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Tuesday, October 6, 2026

राजनितिक पार्टियाँ Social Simulations का ख़ाका कैसे तैयार करती हैं?

हम एक ऐसे जहाँ में हैं 

जहाँ हर इंसान कब्ज़े में है 

कंट्रोल में है 

जानते हैं किसके? 

कहीं के भी सिस्टम के। 


ये सिस्टम कौन बनाता है? 

सैर पर चलें? 

शायद आपको थोड़ा बहुत 

समझ आए?


Nordic Countries की सैर कैसी रहेगी?

मान लो मैंने आज 

किसी ऐसी सी यूनिवर्सिटी की सैर की

शाम को स्कूल से आने के बाद भतीजी 

बुआ, 

मैं अमृतसर गोल्डन टैम्पल देखने जाउँगी। 

अच्छा, किसके साथ?

हमारे स्कूल का ट्रिप जा रहा है। 

4 - 5 दिन के लिए 

ना, नहीं जाना 

बुआ ले जाएँगे तुझे, बड़े अमृतसर। 

जा चुकी फिर तो 

कब से उल्लू बना रहे हो। 


बुआ ने 

ऑनलाइन घुमाई की दिशा बदल दी 

अगले दिन 

बुआ शायद हम अमृतसर नहीं जा रहे 

अच्छा, अब कहाँ की घुमाई?

जॉय गाँव जाएँगे 

फिर से जॉय गाँव?

वहाँ तो घुम चुके तुम  

एक दो साल में क्या बदलता है?

आप जब रोहतक थे 

तो हर बार तलियार पे ले जाते थे 

वहाँ क्या बदलता था?

ओह! सच में   

बच्चा बड़ा हो गया 

मन ही मन सोचते हुए। 

वो तो अपना शहर है 

फिर बुआ वहीँ रहते थे 

तो भतीजी बुआ के पास आएगी 

तो वहाँ तो जा ही सकते हैं ना ?


दो दिन बाद 

बुआ, जॉय गाँव काफ़ी बदल चुका 

अब वहाँ ये नया है 

वो नया है 

तो अब तो जॉय गाँव ही जाऊंगी 

अमृतसर कैंसल 

बुआ ने ये कौन से जॉय गाँव के 

किन्हीं इंस्टिट्यूट या लैब की सैर की?

आसपास ही कहीं शायद?

ये भतीजी को नहीं मालूम। 


ऐसे राजनितिक पार्टियाँ Social Simulations का ख़ाका तैयार करती हैं, वक़्त के साथ साथ। ये सब ना किसी स्कूल , कॉलेज या यूनिवर्सिटी जैसे Institute को पता होता और ना ही उन्हें, जिनपर ऐसी ऐसी और ना जाने कैसी कैसी घड़ाईयाँ, जहाँ कहीं घड़ी जा रही होती हैं। इनमें Deviations, Alterations, Manipulations, Hype और भी ना जाना क्या कुछ किया जा सकता है। निर्भर करता है की सामने वाली पार्टी को क्या चाहिए?


उन्हें ना बच्चोँ की कोई फिक्र होती है और ना ही बुजर्गों की। फिर युवाओँ की तो होगी कहाँ?

आगे ऐसे ऐसे और कैसे कैसे और उदाहरण लेंगे। आसपास से ही या दूर दराज़ से। 

LifeLine चाहिए?

LifeLine चाहिए? 

LifeLine? 

हाँ! LifeLine 

ये बड़े लोगों के बच्चोँ को पैदाइशी मिलती है।
हक़ है उनका। 
क्यूँकि, उनके माँ बाप ने मेहनत की है 
अपने माँ बाप की मेहनत का भी नहीं खाएँगे क्या?

ओह! 
मतलब?
पैदाइशी हक़?

हाँ ! 
पैदाइशी हक़। 
एक ढँग के समाज में 
हर बच्चे को मिलता है 
पैदाइशी। 

मगर 
हमारे जैसे समाज में?
निर्भर करता है 
आप पैदा कहाँ हुए हैं?
कैसे लोगों के बीच?
और फिर कैसे कैसे 
लोगों के बीच 
पले बढे हैं?

