी सीमाओं का 

मौहल्ले का हो 

या उसके आसपास का

या सीमाओं का 

ऐसे ही राज्यों का हो 

या देशों का 

लेन देन का हो 

या सीमाओं की रक्षा का 


अंदर का सही 

तो बाहर का भी सही?

कोई जरुरी नहीं 

मगर, 

अंदर का सही, 

तो बाहर के हमलों से रक्षा बेहतर होती है 

अंदर की रक्षा मजबूत हो, 

तो बाहर के हमले भी कम होते हैं 


इसलिए 

किसी भी हमलावर का पहला काम 

अंदरुनी रक्षा को तोड़ना होता है 

जैसे फूट डालो और राज करो 

कमजोर रक्षा जल्दी ढह जाती है 

मगर, 

मजबूत रक्षा में कई किले होते हैं 


किले जितने मज़बूत, 

उतना ही वो सिस्टम मज़बूत 

वो फिर आपका शरीर हो, 

घर हो, 

रिश्ता 

या अर्थव्यवस्था

जहाँ कहीं की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होती है  

अक्सर, उतना ही मज़बूत वो सिस्टम होता है। 

Monday, August 3, 2026

"जाती", हूँ मैं? CA ST CA ST ING?

Casting "Out" Cast? 


जाती,

हूँ मैं?

जल्दी 

है क्या?

Out 

Skirt हूँ मैं?

Err 

Out 

Cast हूँ मैं?   


धप्पा या धब्बा जैसे कोई?

पैदाईश से ही?

माथे पर मोहर जैसे कोई?

या रतन जड़ा हो जैसे कोई?

SWRAN का?

सोने या चाँदी का?

GO LD?

SIL VER जैसे कोई? 


या हीरा जैसे कोई?      

DIA M OND सा?


METAL?

MI RR OR?

या 

Periodic टेबल का 

कौन सा Element?

Period!

Sic!


B  R  ASS?

KASHI?

VARA NASHI?

MATH URA?

VRINDHA VAN?

RISHI KESH?

HARI DWAR?  


या?

नाश कैसे कैसे?

बड़े लोगों के ये तास ?

या CHESS के दॉँव ?

कैसे कैसे?


जो बच्चियों पर ही रख देते हैं 

धब्बे या ठप्पे?

जैसे जाती कोई?

CAST CAST ING?


वो धब्बे वाली?

या ठप्पे वाली? 

आपकी बहन भी हो सकती है? 

आपकी बुआ भी?

बेटी भी?

माँ भी? 

चाची भी?     

ताई भी? 

दादी भी?

और बहु भी?  

  

खुद ही 

कोई CAST 

CAST ING  करके 

क्या मार देंगे? 

आप अपनी बहु को?

या बेटी को?

या बहन को?

या भाभी को? 

या बुआ को?

या माँ को?

या चाची को?

या ताई को?

या दादी को?


या ऐसे ही 

किसी पति को?

भाई को?

बेटे को?

भतीजे को?

बाप को?

चाचा  को?

ताऊ को?

फूफा को?

मामा को?

दादा को?                  


कैसे धब्बे हैं ये?

कहीं बीमारी से जैसे अटैक?

तो कहीं ऑपरेशन से?  

और कहीं?

दुनियाँ से ही चलते करने जैसे?


ये जड़ दिए हैं जैसे 

हमारे शरीर पर?

हमारे रिश्तों पर?

घरों पर?

गली मौहल्लों पर?

गाँव, शहरों पर?

शिक्षा के संस्थानों पर?

स्वास्थ्य के संस्थानों पर?

किताबों में 

पहनाओं में?


जीव जन्तुओँ पर?

और निर्जीवों पर भी?     

देश में भी 

और विदेश में भी?

कोई  रतन जैसे? 


झलकते हैं जैसे 

शीशे से?

पानी से?

खान पान से?


लहराते हैं जैसे?

इठलाते हैं जैसे? 

हवा से?

CIVIL से?

या DEFENCE से?


खुशबु से?

या बदबू से?

सुगँध से?

या 

दुर्गन्ध से?  

महक से?

या सड़ाँध से? 

   

HELICOPTER से?

AIRCRAFT से?

