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Academic Journey?

Current Position Media Culture Lab (Independent Research and Writing),  June 2021 - Continue Experiential Learning, Research and Communicati...

Thursday, July 30, 2026

Semiotic Lab Culture 1

इशारों ही इशारों में? 

बात बन जाती है? 

और बात बनते बनते? 

बात टल भी जाती है?

या बिगड़ भी जाती है? 


होते देखा है ऐसे भी कहीं?

गुप्तगू में?

मुस्कराहट में?

आंशुओं में?

मुँह फुलाने में?

तीखी नज़र में?

कड़वी नजर में?

घूरने में?

नजर घुमाने में?

आँखों की तिल्ली घुमाने में?


एक, दो या तीन?

या कितनी ऊँगली दिखाने में?

अंगूँठा दिखाने में?

एक ऊँगली आगे पीछे कर 

कड़वी नज़र दिखाने में?

किसी की तरफ ऊँगली करने में?

अंगूँठा और एक ऊँगली से 

जीरो बनाने में?


ऐसे ही 

Good? 

Bad? 

OK? 

OK? OK? 

Best of Luck?

Heart Shape?


और भी ना जाने कितने ही संकेत?

इशारों इशारों में ही? 

कर जाते होंगे?

जाने कहाँ कहाँ?

और किस किस किसको?

और कब कब?

या किसलिए?


ऐसे भी बातें होती हैं?

अब सिर्फ बातें होती हैं?

या उससे आगे भी कुछ होता है?

ये तो निर्भर करता है?

कितने सारे फैक्टर्स पर?

जैसे?

सँस्कारों पर?

संस्कृति पर?

विचारों पर?

प्रगति पर?


वक़्त के हिसाब किताब पर?

तारीखों, महीनों या सालों के 

नंबरो या कोडों पर?

और?

किसी भी जगह की राजनीती पर?


इशारों और संकेतों के इस जहाँ को 

या कोडों या कोढों को?

थोड़ा सा और उधेड़ें?

थोड़ा सा और इसका दायरा बढ़ाएँ?   

उससे हम ना सिर्फ़ खुद को बेहतर समझ पाते हैं 

बल्की,

अपने घर और आसपास को भी 

खुद के सिस्टम को भी 

और 

अपने घर और आसपास के सिस्टम को भी। 

 

मतलब?

ख़ामियों  को भी 

और 

ख़ास शक्तियों को भी 

जो हर एक इंसान के पास हैं 

क्यूँकि 

हर इंसान अनोखा है 

ख़ास है 

आपके जैसा ना कोई हुआ 

और ना होगा 

इसलिए खुद को पहचानों 

और डम्मी या मोहरे बनने से बचो। 


बस अपनी कमियों और शक्तियों को पहचानों  

कमियों को चलता करो 

और शक्तियों को निखारो

जो आपको अपना मोहरा बनाते हैं 

वो आपकी दुखती रगो को पकड़ते हैं 

और पकड़े ही रहते हैं 

उन्हें बढ़ाते चढ़ाते हैं 

और बढ़ाते चढ़ाते ही रहते हैं 

आपको उसके उल्टा करना है 


अपनी खासियतों को पकड़ना है 

और पकड़े रखना है 

उन्हें बढ़ाना चढ़ाना है 

खामियों को वक़्त ही नहीं देना। 

फिर आप एक ताकत हैं 

ना सिर्फ़ अपनी 

बल्की 

अपने घर की 

आसपास की और समाज की भी। 


Semiotic Lab Culture 

यही पढ़ाती और सिखाती है 

और 

वो हर कल्चर और जगह पर है 

हर जीव और निर्जीव में है। 

देखना, पढ़ना और समझना शुरु करें उसे?  


Semiotic?

साँकेतिक?

जो संकेतों से आगे भी  

बहुत कुछ बताता, समझाता है? 

ये तो जैसे ABCD हैं 

कोड या कोढों के जहाँ को 

और उनके मतलबों को समझने के लिए 

जैसे?  


