हम एक ऐसे जहाँ में हैं
जहाँ हर इंसान कब्ज़े में है
कंट्रोल में है
जानते हैं किसके?
कहीं के भी सिस्टम के।
ये सिस्टम कौन बनाता है?
सैर पर चलें?
शायद आपको थोड़ा बहुत
समझ आए?
Nordic Countries की सैर कैसी रहेगी?
मान लो मैंने आज
किसी ऐसी सी यूनिवर्सिटी की सैर की
शाम को स्कूल से आने के बाद भतीजी
बुआ,
मैं अमृतसर गोल्डन टैम्पल देखने जाउँगी।
अच्छा, किसके साथ?
हमारे स्कूल का ट्रिप जा रहा है।
4 - 5 दिन के लिए
ना, नहीं जाना
बुआ ले जाएँगे तुझे, बड़े अमृतसर।
जा चुकी फिर तो
कब से उल्लू बना रहे हो।
बुआ ने
ऑनलाइन घुमाई की दिशा बदल दी
अगले दिन
बुआ शायद हम अमृतसर नहीं जा रहे
अच्छा, अब कहाँ की घुमाई?
जॉय गाँव जाएँगे
फिर से जॉय गाँव?
वहाँ तो घुम चुके तुम
एक दो साल में क्या बदलता है?
आप जब रोहतक थे
तो हर बार तलियार पे ले जाते थे
वहाँ क्या बदलता था?
ओह! सच में
बच्चा बड़ा हो गया
मन ही मन सोचते हुए।
वो तो अपना शहर है
फिर बुआ वहीँ रहते थे
तो भतीजी बुआ के पास आएगी
तो वहाँ तो जा ही सकते हैं ना ?
दो दिन बाद
बुआ, जॉय गाँव काफ़ी बदल चुका
अब वहाँ ये नया है
वो नया है
तो अब तो जॉय गाँव ही जाऊंगी
अमृतसर कैंसल
बुआ ने ये कौन से जॉय गाँव के
किन्हीं इंस्टिट्यूट या लैब की सैर की?
आसपास ही कहीं शायद?
ये भतीजी को नहीं मालूम।
ऐसे राजनितिक पार्टियाँ Social Simulations का ख़ाका तैयार करती हैं, वक़्त के साथ साथ। ये सब ना किसी स्कूल , कॉलेज या यूनिवर्सिटी जैसे Institute को पता होता और ना ही उन्हें, जिनपर ऐसी ऐसी और ना जाने कैसी कैसी घड़ाईयाँ, जहाँ कहीं घड़ी जा रही होती हैं। इनमें Deviations, Alterations, Manipulations, Hype और भी ना जाना क्या कुछ किया जा सकता है। निर्भर करता है की सामने वाली पार्टी को क्या चाहिए?
उन्हें ना बच्चोँ की कोई फिक्र होती है और ना ही बुजर्गों की। फिर युवाओँ की तो होगी कहाँ?
आगे ऐसे ऐसे और कैसे कैसे और उदाहरण लेंगे। आसपास से ही या दूर दराज़ से।