आओ घड़ते हैं 
आपका भी पैदाईशी हक़ 
इसी समाज में 
जहाँ फ़र्क पड़ता है 
आप कैसे घर में 
या आसपास में पैदा हुए हैं?

घड़ते हैं 
ठीक वैसे 
जैसे बड़े लोगों ने घड़ा?
या?
उनसे बेहतर तरीक़े हैं 
हमारे पास?      

  
     Natural Environment

Builtin Environment Like Some Artificial Laboratory
आज का समाज?
कृत्रिम समाज?
ठीक ऐसे 
ये तस्वीर जैसे?   
बस इति सी बात ?

कृत्रिम रुप से तैयार किए गए वातावरण की सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ

Built in Environments And Social Simulations : Today's World Realities 


हर जीव

एक तरह के मीडिया में जन्म लेता है 

माँ के मीडिया से निकलकर 

(Amniotic Fluid) 

इस दुनियाँ के 

अलग अलग तरह के मीडिया में 

पलता और बढ़ता है। 


वो पलने बढ़ने वाला मीडिया 

कितना सुरक्षित है?

कितना आगे बढ़ने के लिए 

उपजाऊ तत्वों से भरा है?

या कितना असुरक्षित 

और नुकसान दायक तत्वोँ से?


सुरक्षित और उपजाऊ मीडिया में 

उसे बहुत कम मेहनत में भी 

काफी कुछ मिलता है 

और असुरक्षित 

और नुकसानदायक मीडिया में?

या तो वक़्त से पहले ही 

ख़त्म हो जाता है 

या 

बहुत ज्यादा मेहनत करने पर भी 

बहुत कम पाता है। 


हमारे समाज के  

किसी भी हिस्से की कहानी 

बस इतनी भर है। 

फिर क्या दोषारोपण? 

और क्या निर्दोष?

किसी इंसान पर?

जब सब कुछ किया धरा 

किसी भी तरह के 

मीडिया का हो?  


और मीडिया 

डिज़ाइन और इंजिनियर 

किया जा रहा हो? 

तो?

कृत्रिम रुप से तैयार किए गए 

वातावरण में उगे जीवों पर 

कैसा दोषारोपण?

और कैसी सज़ा?

ख़ासकर तब 

जब उन्हें ऐसा कुछ पता तक ना हो। 


जिन्होंने 

वो मीडिया 

डिज़ाइन और इंजिनियर 

किया है 

उनका क्या?


माना 

आम आदमी को 

ये कम पता है 

या पता ही नहीं है 

ख़ास लोगों को तो पता है?


Manufactured Consents 

Manufactured Identities 

Synthetic Media 

And 

Built in Environment Realities


कृत्रिम रुप से तैयार किए गए 

वातावरण की सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ 


कहो कितने उदाहरण दूँ?

अपने ही घर से शुरु करूँ?

या आसपड़ोस से? 

या खुद आप से? 

और आपके बच्चोँ से?  

Thursday, October 1, 2026

कैसे बनाते हैं कोई भी सामाजिक सामान्तर घड़ाई? Social Simulations?

IDs?

Location?

And?

Interactions?    


हमारी कोई भी ID कितनी महत्वपूर्ण है और कहाँ कहाँ, प्रयोग या दुरुपयोग हो सकती है?

या हो सकती हैं?

उदहारण लेते हैं, ऐसे ही कोई आम सा इंसान, हमारे बीच से ही?

सबसे बड़ी बात, ये उदाहरण या ऐसा ही उदाहरण कोई भी हो सकता है। मैं भी, आप भी, छोटा भी, बड़ा भी, गरीब भी और अमीर भी। 

एक छोटी सी टेबल से ये पता किया जा सकता है की कल जो किसी के साथ हुआ, क्या वैसा सा ही किसी और के साथ किया जा सकता है? 

वो सब करने का तरीका क्या होगा?

