Rhythms of Life
Rhythms of Life is an evolving Media Culture. It evolved from molecular and synthetic media ingredients. Investigating the parallels between molecular, biological processes and macro social systems. Evolving focus areas are Designing and Engineering of Society and Human Robotics, Social Tales of Social Engineering.
Featured Post
Academic Journey?
Current Position Media Culture Lab ( June 2021 - Continue) Independent Research, Writing, Communication, and Experiential and Experi...
Monday, September 21, 2026
Media Ingredients and Interactions Designs
कुछ शब्दों की महिमा? PhD
PhD Thesis?
और Cyber Crime?
या उससे आगे भी कुछ?
या बहुत कुछ?
सुना है
ज़्यादातर PhD टेढ़ी खीर होती हैं
मेरी थोड़ी और ज्यादा टेढ़ी खीर थी
या शायद
हर किसी को अपना Struggle
हमेशा ज़्यादा ही लगता है?
2001 में MSc के बाद
एक साल
Exams Preparation के नाम रहा
MDU लाइब्रेरी के नाम
ऑनलाइन रिजल्ट चैक किया
तो पता चला हो भी गया।
उन दिनों D Park पर
Cyber Cafe होते थे
मैं और सुशीला
और दोनों का हो गया
ऑनलाइन रिजल्ट
ऐसा कह रहा था।
Print में जब रिजल्ट देखा
तो ये क्या?
जिसका ऑनलाइन नहीं हुआ था
और
उससे ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं थी
पता चलता है
मेरा नहीं, उसका हो गया?
कौन महान आत्मा थी ये?
या कहना चाहिए था?
Hooda कोई?
थोड़ा अज़ीब लगा
समझ ही नहीं आया
ये online crime था?
या offline?
या दोनों ही?
Concerned Exam Website पर
Complain भी की
मगर कोई ज़वाब नहीं मिला।
2002
Dr C S Pundir Lab Joining
पुरा नाम?
Chander Shekhar Pundir?
Biochemistry Lab
Sir, उत्तराखंड से थे
उन दिनों का UP?
UTTAR PRADESH
2003
PhD Registration
और Co Supervisor?
Dr Arun Sharma Lab
MRC Delhi
Location?
National Institute of Communicable Diseases?
IP College for Women के सामने
Indraprastha College
Civil Lines, ISBT, Kashmere Gate
Maharana Pratap Inter State Bus Terminal
2003 - 2006
सिर्फ़ शब्दों की महिमा मात्र?
कोड या कोढ़ जैसे?
सबकुछ छिपा हो जैसे उन्हीं में?
साथ साथ चलता है जैसे?
हमारी ज़िंदगी को ही नहीं
बल्की, हमारे आसपास
ज़िंदगियों को भी
प्रभावित करता हुआ?
किसी भी Location पर
किसी भी तरह का
कोड या कोढ़?
और
जाने या अनजाने
उनकी Interaction
क्या कुछ करती है?
या कर सकती है?
देखें?
ये Backgear?
सिर्फ़ Knowledge Purpose
जो घटित हो चुका
Corona Time Period
इस दौरान जो कुछ हुआ
वो क्यों हुआ?
या कैसे हुआ?
कुछ शब्दों की महिमा? Blogger Profile
Blogger Profile
https://www.blogger.com/profile/17374055131061328649
शब्द की महिमा? ORCID?
कहीं एक प्रोफाइल बना
https://orcid.org/0000-0003-0429-2322
और?
कहीं कोई ख़ास सरकार?
तमिलनाडु?
और बंगाल?
या भर्म शायद?
OR CID?
उस प्रोफाइल में
कुछ Options हैं
जैसे?
Publications Type
आपने कुछ के लिए लिखा
Reports
और?
कहीं कोई FIR जैसे?
या शायद मेरा ही भर्म?
कुछ वक़्त के बाद
उसके Publications के
कुछ नंबर बढे
9 से 11 ?
नहीं, फिर से भर्म?
मैंने उन नंबर को
दो दिन पहले फिर बदला
अरे! ये क्या हो रहा है?