Media Lab Culture 

और इसके Ingredients को समझने के लिए 

बहुत जरुरी है ये लैब 

Media Lab Culture का ही 

एक छोटा सा 

मगर अहम हिस्सा जैसे। 

Universal Media Culture Lab 4

सत्ता और पत्ता की कहानी? 
कहानी या लड़ाई? 

सत्ता और सट्टा 
दोनों एक ही बात हैं क्या?
ऐसे ही 
जैसे पत्ता और प्रशनचिंह?  

सत्ता एक फिल्म आई थी?
या पत्ता?
तास के पत्ते जैसे?
इक्की, दुग्गी, तीगी वैगरह?    

तास खेलते हैं आप ?
कौन से वाला खेल?
बच्चोँ वाले?
या थोड़े बड़ों वाले?

सिर्फ़ शीशा दिखाना है?
इक्की 
मेरी भी इक्की 
दुग्गी 
मेरी भी दुग्गी?
कुछ कुछ ऐसे ही?

या आपके खेल में 
इनसे आगे भी बहुत कुछ है?
आप सिर्फ़ इक्की, दुग्गी नहीं मिलाते?
उससे आगे भी रँग रुप है?
गुण अवगुण हैं? 
तासीर हैं, तेवर हैं?
अपने पराये हैं? 
और भी ना जाने 
कैसी कैसी ऊँच नीच हैं?
   
जैसे?
आप राजे महाराजों वाली 
सत्ताओं के खेल खेलते हैं?
वहाँ ऊप्पर 
OFFICERS वाली दुनियाँ में 
वही खेल खेले जाते हैं। 

जो कोई,  
कँधे से ऊप्पर जितना मजबुत होता है  
वो जीत जाता है?
बाकी?
या तो हार जाते हैं?
या उनकी रक्षा में लगे होते हैं?

राजा रानी की रक्षा?
राजमहलोँ की रक्षा?
कितने स्तर की है?
4 - 5?
6 - 7?
10 - 11?

और आप?
इसके कौन से स्तर पर हैं?
वो समाज में आपकी हैसियत, 
औकात, पिछड़ापन या आगे बढ़ते 
दायरों और समुहों को बताता है। 
आपकी या आपके अपनों की 
घर की या आसपास की 
सुरक्षा का दायरा क्या है?   

राजा रानी को बचाना है?
राजमहल को बचाना है?
ये तो कल की बातें हैं ना?
आज?
ऐसे से ही कुछ ख़ास 
औहदों को बचाना है?
कोढ़ों या कोडों  को बचाना है?

वो कोड आपके अपने 
या आपके अपनों के हैं?
या आप किन्हीं और के मोहरे 
या डम्मी मात्र हैं?
कैसे जानेंगे ये?
अगर आपको आज के समाज के 
कोड या कोढों का ही पता नहीं तो?    

कौन हैं आज के वो ख़ास?
राजा रानी?
ओहदे?
या कोड?

वो कोड
आपके लिए 
या आपके घर के लिए?
या आपके समाज के लिए?
कितने भले हैं?
या बुरे हैं? 

क्या आज भी आप 
कोई राम ढूँढ रहे हैं?
आज की सीता भी 
ज़मीन में समाती है?
सिर्फ़ किसी सिरफ़िरे के 
कुछ कहने भर से?

या जँगल भेझ दी जाती है?
किसी केकैयी द्वारा?
ऐसी सी ही कोई कहानी 
आज की कुन्ती की भी है?
कितने पति थे उसके?
कितने बच्चे?
और कैसे?

आज भी कोई करण है?
और दुर्योधन और दुशाषन भी?
आज भी कोई दशरथ है?
केकैयी और धृतराष्ट्र भी?