एक आम आदमी कितना कुछ कर सकता है, जाने या अंजाने?

अगर कुछ सही हो रहा है तो कोई बात नहीं। 

लेकिन अगर कुछ बुरा करने की नियत हो तो?

आप या हम, एक आम आदमी उसे कितना रोक सकता है?

या बिल्कुल ही टाल सकता है?

Module Constructive Or Destructive?  

कैसे बनाते हैं कोई भी सामाजिक सामान्तर घड़ाई?

या हम एक ऐसे जहाँ में है, जहाँ सबकुछ एक के बाद एक सामान्तर सामाजिक घड़ाईयाँ ही हैं? 

हम केवल अच्छे या बुरे मीडिया ingredients को पहचान कर अच्छे या बुरे की दिशा जरुर बदल सकते हैं?  

और ऐसा करने के लिए सबसे पहले हमें ये पता होना चाहिए की जो हमें बताया या दिखाया या समझाया गया, क्या वो सच भी था या है? 

जानने की कोशिश करते हैं आगे 

Wednesday, September 30, 2026

ID Driving Licence

ड्राइविंग लाइसेंस 


देखने में आया है 

गाँवों में ख़ासकर 

लोगों की IDs 

शायद ही कभी सही होती हैं 

कहीं कोई शब्द की गड़बड़?

कहीं पते में गड़बड़? 

कहीं पिनकोड बदला हुआ?

कहीं नाम ही बदला हुआ?


कहीं एक ID में कुछ नाम 

तो दूसरी में कुछ?

कहीं बाप का नाम 

कहीं मोबाइल नंबर 

कहीं फोटो ही जैसे 

किसी और का ही हो?


कहीं ये 

तो कहीं कुछ और बदला हुआ?

शुरु शुरु में जब 

IDs को पढ़ना शुरु किया  

तो लगा 

शायद ऐसी जगहों पर 

कम पढ़े लिखे 

या बिना सही ट्रैंनिग के 

लोगों को बिठाया हुआ है?

 

मगर 

फिर कहीं पढ़ा ऐसा नहीं है 

IDs सिस्टम का कंट्रोल सिस्टम हैं  

बड़े ही चतुर तरीक़े से 

सोच समझ के साथ 

पार्टियाँ, उनमें बदलाव करती हैं 

वो भी गुप्त रुप से। 


इसलिए 

कहीं का भी सिस्टम 

काफी हद तक वहाँ की 

उस वक़्त की अहम 

पार्टियों के अनुसार चलता है 

मगर, गुप्त रुप से। 


कोरोना के बाद 

मेरे पास 

Driving Licence ID 

नई बनवाओ के विज्ञापन आने लगे 

ऐसा कई दिन होने के बाद 

एक दिन मैंने अपनी ID उठाई 

और उसे निहारा 

ऐसा क्या ख़ास है इसमें?

अभी तो 

Renew करवाने की तारीख़ भी दूर है।


सोचा 

चल अप्लाई करके देख 

ऑनलाइन फॉर्म भर दिया 

पते पर निगाह अटक गई 

क्यों?


मैंने तो अपनी IDs को 

पहले भी ध्यान से देखा हुआ था 

ख़ासकर 

जब वोटर पहचान पत्र का समझ आया 

तब ये क्यों नहीं दिखा 

जो अब दिखा 

क्या था ऐसा?


कुछ ख़ास नहीं 

सिर्फ एक नंबर की गड़बड़ 

पिन कोड में 

1 की बजाय 2 था 

Printing mistake हो गई होगी?

या सीट पर कोई कम पढ़ा लिखा 

या बिना ट्रैनिंग दिए हुए 

कोई बिठा रखा होगा?

 

होती रहती हैं 

ऐसी ऐसी 

छोटी छोटी सी गलतियाँ? 

मेरे भारत महान में?    

क्या ख़ास है?


खैर। 

नया फॉर्म भर दिया 

नए नंबर देखे 

कोई ख़ास फर्क नहीं आ रहा था 

सिर्फ़ एक आध हर्फ़ के सिवाय?