अपराधियों का
मेरे प्रोफाइल पर कन्ट्रोल ?
मैं 11 से वो नंबर
7 कर चुकी थी
अब उसके Works में
एक और जोड़ा
A hidden system controls what, when and where you can publish and who will gets the credit.
मतलब 8 होना चाहिए था
मगर?
नंबर 7 ही दिखा रहा था
हालाँकि
ये नया टाइटल
वहाँ दिख रहा था
क्या गुल हो गया?
ऐसे कैसे?
आज फिर अपराधी
अपना काम कर रहे थे
मेरे प्रोफाइल पर?
चलो ढूंढों क्या बदल गया?
कोई एक Published Work?
और?
किन्हीं Published Work में?
ISBN नंबर गुल?
और किन्हीं में?
दूसरा ASIN?
Print Edition वाला?
Kindle Edition नहीं।
क्यों?
पीछे कहीं पढ़ा था क्या आपने?
Mind The Publication Number?
Mind The Weight and Shape?
ऑनलाइन किसी प्रोफाइल पर
कोई शब्द बदल देना?
जैसे?
Report to Book
क्या बदल सकता है?
ऐसे ही जैसे
कोई एक Publication Number?
ऐसे ऐसे Experiment
आप भी कर सकते हैं
आप क्या बदलते हैं
और कहीं और
या खुद आपकी ज़िंदगी में
क्या कुछ बदलता है?
या बदल सकता है?
कैसे?
जानते हैं आगे
पढ़ते रहिए
मैंने भी यहाँ वहाँ
और
जाने कहाँ कहाँ से सीखा है।
एक दिन में नहीं
2018 से चल रहा है
ये Code Decode
उससे पहले सिर्फ़ और सिर्फ़
कुछ सिरफिरे से प्रश्न थे।
जैसे कुछ मौतें
और कुछ शादियाँ
यहाँ वहाँ
कुछ अजीबोग़रीब सा
किन्हीं बच्चोँ के
बालों का बदलना, वैगरहा।
Sunday, September 20, 2026
शब्द की महिमा?
एक शब्द
सिर्फ एक शब्द
क्या कुछ कर सकता है?
सिर्फ एक शब्द?
क्या एक शब्द
कोई तख़्त हिला सकता है?
या दिला सकता है?
सिर्फ़ एक शब्द?
क्या शब्दों की महिमा
सच में इतनी है?
किसी ने कहा
हम सिस्टम बनाते हैं
और वो सिस्टम
हमारे लिए काम करते हैं।
संभव है क्या?
ऐसे ही जैसे
वो कहते हैं
सरस्वती
"तुम्हारी जुबाँ पर बैठती है
जो भी बोलो
सोच समझकर बोलो। "
सच है क्या?
देखें?
मान लो आपने कुछ बोला
और वो कोड
किसी पार्टी को
अपने लिए सही लगा
उन्होंने आपको सुना
चाहे चोरी छुपे सुना
या सीधा सीधा कहीं
और उस कोड को उन्होंने
अपने हथियार के रुप में
प्रयोग किया।
भले के लिए किया?
या बुरे के लिए किया?
भला आदमी प्रयोग करेगा तो?
भले के लिए प्रयोग होगा?
और
बुरा आदमी प्रयोग करेगा तो?
मान लो
शब्द भी डिज़ाइन हैं
जैसे हर वो चीज़
जो आप देख, सुन
या समझ सकते हैं
एक कोड है।
ऐसे ही
हर कोड या कोढ़
एक डिज़ाइन है।
ऐसे ही
जो कुछ आप
बोल, लिख
या पेंट कर सकते हैं
या इशारों से समझा सकते हैं
वो एक डिज़ाइन है।
डिज़ाइन भी एक कोड
या कोढ़ है।
भला आदमी प्रयोग करेगा तो?
भले के लिए प्रयोग होगा?
और
बुरा आदमी प्रयोग करेगा तो?
आपकी ज़ुबाँ का भी ऐसा है
आपने क्या कहा है
या लिखा है
या पेंट किया है
या ईशारा किया है
उससे ज्यादा
ये निर्भर करता है
उसका प्रयोग
कैसा आदमी कर रहा है?