PLANE से?

या?

FIGHTER JET से?

या DRONE से? 


आह CAST?

कैसी कैसी CAST?

कहीं वो सफ़ेद है?

अटैक ?

और कहीं?

काली है?

अटैक?

या गाली जैसे कोई?

या धब्बा 

या धप्पा जैसे कोई? 

 

कहीं हाथ पर?

कहीं पाँव पर?

कहीं माथे पर?

 कहीं चेहरे के इस हिस्से पर?

और कहीं?

चेहरे के उस हिस्से पर?

कहीं शरीर के इस हिस्से पर?

कहीं शरीर के उस हिस्से पर?  

और 

कहीं पुरे ही शरीर पर?

किसी निशान या 

वज़न सा छुपा हुआ जैसे?


कोई अटैक?   

या कोई बीमारी जैसे?  


किसने किया है?

क्यों किया है?   

सबसे अहम कैसे किया है? 

KARMA ने?

DHARMA ने?

या SYSTEM ने?

या किसी 

ऐसे से ही कोड ने ?

या कोढ़ ने?


जानना चाहेँगे 

ये KARMA 

DHARMA 

या SYSTEM कौन हैं? 

Friday, July 31, 2026

Mind The Number and Shape ( (SLC 2)

किसी लैब में कोई इंस्पेक्शन चल रहा है 

और साथ में खड़े कोई सीनियर बोलते हैं 

Mind The Number 

आपकी निगाह जहाँ टिकी थी 

उसे देखकर। 

आपकी निगाह कहाँ टिकी थी? 

किसी प्रोफेसर की लैब के बोर्ड पर

उनके Academic Profile पर। 


क्या था उस नंबर में? 

उसके बाद थोड़े बहुत 

रिसर्च के नंबर समझ आने लगते हैं।  

क्यूँकि उस लैब से आगे 

कई और लैब के Academic Profile पढ़े। 


क्या था उन प्रोफाइल्स में ऐसा?

कोई पैटर्न?

जो प्र्शन कर रहा था जैसे?

किसी का भी प्रोफ़ेशनल प्रोफाइल 

उसकी निजी ज़िंदगी को कैसे प्रभावित करता है?

अपना और अपने आसपास का डाटा 

कैसे साथ साथ लेकर चलता है?    

जैसे कोई साँकेतिक प्रोफाइल? 

ईशारा, उस वक़्त के वहाँ के सिस्टम की तरफ?  


मुझे इनकी IDs देखनी हैं 

कुछ एक की कुछ IDs मिली भी 

चौंका रही हों जैसे। 

ये 2018 या 2019 की बात है 

उसके बाद तो जाने कहाँ कहाँ 

और कैसे कैसे डाटा और पैटर्न देखे। 


जैसे  

आपके पास कोई मोटा सा इंसान खड़ा है 

पतला भी हो सकता है 

मगर यहाँ मोटा था 

और 

कहीं कोई नौटँकी चल रही है 

बता रहे हों जैसे 

Mind The Shape 


एक ही नाम के कई आदमी जैसे 

मगर,

अलग अलग shape 

और अलग अलग weight 

अलग अलग वक़्त के किरदार जैसे? 

बिलकुल अलग अलग जगह 

और अलग अलग प्रोफ़ेशन 


जैसे?

भारती?   

कोई Student?

कोई Pilot? 

और कोई?

कपिल शौ का किरदार?

कैसे पहचानोगे?

एक दूसरे के बिलकुल विपरीत जैसे? 


कुछ कुछ ऐसे ही 

जैसे 

जय वीर 

वि जय 

वि काश?

वि कास?

वि नय?

वि राज?  

कुछ और भी हो सकता है? 


कितने ही शब्द? 

और 

कितने ही combinations की सम्भावनाएँ? 

संभावनाओं का खेल है ज़िंदगी। 


एकदम अलग नाम? 

अलग अलग इंसान? 

अलग अलग उम्र? 

अलग अलग प्रोफ़ेशन? 

अलग अलग जगह?

अलग अलग जेंडर?

और कहीं तो जाती, 

और धर्म भी?   

LEGOS बच्चों के खेल जैसे?