फाइल बनाई 

और Understand The IDs System 

वाली फाइल्स के साथ रख दी। 

 

Driving Licence ID

आज तक वही पुरानी है। 

अभी वक़्त बचा है 

Renew करवाने में 

फिर, ऐसी भी क्या जल्दी? 


इसके बाद कुछ एक और 

आसपास की ID देखी 

ऐसी ऐसी गड़बड़ 

यहाँ आम हैं 

कोई खास नहीं?


मगर?

यही IDs 

जब एक एक करके 

ऐसे गड़बड़ होती जाती हैं 

तो वो आम सी नहीं रहती 

वो आफ़त भी हो सकती हैं? 

और लॉटरी भी?

ऐसा ही यहाँ 

कुछ के साथ हो रखा है। 


सबसे बड़ी बात 

उन हेराफेरियोँ को 

प्रमाणित किया जा सकता है। 

वो कहीं एक जगह नहीं हैं 

जो आसानी से मिटाया जा सके।


हेराफ़ेरी पे हेराफ़ेरी के जैसे 

यहाँ वहाँ गुप्त गुप्त 

थोड़ी टेढ़ी मेढ़ी सी सुरँगों सी 

जाल सी 

फैली पड़ी हैं 

जाने कहाँ कहाँ?

 

और कितने ही तरीकों 

और रस्तों से बताई 

या दिखाई जा सकती हैं 

समझाई या उगाई जा सकती हैं?


ये आख़िरी तरीक़े Synthetic हैं 

जो जाने कब से 

जानकारों के लिए बड़े ही आम से हैं 

मगर, ख़तरनाक हो सकते हैं। 

ख़ासकर 

जब ऐसा करने वालों को 

परिणामों का अंदाजा ही ना हो।  


मगर 

ऐसा हो रहा है 

जहाँ भर में 

क्यूँकि 

राजनीती अक्सर 

बॉर्डरलाइन पर खेलती है?

Brinkmanship Model के जैसे?  


कैसे?

जानते हैं आगे   

ID वोट पहचान पत्र

Code, System and Conflict of Interest Politics

IDs and Codes


मैंने IDs को इतना ध्यान से 

कभी नहीं निहारा 

जितना, इन कुछ सालों में 

आम आदमी के पास 

इतना वक़्त ही कहाँ होता है?

IDs को भी Microscope सा निहारें? 


हमारे यहाँ

हमारी IDs जैसे तैसे मिल जाएँ 

वही बहुत नहीं होता क्या? 

यहाँ तो कोई भी ID मिलने के बाद 

ऐसा अहसास होता है 

अरे! तू आ गई?

प्रसाद बाँटू क्या?


किसी ऐसी ही ID के बाद 

कोई और ही बताता है 

एक बार उसे पढ़ भी ले 

उसपर यूँ लटके झटके से 

देने वालों ने लिखा क्या है?

या क्या कुछ नया सा 

अजीबोग़रीब सा उकेर दिया है?


उसके बाद तो एक के बाद एक 

सब ID जैसे उधड़ती जाती हैं 

सिर्फ़ मेरी अपनी नहीं 

आसानी से 

किसी की भी उपलब्ध हो

कितनी सारी तो 

एक आम इंसान को भी 

ऑनलाइन ही मिल जाएँगी। 


पत्रकारों से 

या कुछ परोपकारियों से पूछो 

वो बता देँगे 

कहाँ कहाँ आसानी से उपलब्ध हैं? 

हमारी IDs?


और एक ये IDs देने वाले ऑफिस?

हमसे ही छुपाते फिरते हैं जैसे?

नहीं, नहीं 

कभी कभी ID वाले ऑफिस नहीं 

बल्की, 

ख़ास राजनितिक पार्टियों के 

कुछ ख़ास तरह के चमचे?


जैसे 

एक ऑफिस ने एक ID 

तीन बार बनाई 

मतलब?

