ड्राइविंग लाइसेंस
देखने में आया है
गाँवों में ख़ासकर
लोगों की IDs
शायद ही कभी सही होती हैं
कहीं कोई शब्द की गड़बड़?
कहीं पते में गड़बड़?
कहीं पिनकोड बदला हुआ?
कहीं नाम ही बदला हुआ?
कहीं एक ID में कुछ नाम
तो दूसरी में कुछ?
कहीं बाप का नाम
कहीं मोबाइल नंबर
कहीं फोटो ही जैसे
किसी और का ही हो?
कहीं ये
तो कहीं कुछ और बदला हुआ?
शुरु शुरु में जब
IDs को पढ़ना शुरु किया
तो लगा
शायद ऐसी जगहों पर
कम पढ़े लिखे
या बिना सही ट्रैंनिग के
लोगों को बिठाया हुआ है?
मगर
फिर कहीं पढ़ा ऐसा नहीं है
IDs सिस्टम का कंट्रोल सिस्टम हैं
बड़े ही चतुर तरीक़े से
सोच समझ के साथ
पार्टियाँ, उनमें बदलाव करती हैं
वो भी गुप्त रुप से।
इसलिए
कहीं का भी सिस्टम
काफी हद तक वहाँ की
उस वक़्त की अहम
पार्टियों के अनुसार चलता है
मगर, गुप्त रुप से।
कोरोना के बाद
मेरे पास
Driving Licence ID
नई बनवाओ के विज्ञापन आने लगे
ऐसा कई दिन होने के बाद
एक दिन मैंने अपनी ID उठाई
और उसे निहारा
ऐसा क्या ख़ास है इसमें?
अभी तो
Renew करवाने की तारीख़ भी दूर है।
सोचा
चल अप्लाई करके देख
ऑनलाइन फॉर्म भर दिया
पते पर निगाह अटक गई
क्यों?
मैंने तो अपनी IDs को
पहले भी ध्यान से देखा हुआ था
ख़ासकर
जब वोटर पहचान पत्र का समझ आया
तब ये क्यों नहीं दिखा
जो अब दिखा
क्या था ऐसा?
कुछ ख़ास नहीं
सिर्फ एक नंबर की गड़बड़
पिन कोड में
1 की बजाय 2 था
Printing mistake हो गई होगी?
या सीट पर कोई कम पढ़ा लिखा
या बिना ट्रैनिंग दिए हुए
कोई बिठा रखा होगा?
होती रहती हैं
ऐसी ऐसी
छोटी छोटी सी गलतियाँ?
मेरे भारत महान में?
क्या ख़ास है?
खैर।
नया फॉर्म भर दिया
नए नंबर देखे
कोई ख़ास फर्क नहीं आ रहा था
सिर्फ़ एक आध हर्फ़ के सिवाय?
फाइल बनाई
और Understand The IDs System
वाली फाइल्स के साथ रख दी।
Driving Licence ID
आज तक वही पुरानी है।
अभी वक़्त बचा है
Renew करवाने में
फिर, ऐसी भी क्या जल्दी?
इसके बाद कुछ एक और
आसपास की ID देखी
ऐसी ऐसी गड़बड़
यहाँ आम हैं
कोई खास नहीं?
मगर?
यही IDs
जब एक एक करके
ऐसे गड़बड़ होती जाती हैं
तो वो आम सी नहीं रहती
वो आफ़त भी हो सकती हैं?
और लॉटरी भी?
ऐसा ही यहाँ
कुछ के साथ हो रखा है।
सबसे बड़ी बात
उन हेराफेरियोँ को
प्रमाणित किया जा सकता है।
वो कहीं एक जगह नहीं हैं
जो आसानी से मिटाया जा सके।
हेराफ़ेरी पे हेराफ़ेरी के जैसे
यहाँ वहाँ गुप्त गुप्त
थोड़ी टेढ़ी मेढ़ी सी सुरँगों सी
जाल सी
फैली पड़ी हैं
जाने कहाँ कहाँ?
और कितने ही तरीकों
और रस्तों से बताई
या दिखाई जा सकती हैं
समझाई या उगाई जा सकती हैं?
ये आख़िरी तरीक़े Synthetic हैं
जो जाने कब से
जानकारों के लिए बड़े ही आम से हैं
मगर, ख़तरनाक हो सकते हैं।
ख़ासकर
जब ऐसा करने वालों को
परिणामों का अंदाजा ही ना हो।
मगर
ऐसा हो रहा है
जहाँ भर में
क्यूँकि
राजनीती अक्सर
बॉर्डरलाइन पर खेलती है?
Brinkmanship Model के जैसे?
कैसे?
जानते हैं आगे