या बड़ों के LEGOS में 

बच्चों से आगे भी बहुत कुछ है। 

Thursday, July 30, 2026

Semiotic Lab Culture (SLC 1)

इशारों ही इशारों में? 

बात बन जाती है? 

और बात बनते बनते? 

बात टल भी जाती है?

या बिगड़ भी जाती है? 


होते देखा है ऐसे भी कहीं?

गुप्तगू में?

मुस्कराहट में?

आंशुओं में?

मुँह फुलाने में?

तीखी नज़र में?

कड़वी नजर में?

घूरने में?

नजर घुमाने में?

आँखों की तिल्ली घुमाने में?


एक, दो या तीन?

या कितनी ऊँगली दिखाने में?

अंगूँठा दिखाने में?

एक ऊँगली आगे पीछे कर 

कड़वी नज़र दिखाने में?

किसी की तरफ ऊँगली करने में?

अंगूँठा और एक ऊँगली से 

जीरो बनाने में?


ऐसे ही 

Good? 

Bad? 

OK? 

OK? OK? 

Best of Luck?

Heart Shape?


और भी ना जाने कितने ही संकेत?

इशारों इशारों में ही? 

कर जाते होंगे?

जाने कहाँ कहाँ?

और किस किसको?

और कब कब?

या किसलिए?


ऐसे भी बातें होती हैं?

अब सिर्फ बातें होती हैं?

या उससे आगे भी कुछ होता है?

ये तो निर्भर करता है?

कितने सारे फैक्टर्स पर?


जैसे?

सँस्कारों पर?

संस्कृति पर?

विचारों पर?

प्रगति पर?


वक़्त के हिसाब किताब पर?

तारीखों, महीनों या सालों के 

नंबरो या कोडों पर?

और?

किसी भी जगह की राजनीती पर?


इशारों और संकेतों के इस जहाँ को 

या कोडों या कोढों को?

थोड़ा सा और उधेड़ें?

थोड़ा सा और इसका दायरा बढ़ाएँ?   

उससे हम ना सिर्फ़ खुद को बेहतर समझ पाते हैं 

बल्की,

अपने घर और आसपास को भी 

खुद के सिस्टम को भी 

और 

अपने घर और आसपास के सिस्टम को भी। 

 

मतलब?

ख़ामियों  को भी 

और 

ख़ास शक्तियों को भी 

जो हर एक इंसान के पास हैं 

क्यूँकि 

हर इंसान अनोखा है 

ख़ास है 

आपके जैसा ना कोई हुआ 

और ना होगा 

इसलिए खुद को पहचानों 

और डम्मी या मोहरे बनने से बचो। 


बस अपनी कमियों 

और शक्तियों को पहचानों  

कमियों को चलता करो 

और शक्तियों को निखारो

जो आपको अपना मोहरा बनाते हैं 

वो आपकी दुखती रगो को पकड़ते हैं 

और पकड़े ही रहते हैं 

उन्हें बढ़ाते चढ़ाते हैं 

और बढ़ाते चढ़ाते ही रहते हैं 

आपको उसके उल्टा करना है 


अपनी खासियतों को पकड़ना है 

और पकड़े रखना है 

उन्हें बढ़ाना चढ़ाना है 

खामियों को वक़्त ही नहीं देना। 

फिर आप एक ताकत हैं 

ना सिर्फ़ अपनी 

बल्की 

अपने घर की 

आसपास की और समाज की भी। 


Semiotic Lab Culture 

यही पढ़ाती और सिखाती है 

और 

वो हर कल्चर और जगह पर है 

हर जीव और निर्जीव में है। 

देखना, पढ़ना और समझना शुरु करें उसे?  


Semiotic?

साँकेतिक?

जो संकेतों से आगे भी  

बहुत कुछ बताता, समझाता है? 

ये तो जैसे ABCD हैं 

कोड या कोढों के जहाँ को 

और उनके मतलबों को समझने के लिए 

जैसे?  


Media Lab Culture 

और इसके Ingredients को समझने के लिए 

बहुत जरुरी है ये लैब 

Media Lab Culture का ही 

एक छोटा सा 

मगर अहम हिस्सा जैसे। 

Universal Media Culture Lab 4

सत्ता और पत्ता की कहानी? 
कहानी या लड़ाई? 

