दुनिया के बड़े बड़े झगड़े
ज्यादातर,
अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं?
Conflict of Interest Politics क्या है?
इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?
इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?
इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?
अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?
क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ
Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?
इससे आगे कुछ भी नहीं?
Child Production Factory जरुरी नहीं है
मगर,
बच्चे तो जरुरी हैं?
और शादी भी?
किसी भी इंसान के लिए ?
किसी भी घर के लिए ?
समाज के लिए?
इस पर कोई प्रश्नचिन्ह हो सकता है क्या?
सारा खेल यही है?
सारा खेल डाटा में है?
डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने
हथियार बना लिया है
कैसा हथियार भला?
किसकी शादी होगी?
और किसकी नहीं?
कब, किससे और कैसे?
कहाँ?
किस तारीख, महीना या साल?
और करवाने वाले कौन होंगे?
या किसकी नहीं होगी?
ये जहाँ कहीं आप हैं
वहाँ का सिस्टम निर्धारित करता है।
किसके बच्चे पैदा होंगे?
और किसके नहीं?
कब, कहाँ और कैसे?
और कितने?
किस घर या हॉस्पिटल?
या कहीं और?
पैदा करवाने वाले कौन होंगे?
किस तारीख, महीना या साल?
कितने बजे?
AM?
Before Noon?
Noon?
After Noon?
Evening?
After Evening?
Night?
Late Night?
Early Night?
At Dawn?
कहाँ बच्चे पढ़ेंगे और कहाँ नहीं?
कहाँ तक पढ़ेंगे?
और कब वो उन्हें स्कूल से ही
या कॉलेज से चलता कर देंगे?
किसकी नौकरी लगेगी और किसकी नहीं?
कब लगेगी?
और कब वो उन्हें वहाँ से चलता कर देंगे?
ऐसे ही और भी
कितने ही जोड़ तोड़?
आपके और आपके सिस्टम के?
डाटा के किए धरे?
इसका मतलब?
DATA ही दाता है?
इसमें छुपे हैं राज
हर जीव
और निर्जीव की कहानी के?
उसके जन्म के
और मौत के
और
इन दोनों के बीच
जो कुछ होता है
उस सबके?
मतलब
आज इंसान की हर समस्या का समाधान है
मगर
Conflict of Interest Politics को
वो पसंद नहीं?
और सबसे बड़ी बात
वो समस्याएँ खड़ी करने वाले कौन हैं?
वो भी डाटा में ही छुपा है।
आपके अपने सिस्टम में
आपके घर के सिस्टम में
और जहाँ कहीं आप रहते हैं
वहाँ के सिस्टम में।
ज़्यादातर
जहाँ आप रहते हैं
वहाँ के सिस्टम में।
तभी हम बोलते हैं
यहाँ का तो सिस्टम ही खराब है
या
यहाँ का सिस्टम बड़ा सही है।
तो कोशिश करते हैं
कुछ एक सिस्टम को पढ़ने की
समझने की।