उस So Called ऑफिस के 

तीन बार धक्के खिलाए  

और उस पर फोटो वो लगाई 

जो खुद मेरे पास नहीं।

उनके पास 

वो इतनी पुरानी फोटो कहाँ से आई ?


उस सबके बावजूद 

वो ID आपको कभी नहीं मिली 

हाँ 

ऑनलाइन जरुर मिल गई 

वहीं से पता चला 

जो उन्होंने फोटो ली थी 

वो तो नहीं है ये?

ये फोटो तो मेरे पास भी नहीं। 

फिर?

होता है? 

चलता है?

कहो? 

मेरा भारत महान है?

 

कौन सी ID थी ये?

सालों पहले कोई 

वोट पहचान पत्र 

उसके कुछ सालों बाद तो        

मैंने वोट डालना ही बँध कर दिया 

जबसे ये पता चला 

इलेक्शन कैसे होते हैं?

और वोट पहचान पत्र क्या होता है?  


हमारे पहचान पत्र IDs, 

जो कुछ गुप्त गुप्त चल रहा है

उसी की गुप्त गुप्त कॉपी जैसे हैं

अब वो कॉपी 

जो कुछ चल रहा है उसके 

कितनी आसपास है?

या दूर है  

ये निर्भर करता है 

किस पर ?

सामान्तर घड़ाईयाँ अच्छे के लिए या बुरे के लिए?

Social Simulations For Good or Bad? 


आप जो कुछ देख सुन सकते हैं 

या महसूस कर सकते हैं 

या समझा सकते हैं 

या समझ सकते हैं 

वो एक तरह से 

Social Simulations Training हैं। 


वो आपके वातावरण के अनुसार 

उसके Ingredients के अनुसार 

आपकी जानकारी के बिना भी 

आपको बदलती हैं 

भले के लिए या बुरे के लिए। 


आप जो कुछ खाते पीते 

पहनते या बोलते हैं 

या जो कोई काम करते हैं 

या जैसे जैसे जीवों 

या निर्जीवों के संपर्क में आते हैं 

वो सब आपको कहीं न कहीं 

आपकी जानकारी के बिना भी 

गुप्त रुप से ट्रेन करते हैं। 

थोड़ा या ज़्यादा। 


ध्यान से देखने समझने लगोगे 

तो पता चलेगा 

आपका वातावरण आप पर 

कितना भारी पड़ता है?

या कितना हल्का फुल्का सा? 

ज़िंदगी को आसान करता सा?  

या अपने आप ही जैसे 

आगे बढ़ाता सा?

या पीछे धकाता सा?


अगर इतना समझ आने लगेगा 

तो अपने आप ही 

आप उसमें, अपने अनुसार 

हेरफेर या बदलाव कर पाओगे। 


ज्यादातर 

गरीबी, बिमारियाँ 

झगड़े 

या ज़िंदगी की दिक्क़ते 

 आपकी  अपनी पैदा की नहीं हैं  

आपके वातावरण 

और उसमें मौजूद 

तत्वों (Ingredients) की देन हैं। 

यही Media Culture है। 


एक तरह का Media Culture 

आपकी जानकारी के बिना 

आपकी ज़िंदगी आसान बनाता है 

उसे किसी समतल से रोड सा 

आगे बढ़ाता है 

वहीं, 

दूसरी तरह का मीडिया 

उसमें 

अवरोधों या रोड़ों 

या गड्ढों का काम करता है।  


सबसे बड़ी बात 

इन सबमें सिर्फ़ अलग अलग तरह के 

तत्व ही नहीं हैं (Ingredients)

बल्की,

उनकी पैदा की गई 

अलग अलग तरह की Process हैं 

Method हैं, तरीक़े हैं 

जो कोई ख़ास तरह के परिणाम लाते हैं। 


अच्छे?

या बुरे?