सत्ता और सट्टा 
दोनों एक ही बात हैं क्या?
ऐसे ही 
जैसे पत्ता और प्रशनचिंह?  

सत्ता एक फिल्म आई थी?
या पत्ता?
तास के पत्ते जैसे?
इक्की, दुग्गी, तीगी वैगरह?    

तास खेलते हैं आप ?
कौन से वाला खेल?
बच्चोँ वाले?
या थोड़े बड़ों वाले?

सिर्फ़ शीशा दिखाना है?
इक्की 
मेरी भी इक्की 
दुग्गी 
मेरी भी दुग्गी?
कुछ कुछ ऐसे ही?

या आपके खेल में 
इनसे आगे भी बहुत कुछ है?
आप सिर्फ़ इक्की, दुग्गी नहीं मिलाते?
उससे आगे भी रँग रुप है?
गुण अवगुण हैं? 
तासीर हैं, तेवर हैं?
अपने पराये हैं? 
और भी ना जाने 
कैसी कैसी ऊँच नीच हैं?
   
जैसे?
आप राजे महाराजों वाली 
सत्ताओं के खेल खेलते हैं?
वहाँ ऊप्पर 
OFFICERS वाली दुनियाँ में 
वही खेल खेले जाते हैं। 

जो कोई,  
कँधे से ऊप्पर जितना मजबुत होता है  
वो जीत जाता है?
बाकी?
या तो हार जाते हैं?
या उनकी रक्षा में लगे होते हैं?

राजा रानी की रक्षा?
राजमहलोँ की रक्षा?
कितने स्तर की है?
4 - 5?
6 - 7?
10 - 11?

और आप?
इसके कौन से स्तर पर हैं?
वो समाज में आपकी हैसियत, 
औकात, पिछड़ापन या आगे बढ़ते 
दायरों और समुहों को बताता है। 
आपकी या आपके अपनों की 
घर की या आसपास की 
सुरक्षा का दायरा क्या है?   

राजा रानी को बचाना है?
राजमहल को बचाना है?
ये तो कल की बातें हैं ना?
आज?
ऐसे से ही कुछ ख़ास 
औहदों को बचाना है?
कोढ़ों या कोडों  को बचाना है?

वो कोड आपके अपने 
या आपके अपनों के हैं?
या आप किन्हीं और के मोहरे 
या डम्मी मात्र हैं?
कैसे जानेंगे ये?
अगर आपको आज के समाज के 
कोड या कोढों का ही पता नहीं तो?    

कौन हैं आज के वो ख़ास?
राजा रानी?
ओहदे?
या कोड?

वो कोड
आपके लिए 
या आपके घर के लिए?
या आपके समाज के लिए?
कितने भले हैं?
या बुरे हैं? 

क्या आज भी आप 
कोई राम ढूँढ रहे हैं?
आज की सीता भी 
ज़मीन में समाती है?
सिर्फ़ किसी सिरफ़िरे के 
कुछ कहने भर से?

या जँगल भेझ दी जाती है?
किसी केकैयी द्वारा?
ऐसी सी ही कोई कहानी 
आज की कुन्ती की भी है?
कितने पति थे उसके?
कितने बच्चे?
और कैसे?

आज भी कोई करण है?
और दुर्योधन और दुशाषन भी?
आज भी कोई दशरथ है?
केकैयी और धृतराष्ट्र भी?

आज भी कोई कंस है?
और 
गाँधारी और द्रौपदी भी?
आज भी कोई औरत 
बिना उससे पूछे 
उसकी मर्जी के बिना 
4 -5 में बाँट दी जाती है?
कहीं ऐसा कुछ 
आपके बच्चों के साथ भी 
शुरु तो नहीं हो चुका? 

ये सब राजघराने हैं?
या लीचड़ों के अड्डे?  
आज भी कोई भीष्म पितामह है?
जो काँटो की सेज़ पर सोता है?    
वो सब जो आपने 
पुराने जमाने की किताबों में पढ़ा है?
बड़ा ही अजीबोग़रीब 
और ऊटपटाँग सा?
क्या वो सब आज भी होता है?  