आज भी कोई कंस है?
और 
गाँधारी और द्रौपदी भी?
आज भी कोई औरत 
बिना उससे पूछे 
उसकी मर्जी के बिना 
4 -5 में बाँट दी जाती है?
कहीं ऐसा कुछ 
आपके बच्चों के साथ भी 
शुरु तो नहीं हो चुका? 

ये सब राजघराने हैं?
या लीचड़ों के अड्डे?  
आज भी कोई भीष्म पितामह है?
जो काँटो की सेज़ पर सोता है?    
वो सब जो आपने 
पुराने जमाने की किताबों में पढ़ा है?
बड़ा ही अजीबोग़रीब 
और ऊटपटाँग सा?
क्या वो सब आज भी होता है?  

या?
आज उससे भी ज्यादा कुछ है?
भला भी और बुरा भी?  
जैसे Conflict of Interest की राजनीती 
कल थी, आज भी है 
और आगे भी रहेगी 
आप उसमें किसी के मोहरे ना रहें 
डम्मी मात्र बनकर ना रह जाएँ 
उसके लिए भी 
इस खेल को जानना बहुत जरुरी है। 

क्यूँकि 
आज कन्धों से ऊप्पर का हिस्सा 
थोड़ा ज़्यादा ही चलता है 
और सिर्फ़ गिने चुने लोगों का ही नहीं 
जितने ज़्यादा, जितना ज्यादा 
पढ़ना लिखना और सोचना सीख जाएँ 
उतना ही। 

तो आप भी पढ़ते, लिखते हैं?
पढ़ना लिखना सिर्फ़ डिग्री वाला नहीं?
सिर्फ़ कुर्सियों या औहदों के लिए?
कुछ पन्ने 
या सर्टिफिकेट या पॉइंट्स मात्र? 
इकट्ठे करते जाने वाला नहीं 
सच का जानने समझने वाला 
या योगदान करने वाला ज्ञान?
पढ़े हुए भी और कढ़े हुए भी?
या कम डिग्री, सर्टिफिकेट होते हुए भी 
कहीं ज्यादा कढ़े हुए?     

तो तासों से आगे 
और कौन से खेल खेलते हैं आप?
क्या आज के खेलों का 
अंदाजा तक है आपको?
ख़ासकर उनका 
जो आदमी को रोबोट बनाते हैं?

कोई भी नहीं?
तो भी, समझना तो जरुरी है 
क्यूँकि 
आदमी के रोबोट बनने में 
या आदमी बने रहने में 
बस इतनी सी जानकारी 
या अज्ञानता की दूरी है।   

Tuesday, July 28, 2026

Universal Media Culture Lab 3

 सोच और खोज?


मगर उससे पहले 

Conflict of Interest की राजनीती को समझना बहुत जरुरी है। 


Conflict of Interest की राजनीती

सिर्फ़ रिश्तों में दरार पैदा नहीं करती 

वो रिश्ते ही खा जाती है 

रिश्तों का बिगाड़ इस स्तर तक कर देती है 

की कोई स्तर ही ना बचे 

उनकी "माँ बहन" करने लगे। 


अपमानकर्त्ताओं की इस मानसिक गिरावट को 

आप सिर्फ़ राजनितिक रैलियों या भाषणों में ही नहीं 

बल्की, 

आम बोलचाल के शब्दों 

पहनाओं, वस्त्रों  

खाने पीने की वस्तुओं 

हवा, पानी की गुणवत्ता 

पढ़ने लिखने के संसाधनों 

खेलने, वर्ज़िश करने 

या स्वास्थ्य के संसाधनों 

आवागमन-यातायात, खेत-खलिहानों 

अपने मकानों या दुकानों के नामो 

या पतों से लेकर   

गली मौहल्ले की पहचानों 

रीती रिवाज़ों के तौर तरीकों 

या यूँ कहो की 

जो कुछ भी आप 

देख, सुन, समझ और सोच सकते हैं 

उन सबमें घुला मिला हुआ देख सकते हैं। 


और 

ये सब आपका और आपके घर का 

आसपास का और गली मौहल्ले का 

गाँव, शहर, राज्य या देश का स्तर बताते हैं।   

इन्हे सुधारा भी जा सकता है 

और ज्यादा बिगाड़ा भी। 

सब आप पर और आपके आसपास पर, 

समाज पर निर्भर करता है। 


और इस सबको, 

Conflict of Interest की राजनीती ने 

मकड़ी के जाले-सा गूँथा हुआ है। 

उधेड़ने की कोशिश करें 

उस मकड़ी के जाले को?