या शायद जरुरी नहीं
वो आपके पास पहुँचा ही
एक कोड या कोढ़ जैसे है?
उसका प्रयोग या दुरुपयोग
जहाँ से वो पहुँचा है
या सिस्टम की तरह
जिस किसी ने वो बनाया है
उन्हीं द्वारा
उनके अपने भले के लिए होगा
उसमें सामने वाला का
फिर भला हो या बुरा
इससे उन्हें क्या लेना देना?
उदाहरण लें?
Friday, September 18, 2026
Design: Echo and Mirror? Cast Casting?
नाक बड़ी?
या
आँख?
कान?
या
दिमाग?
नाक की मिमिक्री
कैसे कैसे की जा सकती है?
ऐसे ही
आँख, कान
या दिमाग की भी?
और ऐसे ही
शरीर के किसी भी अंग की?
इनके कितनी तरह के डिज़ाइन
कहाँ कहाँ उकेरे जा सकते हैं?
सुनाए जा सकते हैं?
दिखाए जा सकते है?
या बिना सुनाए या दिखाए भी
समझाए जा सकते हैं?
किसी कोड या कोढ़ से जैसे?
कितनी ही राजनितिक पार्टियाँ
और कितने ही कोड या कोढ़?
या डिज़ाइन?
या जितनी राजनितिक पार्टियाँ
जितने सिस्टम
उत्तों के उतने ही तरीक़े
और कोड या कोढ़?
और उतनी ही तरह के
भले या बुरे असर भी?
इन्हें
Echo and Mirror
या
ऐसे से ही किसी और
मॉडुल से समझ सकते हैं क्या?
और समझा भी सकते हैं?
ऐसे ही Cast Casting
और Mimicry भी?
भले के लिए भी
और बुरे के लिए भी?
सबसे बड़ी बात
आपको कुछ ख़ास इज्जाद नहीं करना
ये सब
आपकी अपनी ज़िंदगी में हो रहा है
आसपास की ज़िंदगियों में हो रहा है
आपके आसपास चारों तरफ
जिधर देखो, सुनो, समझो उधर ही
जैसे बिखरा पड़ा है।
अच्छे के लिए भी
और बुरे के लिए भी।
Constructive and Destructive Module जैसे
Monday, September 7, 2026
दिमाग़ी किल्ला
इंसान के दिमाग़ से ही शुरु करें?
बहुत चलता है ये
सच में बहुत चलता है
दुनियाँ को कब्ज़ा रखा है इसने।
हमारा दिमाग़
बड़े ही टेढ़े मेढ़े से
डिज़ाइन वाला दिमाग़
खास तरह के चैम्बर में
छुपा हुआ दिमाग
कई तहों के अंदर
बैठा ये दिमाग़
अपनी सुरक्षा के लिए
कैसी कैसी चारदिवारियों
और कैसे कैसे द्रव्यों की
सेनाओं के सहारे
चलाता है ये सिस्टम सारा?
जिसे हम शरीर कहते हैं?
सबसे ऊप्पर खोपड़ी पर
बालों से ढका हुआ?
अलग अलग जगह
अलग अलग
मौसम के अनुसार
बालों से ढका हुआ।
बाल भी
अलग अलग जगह के मौसम
और वातावरण के अनुसार
उन्हें झेलने के लिए
अलग अलग रंग लिए?
अलग अलग बनावट लिए?
अलग अलग तरह के
डिज़ाइन जैसे?
कोई छोटे
तो कोई लम्बे?
कोई पैदाइशी भूरे?
या काले?
और
इनके बीच भी
कितने ही रंग?
सुनहरे?
ज्यादा भूरे?
कम भूरे?
बीच के?
ऐसे ही
ज्यादा काले
कम काले?
और इनके बीच के?
ऐसे ही सफ़ेद
उम्र की रौशनी लिए?
अनुभवों के गठ्ठर बाँधे जैसे?
या यूँ ही
उम्र से पहले ही
वातावरण या मौहाल के
अलग अलग हादसों के शिकार जैसे?