या?
आज उससे भी ज्यादा कुछ है?
भला भी और बुरा भी?  
जैसे Conflict of Interest की राजनीती 
कल थी, आज भी है 
और आगे भी रहेगी 
आप उसमें किसी के मोहरे ना रहें 
डम्मी मात्र बनकर ना रह जाएँ 
उसके लिए भी 
इस खेल को जानना बहुत जरुरी है। 

क्यूँकि 
आज कन्धों से ऊप्पर का हिस्सा 
थोड़ा ज़्यादा ही चलता है 
और सिर्फ़ गिने चुने लोगों का ही नहीं 
जितने ज़्यादा, जितना ज्यादा 
पढ़ना लिखना और सोचना सीख जाएँ 
उतना ही। 

तो आप भी पढ़ते, लिखते हैं?
पढ़ना लिखना सिर्फ़ डिग्री वाला नहीं?
सिर्फ़ कुर्सियों या औहदों के लिए?
कुछ पन्ने 
या सर्टिफिकेट या पॉइंट्स मात्र? 
इकट्ठे करते जाने वाला नहीं 
सच का जानने समझने वाला 
या योगदान करने वाला ज्ञान?
पढ़े हुए भी और कढ़े हुए भी?
या कम डिग्री, सर्टिफिकेट होते हुए भी 
कहीं ज्यादा कढ़े हुए?     

तो तासों से आगे 
और कौन से खेल खेलते हैं आप?
क्या आज के खेलों का 
अंदाजा तक है आपको?
ख़ासकर उनका 
जो आदमी को रोबोट बनाते हैं?

कोई भी नहीं?
तो भी, समझना तो जरुरी है 
क्यूँकि 
आदमी के रोबोट बनने में 
या आदमी बने रहने में 
बस इतनी सी जानकारी 
या अज्ञानता की दूरी है।   

Tuesday, July 28, 2026

Universal Media Culture Lab 3

 सोच और खोज?


मगर उससे पहले 

Conflict of Interest की राजनीती को समझना बहुत जरुरी है। 


Conflict of Interest की राजनीती

सिर्फ़ रिश्तों में दरार पैदा नहीं करती 

वो रिश्ते ही खा जाती है 

रिश्तों का बिगाड़ इस स्तर तक कर देती है 

की कोई स्तर ही ना बचे 

उनकी "माँ बहन" करने लगे। 


अपमानकर्त्ताओं की इस मानसिक गिरावट को 

आप सिर्फ़ राजनितिक रैलियों या भाषणों में ही नहीं 

बल्की, 

आम बोलचाल के शब्दों 

पहनाओं, वस्त्रों  

खाने पीने की वस्तुओं 

हवा, पानी की गुणवत्ता 

पढ़ने लिखने के संसाधनों 

खेलने, वर्ज़िश करने 

या स्वास्थ्य के संसाधनों 

आवागमन-यातायात, खेत-खलिहानों 

अपने मकानों या दुकानों के नामो 

या पतों से लेकर   

गली मौहल्ले की पहचानों 

रीती रिवाज़ों के तौर तरीकों 

या यूँ कहो की 

जो कुछ भी आप 

देख, सुन, समझ और सोच सकते हैं 

उन सबमें घुला मिला हुआ देख सकते हैं। 


और 

ये सब आपका और आपके घर का 

आसपास का और गली मौहल्ले का 

गाँव, शहर, राज्य या देश का स्तर बताते हैं।   

इन्हे सुधारा भी जा सकता है 

और ज्यादा बिगाड़ा भी। 

सब आप पर और आपके आसपास पर, 

समाज पर निर्भर करता है। 


और इस सबको, 

Conflict of Interest की राजनीती ने 

मकड़ी के जाले-सा गूँथा हुआ है। 

उधेड़ने की कोशिश करें 

उस मकड़ी के जाले को?


जैसे जैसे 

उस Conflict of Interest की राजनीती से निकलोगे 

वैसे वैसे, बहुत कुछ अपने आप सुधरता जाएगा 

जितना अपने अपने के चक्कर में उसमें घुसते जाओगे 

उतना ही ना सिर्फ खुद ज्यादा उलझते जाओगे 

बल्की,

अपनी आगे की पीढ़ियों को भी उलझाते जाओगे।   

Universal Media Culture Lab 2

एक निग़ाह उस तरफ 


स्वस्थ, हट्टा-कट्टा शरीर?