जैसे जैसे 

उस Conflict of Interest की राजनीती से निकलोगे 

वैसे वैसे, बहुत कुछ अपने आप सुधरता जाएगा 

जितना अपने अपने के चक्कर में उसमें घुसते जाओगे 

उतना ही ना सिर्फ खुद ज्यादा उलझते जाओगे 

बल्की,

अपनी आगे की पीढ़ियों को भी उलझाते जाओगे।   

Universal Media Culture Lab 2

एक निग़ाह उस तरफ 


स्वस्थ, हट्टा-कट्टा शरीर?

हँसता-खेलता आँगन?  

आगे बढ़ते लोग? 

पीछे रहते लोग? 

तरक़्क़ी या पिछड़ापन?

अमीरी या गरीबी? 


या कुछ भी जो आप पाना चाहते हैं 

बस एक निग़ाह उस तरफ 

जो आप पाना चाहते हैं 

और एक निगाह उनकी तरफ 

जिनके पास वो सब है 

या जो वो सब पा चुके हैं 


बस इतने से में ही 

फर्क समझ आ जाएगा 

और ये भी 

की आप वो पा सकते हैं या नहीं?

कितने वक़्त में? 

या कितना पा सकते हैं?

और कितना नहीं?

और क्यों?


हो सकता है 

आपकी और उनकी सोच में फर्क हो? 

जो वो करते हैं 

वो आप नहीं करना चाहते?

आपके interest ही अलग हैं?  

या वो आप नहीं कर सकते?

शायद सोच का फ़र्क? 


या शायद कोशिश ही नहीं की कभी?

या ऐसे तो कभी सोचा ही नहीं?

ऐसे भी संभव है?

या शायद उनसे अलग तरीक़े अपनाकर भी?

हो सकता है वो उनसे भी बेहतर हो? 


Universal Media Culture Lab

Universal तो है 

और तरीक़े किसी भी काम को करने के? 

या कोई भी परिणाम लाने के हज़ारों?

तो ये जानना तो जरुरी है 

की सामने वाले ने क्या तरीका अपनाया है?

क्या वो आपके हिसाब-किताब से सही है?  

या आप कोई और अपना सकते हैं?  


कई बार हो सकता है 

सामने वाले का तरीका बेहतर हो 

मगर 

आपके Media Culture के Ingredients 

हो सकता है उस पर फिट ना बैठ रहे हों?

और उन Ingredients में ज्यादा हेरफेर,

आप कर नहीं सकते?

ऐसा करने पर शायद नुकसान ज्यादा हो?

और भी कितने ही कारण हो सकते हैं 

खासकर, 

बात जब इंसानो की ज़िंदगियों की हो?     


या शायद, 

बहुत ही थोड़े से हेरफेर से ही वो सँभव हो?

मगर, 

आपको अभी तक वो तरीका पता ना हो?   

Universal Media Culture Lab 1

Prevention is Better Than Cure


कितनी ही बार सुना होगा ये सब तो?

और जाने कहाँ कहाँ?

और कैसे कैसे विषयों पर?   


ईलाज से रोकथाम बेहतर?