कहीं एकदम सिल्की?
और कहीं?
एकदम
ऐठें, गुथे हुए जैसे?
घुँघराले या सिल्की बाल?
कहीं हल्के हल्के
हौले हौले हवा से तैरते जैसे?
और कहीं?
बधें जाने कैसे कैसे बंधनो में?
इनकी महिमा को
थोड़ा और जानने की कोशिश करते हैं।
सिस्टम और डिज़ाइन
जैसा की पहले भी कई बार कहा
कोई भी चीज़
जो आप देख, सुन सकते हैं
महसूस कर सकते हैं
या समझ सकते हैं
एक कोड है ।
वो कोड एक पार्टी की नज़र में
कुछ हो सकता है
और
किसी और पार्टी की नज़र में कुछ और।
या
अलग अलग पार्टियों की नज़रों में
एक होते हुए भी
अलग अलग तरह से
प्रयोग या दुरुपयोग हो सकता है
अलग अलग वक़्त पर
उनकी अपनी जरुरत के अनुसार।
मान लो
8 नंबर पर वो बच्चे पैदा करवाते हैं
या ऐसा ही कुछ करते हैं
ये 8
अलग अलग पार्टी के अनुसार
अलग अलग नंबर के साथ मिल सकता है।
ऐसे ही
मान लो
9 नंबर पर
वो किसी की ऎसी तैसी करवाते हैं
या
अलग अलग तरह के बँधे लगवाते हैं
हिज़ड़े, नपुँसक आदि बनाते हैं
ठीक ठाक लड़के या लड़कियों को।
सोच के देखो
कहीं भी ,
किसी के यहाँ भी
बच्चे पैदा करवाना
या लोगों को हिज़ड़े बनाना
ये काम राजनितिक पार्टियों के हैं क्या?
वो आम लोगों की ज़िंदगियों में
कहाँ कहाँ घुसे हुए हैं?
या कहो कहाँ नहीं घुसे हुए हैं?
जन्म करवाने से लेकर, मौत तक?
जन्म से पहले conceive करवाने से लेकर
दाह सँस्कार के तौर तरीकों तक।
बच क्या गया?
अज़ीब सँसार में हैं ना हम?
अब हर चीज़ एक कोड है
और अलग अलग पार्टी के हिसाब से
उसके अलग अलग हिसाब किताब?
इतना कुछ ये पार्टियाँ कैसे कर लेती हैं?
और
आम आदमी को
इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है?
राजनितिक पार्टियों के पास
दुनियाँ जहाँ के दिमाग हैं
जो या तो इनके लिए काम करते हैं
या इनके साथ मिलकर काम करते हैं
वो दिमाग़ इंटेलिजेंस विभाग से लेकर
डिफ़ेंस और सिविल ऑफिसर्स से लेकर
यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट में बैठे
प्रोफेसर, डॉक्टर और वैज्ञानिक सब हैं
और हाँ
कहीं की भी न्याय व्यवस्था भी
उनकी जानकारी के साथ
या बिना जानकारी के भी।
ओह हाँ!
मीडिया भी
मीडिया कल्चर के बिना तो
कुछ भी सोचा ही कहाँ जा सकता है?
जैसा मीडिया कल्चर, वैसा सा ही असर?
जैसी सँगत, वैसी रँगत?
ये सब मिलकर
कहीं का भी सिस्टम बनाते हैं।
किसी भी इंसान का भी
उसके घर का
उसके आसपास का
समाज, मौहल्ले
गाँव, शहर राज्य देश का भी।
आम आदमी के
इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है?
कोशिश करते हैं
शब्दों से शुरु कर
नंबरों
और तरह तरह के designs
और सिस्टम तक जाने
और उसे समझने की।
Thursday, September 3, 2026
Designer World Art and Craft
Media Culture and Difference Between Life and Death?
Or healthy living and long life?
क्या हो?
जब सामने वाले को मालूम ना हो
जो कुछ वो
किसी और के साथ कर रहे हैं
उसका बिगड़ा रुप
या कहीं ज्यादा बढ़ा चढ़ा
कहीं न कहीं
उनके अपने साथ
या
उनकी अपनी बहन, बेटियों
बेटों, माँ, बाप, पति, बीवी
या
घर के किसी और
सदस्य के साथ हो रहा है?
