दुनियाँ के किसी भी सिस्टम से शरीर का सिस्टम
आज भी दुनियाँ के सबसे बेहतरीन सिस्टम में से एक है
या कहना चाहिए की दुनियाँ का सबसे बेहतरीन सिस्टम है
इसे पढ़कर कोई भी सिस्टम बेहतर बनाया जा सकता है
वो फिर चाहे शिक्षा का हो या स्वास्थ्य का
घर का हो, आसपास का या मौहल्ले का
राज्य का हो या देश का
या फिर
देशो के आपसी रिश्तों का या वाद विवाद का
वो फिर चाहे घर के अंदर का हो
या उसकी सीमाओं का
मौहल्ले का हो
या उसके आसपास या सीमाओं का
ऐसे ही राज्यों का हो या देशों का
लेन देन का हो
या सीमाओं की रक्षा का
अंदर का सही
तो बाहर का भी सही हो कोई जरुरी नहीं
मगर,
अंदर का सही,
तो बाहर के हमलों से रक्षा बेहतर होती है
अंदर की रक्षा मजबूत हो,
तो बाहर के हमले भी कम होते हैं
इसलिए
किसी भी हमलावर का पहला काम
अंदरुनी रक्षा को तोड़ना होता है
जैसे फूट डालो और राज करो
कमजोर रक्षा जल्दी ढह जाती है
मगर,
मजबूत रक्षा में कई किले होते हैं
किले जितने मज़बूत,
उतना ही वो सिस्टम मज़बूत
वो फिर आपका शरीर हो,
घर हो,
रिश्ता या अर्थव्यवस्था
जहाँ कहीं की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होती है
अक्सर, उतना ही मज़बूत वो सिस्टम होता है।
इसलिए दुनिया के बड़े बड़े झगड़े ज्यादातर
अर्थव्यवस्था के ही इर्द गिर्द घुमते हैं
किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था में
ज़्यादातर सँसाधन प्रयोग में होते हैं
सबको उनके हिस्से का
उनकी मेहनत
और काबिलियत के अनुसार मिलता है।
और कमजोर अर्थव्यवस्था में?
ज़्यादातर सँसाधन चंद लोगों के कब्जे में होते हैं
ज़्यादातर संसाधनों का दुरुपयोग होता है
या शायद,
उन्हें पता ही नहीं होता की सदुपयोग कैसे करना है?
जैसे
शरीर के अगर सभी हिस्से सही से काम नहीं करेंगे
तो कहीं न कहीं गड़बड़ जरुर होगी
ऐसे ही, किसी भी घर या समाज का है
और ये सब अक्सर
Conflict of Interest की राजनीती के कारण होता है।
Conflict of Interest Politics क्या है?
इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?
इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?
इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?
अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?
क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ
Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?
इससे आगे कुछ भी नहीं?
अगर इसे ही सच मान लें
तो
सविँधान लड़कियों को दादालाही ज़मीन में
उनका हिस्सा कैसे देता है?
उन ज़मीनो या प्रॉपर्टियों के नाम के
वहीँ बच्चे पैदा करवाता है क्या?
कौन हैं ये दोगले तर्क वितर्क वाले इंसान?
शिक्षा के सँस्थान?
या धब्बा शिक्षा के नाम पर?
जो समाज की भलाई के नाम पर
गरीबों के पैसे और ज़मीने खाते हैं?
या लड़कियों की ज़मीनो पर
ज़बरदस्ती और धोखाधड़ी से कब्ज़े किए होते हैं।
बस ऐसा मौका हासिल हो
ना हो तो षड्यंत्र करके ही सही बना लें?