ये तकरीबन हर विषय पर लागू होता है 

और हमेशा बेहतर

और हर सिस्टम पर लागू 


वो सिस्टम आपका कोई एक अंग हो 

या शरीर ही 

वो आपके घर का कोई एक कमरा 

या घर ही 


ये शरीर के सिस्टम पर लागू होता है 

और घर के सिस्टम पर भी

किसी एक रिश्ते पर लागू होता है 

और बाकी सब रिश्तों पर भी 


ये जैसे घर पर लागू होता है 

ऐसे ही आसपड़ोस पर भी 

गली मौहल्ले पर भी 

गाँव, शहर राज्य और देश पर भी 

और देशों के आपसी रिश्तों पर भी 


ये जैसे शरीर नाम की मशीन पर लागू होता है 

ऐसे ही बाकी सब मशीनों पर भी। 


ये उस बाग़ की तरह है 

उस लॉन या पार्क की तरह है 

उस खेत खलिहान की तरह है 

जिस पर एक नज़र डालते ही 

पता चल जाता है 

उस पर कितनी मेहनत हुई है 

कितना दिमाग लगा है 

या कितनी ही तरह के और संसांधन। 


किसी भी सिस्टम में मोटे तौर पर 

कोई अलग जंतर मंतर काम नहीं करता

कोई अलग सिद्धांत या जादू काम नहीं करता 

Universal Media Culture Lab के जैसे। 

Wednesday, July 1, 2026

Academic Journey?

Current Position

Media Culture Lab (Independent Research and Writing), June 2021 - Continue

Experiential Learning, Research and Communication 

Media Culture Lab, Designing and Engineering of Society and Human Robotics


Vijay Dangi ORCID Profile ( But why is it known as OR CID? :) 


Academic Experience

Assistant Professor Biotechnology, 

UIET, MDU, RohtakOct., 2008 - June, 2021  

PhD, ACBT, MDU, Rohtak2003 - 2008

PhD Thesis Molecular characterization of oxalate oxidase purified from grain sorghum leaves. 

Visiting Fellow UF, Gainesville, FL, USAMay - June 2008


Administrative Management and Governance

Coordinator (Head), Department of Biotechnology, UIET, MDU, 2020 - 2021

Exams superintendent and deputy superintendent, UIET, MDU, 2012 - 2015

Secretary, Maharshi Dayanand, University Teaching Association, MDU, 2014 - 2015

Member of board of studies, MDU

Member of various departmental committees and events organization, curriculum modernization


Minor Research Project, University Funded, 2018 

Study of Y-chromosome haplogroups in local population.

Supervised M.Tech and B.Tech dissertations, 2009 - 2019 

Teaching and Laboratory, B.Tech, M.Tech and PhD level, 2008 - 2021 

Molecular Biology, Cell Biology, Genetics, Genomics and Proteomics, Diagnostic Techniques, Environmental Biology, Genetic Engineering, Basic Bioinformatics 


Faculty Development Programs and Workshops

High Impact Teaching Skills, Wipro, MDU, Rohtak, Haryana, 2010

Orientation Course, PU, Chandigarh, 2011

Refresher Course, University of North Bengal, Darjeeling, West Bengal, 2012

E-Learning Technologies, E-Content Development and MOOCS. Faculty Development Centre, MDU, Rohtak, Haryana, 2019 


Research, Intellectual Interests and Contributions (Code-Decode)

Investigating the parallels between molecular, biological processes and macro social systems. 


Experienced media culture as a tool for social designing, engineering and human robotics, like some living lab. By making changes in this media culture, it can be used and abused for good or bad.

Surveillance agencies, big companies, corporations and governments are using and abusing this for power struggles and to take over resources, mostly from weaker sections of society. The same can be used to design better systems and create better conditions for humans by doing changes in media culture ingredients.

My interests are how these systems mirror processes, systems or ecosystems. How they amplify, manipulate or mutate something for good or bad like growth, regeneration, prosperity, education, information or vice versa.


Hobbies and Creative Interests 

What happens, when research itself involves and mingles with hobbies and creativity and vice versa? Interesting interdisciplinary fusion? Better way to communicate science?

Reflection, poetry, satire writing in Hindi, English and Haryanvi