कौन कर रहा है?
या कर रहे हैं?
वो भी गुप्त तरीके से?
कौन खेलता है ये गुप्त गुप्त?
ज़्यादातर
भले लोग तो शायद खेलते नहीं?
जहाँ कहीं आपसे
जिस किसी द्वारा कुछ भी
गुप्त कुछ करने को कहा जाए
तो थोड़ा दूर हो जाएँ
थोड़ा वक़्त लें और सोचें?
गुप्त क्यों?
सीधे सीधे क्यों नहीं?
राजनितिक पार्टियाँ ऐसा ज़्यादातर
सामान्तर घड़ाईयाँ घड़ने के लिए करती हैं
ये सामान्तर घड़ाईयाँ ही
मानव को रोबोट की तरह प्रयोग
या दुरुपयोग करने का काम करती हैं
गुप्त रुप से रिमोट कंट्रोल हैं।
इन गुप्त से डिज़ाइनों का
आपकी
या आपके अपनों की IDs से
कैसा नाता है?
या किस तरह का असर?
करते हैं कोशिश जानने की
इमारतों को
घरों की और उनके आसपास के
स्कूलों, अस्पतालों, ऑफिसों के
डिज़ाइनों को
जो उतार दिए गए हैं
खिड़की, दरवाजों
बैडरूम, बाथरूमों
अंदर बाहर के गेटों
यहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ।
जानने की कोशिश करते हैं
वाहनों को, दुकानों को?
गलियों को, उनपे लगे खमभों को
और तरह तरह के डिज़ाइनों को
या शायद घर के कोने कोने को
इस हिस्से और उस हिस्से को
स्टोर, रसोई, बैडरूम, बाथरुम
आँगन, ड्राईंग रूम वैगरह को?
क्या कुछ लिखा है?
या छपा है?
किस चीज़ के बने हैं वो?
कब लिखा या छपा वो सब?
किसने लिखा या छापा?
या कहाँ से आया या लाया गया?
और कौन कौन रहता है वहाँ?
उस या उन रहने वालों पर
कैसा असर है उन सबका?
जो जितना पास उतना ही
असर अच्छा या बुरा?
अच्छे को कैसे बढ़ा सकते हैं?
और बुरे को कैसे कम सकते हैं?
इतना सब मुझे कैसे मालूम?
मुझे सिर्फ़ लिखना है
जो कुछ पढ़ा, देखा या समझा
आगे ऐसा है या नहीं
ये तो आपको तय करना है।
Designer World Art and Craft
ये अगली किताब की शुरुवात। मोटा सा आईडिया, यहाँ वहाँ पहले पोस्ट में आ चुका। ये उन्हीं यहाँ वहाँ की पोस्ट को उठाकर किताब में पिरोने की कोशिश है।
मगर इससे पहले?
सिस्टम, कोड, निहित स्वार्थ और राजनितिक हितों के टकराव लाइन में लगी है।
System, Code and Conflict of Interests Politics
सिस्टम, कोड, निहित स्वार्थ और राजनितिक हितों के टकराव
सिस्टम, कोड, निहित स्वार्थ और राजनितिक हितों के टकराव
System, Code and Conflict of Interests Politics
Campus Crime Series के बाद ये अगली सीरीज शुरु। मगर, यहाँ मैं केसों की फाइल्स नहीं उठाए खड़ी।
आम आदमी की ज़िंदगी और उसकी ज़िंदगी के आसपास जो कुछ होता है या जैसे जैसे होता है, उन कोड, सिस्टम या निहित स्वार्थ और हितों के टकराव की बातें हैं। और उनके आसपास की ज़िंदगी पर असर की।
राजनीती के फूट डालो और राज करो के खेल को थोड़ा और खोलना है। जो कुछ इस ब्लॉग से हट चुका, वो ज़्यादातर पब्लिश होने वाली फाइल्स के हवाले हो चुका।