ठीक किसी 

अच्छे या बुरे Module की तरह। 


ऐसे ही 

अच्छी या बुरी 

सामान्तर घड़ाईयाँ हैं 

राजनितिक पार्टियों के पास 

हर क्षेत्र के Expert हैं 

जिन्हें पता हो 

बिमारियाँ कैसे ठीक होती हैं 

उन्हें ये भी पता होता है 

बिमारियाँ कैसे कैसे पैदा होती हैं। 


ऐसे ही 

कोई भी नशा 

या Life Style Diseases है। 

उन्हें पैदा भी किया जा सकता है 

और ख़त्म भी। 


इन सबमें 

आपकी Permanent IDs 

और Location के इर्द गिर्द 

Interaction का खेल 

राजनितिक पार्टियों के सबसे बड़े हथियार हैं।      


आगे ऐसे से ही कुछ एक जिते जागते, चलते फिरते उदाहरण लेंगे। 

Code, System and Conflict of Interest Politics (TWIN TECH ZERO?)

क्या ZERO और HERO, एक ही बात हैं?

या अलग अलग?

या आप शायद खुद को HERO कह रहे हैं? 

और सामने वाले?

धीरे धीरे आपको ZERO की तरफ़ खिसका रहे हैं?    


अपने आसपास ZERO ढूंढों 

अपने घर में?

घर के किसी हिस्से में?

किसी दिवार पर 

किसी खिड़की या दरवाज़े पर?

किसी फर्नीचर पर 

किसी जीव जंतु या जानवर पर?

किसी पक्षी या पेड़ पौधे पर?

उकेर दिया गया हो जैसे?


या शायद 

अपने आप ही आ गया हो 

या बन गया हो जैसे?

किसी फ़र्श पर?

किसी रोड़ पर?

किसी नाली पर?

या ऐसे ही कहीं और?

आपके अपने कपड़ों पर?


मंदिर की जगह?

कहीं पर्दे पर?

किसी कड़े सा?

किस काम का है वो?


अगर किसी भी काम का नहीं 

तो उसे भर दो 

या निकाल दो वहाँ से 

खाली गढ़ा सा ना रखो 

या 

बेवज़ह का RING सा जैसे 

अखाड़ा, बिन चाहा?

 

बहम भी नहीं पालना है 

ऐसी ऐसी 

और ना जाने कैसी कैसी 

कहानियाँ सी 

इस पार्टी के हथियार के जैसे 

या उस पार्टी के हथियार के जैसे 

घुस आए हैं 

या आपकी जानकारी के बिना 

घुसा दिए गए हैं 

किसी ख़ास वक़्त पर 

वो उस जगह को 

उस घर में रहने वाले इंसानों     

और जीव जन्तुओं के खिलाफ 

एक ख़ुफ़िया साजिश की 

गवाही  दे रहे हों जैसे?


जैसा पहले भी कहा 

मुझे जो समझ आया 

वो सिर्फ़ लिखना है 

या दिखाना है 

ऐसा है या नहीं 

आपको तय करना है। 


आगे थोड़ा TWIN TECH के बारे में जानते हैं। क्या है? कैसे काम करती है? इसके कैसे कैसे प्रयोग या दुरुपयोग हो रहे हैं? 

जैसे, दो जीरो एक साथ? आप उसे TWIN TECH घड़ी जीरो कह सकते हैं।  

Tuesday, September 29, 2026

Code, System and Conflict of Interest Politics (TWIN TECH?)

TWIN TECH?

11?

22?

33?

44?

55?

66?

77?

88?

99?

Is this twin tech?

At least symbolic?


SYSTEM, Data Points and Twin Tech?

How it works? 

Across different types of systems? 

Fields and subjects?

Have you heard something like

What is your mobile number?


Twin tech would better like to ask

What is your birthday?

What is your house number?

House address etc?

Or maybe even Degree?

And marks there?


In case?

It's something like twin tech?

Even if just symbolic?

Or is there something more than that?

Artificial Rain Or Natural?

Yesterday, at 28. 9. 2026, in this part of world, what kind of drizzling was that sometime after that post? 

Social Simulations for Good or Bad?

Coincidence? Maybe? 

Or nothing is coincidence in life?