हँसता-खेलता आँगन?  

आगे बढ़ते लोग? 

पीछे रहते लोग? 

तरक़्क़ी या पिछड़ापन?

अमीरी या गरीबी? 


या कुछ भी जो आप पाना चाहते हैं 

बस एक निग़ाह उस तरफ 

जो आप पाना चाहते हैं 

और एक निगाह उनकी तरफ 

जिनके पास वो सब है 

या जो वो सब पा चुके हैं 


बस इतने से में ही 

फर्क समझ आ जाएगा 

और ये भी 

की आप वो पा सकते हैं या नहीं?

कितने वक़्त में? 

या कितना पा सकते हैं?

और कितना नहीं?

और क्यों?


हो सकता है 

आपकी और उनकी सोच में फर्क हो? 

जो वो करते हैं 

वो आप नहीं करना चाहते?

आपके interest ही अलग हैं?  

या वो आप नहीं कर सकते?

शायद सोच का फ़र्क? 


या शायद कोशिश ही नहीं की कभी?

या ऐसे तो कभी सोचा ही नहीं?

ऐसे भी संभव है?

या शायद उनसे अलग तरीक़े अपनाकर भी?

हो सकता है वो उनसे भी बेहतर हो? 


Universal Media Culture Lab

Universal तो है 

और तरीक़े किसी भी काम को करने के? 

या कोई भी परिणाम लाने के हज़ारों?

तो ये जानना तो जरुरी है 

की सामने वाले ने क्या तरीका अपनाया है?

क्या वो आपके हिसाब-किताब से सही है?  

या आप कोई और अपना सकते हैं?  


कई बार हो सकता है 

सामने वाले का तरीका बेहतर हो 

मगर 

आपके Media Culture के Ingredients 

हो सकता है उस पर फिट ना बैठ रहे हों?

और उन Ingredients में ज्यादा हेरफेर,

आप कर नहीं सकते?

ऐसा करने पर शायद नुकसान ज्यादा हो?

और भी कितने ही कारण हो सकते हैं 

खासकर, 

बात जब इंसानो की ज़िंदगियों की हो?     


या शायद, 

बहुत ही थोड़े से हेरफेर से ही वो सँभव हो?

मगर, 

आपको अभी तक वो तरीका पता ना हो?   

Universal Media Culture Lab 1

Prevention is Better Than Cure


कितनी ही बार सुना होगा ये सब तो?

और जाने कहाँ कहाँ?

और कैसे कैसे विषयों पर?   


ईलाज से रोकथाम बेहतर?

ये तकरीबन हर विषय पर लागू होता है 

और हमेशा बेहतर

और हर सिस्टम पर लागू 


वो सिस्टम आपका कोई एक अंग हो 

या शरीर ही 

वो आपके घर का कोई एक कमरा 

या घर ही 


ये शरीर के सिस्टम पर लागू होता है 

और घर के सिस्टम पर भी

किसी एक रिश्ते पर लागू होता है 

और बाकी सब रिश्तों पर भी 


ये जैसे घर पर लागू होता है 

ऐसे ही आसपड़ोस पर भी 

गली मौहल्ले पर भी 

गाँव, शहर राज्य और देश पर भी 

और देशों के आपसी रिश्तों पर भी 


ये जैसे शरीर नाम की मशीन पर लागू होता है 

ऐसे ही बाकी सब मशीनों पर भी। 


ये उस बाग़ की तरह है 

उस लॉन या पार्क की तरह है 

उस खेत खलिहान की तरह है 

जिस पर एक नज़र डालते ही 

पता चल जाता है 

उस पर कितनी मेहनत हुई है 

कितना दिमाग लगा है 

या कितनी ही तरह के और संसांधन। 


किसी भी सिस्टम में मोटे तौर पर 

कोई अलग जंतर मंतर काम नहीं करता

कोई अलग सिद्धांत या जादू काम नहीं करता 

Universal Media Culture Lab के जैसे।