See ya :)
Rhythms of Life
Happy go Lucky kinda stuff. Lilbit curious, lilbit adventurous, lilbit rebel, nature lover. Writing is drug. Minute observer, believe in instinct. Sometimes feel like to read and travel. Profession revolves around academics, science communication, media culture and education technology. Love my people and my pets and love to be surrounded by them.
Saturday, January 10, 2026
Thursday, December 25, 2025
Merry Christmas and A Happy New Year!
The time, when you look towards the year ahead. And reflects on the year going back. How was the year?
Here, it was not that bad. We expect different things under different situations and circumstances. It's urgency that matters. Everything else can be done later.
When things were out of control in the department, when I had no idea what was happening in my labs and classes and why, heard somewhere somewhat like, "take care of those ganvaarpanthas whom you call your own people, they need you. These, who came here for education, but are under the control of criminals doing another kind of crimes, and will be taken care by them."
After coming home, I realized that even more with time. I chose two most vulnerable people and both are doing comparatively better than earlier.
Merry XMAS :) and A Happy New Year!
Monday, December 22, 2025
चाँद निकला है, की निकला है सूरज?
चाँद निकला है, की निकला है सूरज?
इतनी धुँध में, चलो कुछ तो निकला है।
अरे! ये लिखते-लिखते ही कहाँ गया?
कह रहा है शायद,
लुकते-छुपते आया हूँ
और एक तुम हो,
जो लग जाते हो शब्दों में पिरोने।
और जैसे कोई काम-धाम ही नहीं तुम्हें?
Thursday, December 4, 2025
Content Development
Content development, this post is from 2019.
And now? Warfare or Cellfare, Pros and Cons?
Or probably, all blogs, case studies, social tales, personal or professional front ups and downs, views and counterviews, family, surrounding or society, governance, system, diseases, birth, death or life in between them, code-decode, everything belongs to this highly interdisciplinary field and culminates in "Human Robotics and Social Engineering?" Or Mind Matter Matrix Robotics and Social Engineering?
Changed lots since this post. Check that post
Presentation is all that makes a difference. The difference between who we are. What we represent ourselves. What our well wishers, family or friends wanna represent us. And what people with some ulterior motives wanna present. Be a receptive of all appreciation, criticism and commentary to evolve with time and circumstances.
Sunday, November 23, 2025
ज़िंदगी ये कोई जादु ही तो है
कैसे-कैसे लक्ष्यघरोँ से बच निकले हो
बच निकले हो, कैसे-कैसे एक्सीडेंट्स से
कैसे-कैसे रसायनिक हमलों से बच निकले हो
बच निकले हो, कैसे-कैसे जैविक युद्धों से
ज़िंदगी ये कोई जादु ही तो है शायद
कहीं मानसपटल पे संघर्ष,
तो कहीं छलावों के पार निकलना
ऐसे-ऐसे, कैसे-कैसे
अवरोधों के उस पार निकलना।
Life is A Miracle!
Picture taken from internet
Sunday, August 3, 2025
Friday, May 16, 2025
गाने ज़िंदगी का ज्ञान भी देते हैं?
गाने ज़िंदगी का ज्ञान भी देते हैं? एक ही गाना कितना कुछ कह जाता है? कई बार तो, दशकों को एक छोटे-से गाने में पिरो जाता है? एक दशक पहले या दो दशक पहले या उससे भी पहले, वो आपका पसंदीदा गाना हुआ करता था? और आज भी है? गज़ब है? जैसे कुछ, बदलता ही नहीं? वही ढाक के तीन पात-सा? इस दौरान, वैसे से ही शब्द लिए या वैसा-सा ही ज्ञान लिए, कितने ही नए गाने आ जाते हैं? नए वक़्त से कदम-ताल मिलाते से जैसे? मगर, फिर भी आपकी पसंद आज भी वहीँ ठहरी-सी है जैसे?
बुल्ला की जाना मैं कौन -- रब्बी शेरगिल
Tuesday, September 10, 2024
Friday, July 26, 2024
Internet of Things (IOT), Grey Colour NEO and Ghost Robotics
Internet of Things (IOT) क्या है?
कैसे काम करता है?
क्या-क्या काम करता है?
क्या ये घर की लाइट और इससे जुड़े ज्यादातर घर, ऑफिस या फैक्टरियों के इंस्ट्रूमेंटस या व्हीकल्स को इंटरनेट की मदद से दुनियाँ के किसी भी कोने में बैठकर कंट्रोल कर सकता है? या करता है? अगर हाँ? तो किस हद तक?
आपके घर का AC सर्विस के बाद, अगर ठंडा करने की बजाय गर्म करने लगे, तो क्या गड़बड़ हो सकती है?
ठीक करवाने के बाद, अगर और ज्यादा गर्मी करने लगे तो?
यही छोटी-मोटी कोई हेरफेर?
ऐसे ही, अगर लाइट ठीक करवाने पे या थोड़े बहुत कोई नए स्विच लगवाने पे, आपका इलेक्ट्रीशियन अगर कोई अनचाहा स्विच भी बदल जाए? जैसे मेन स्विच? पहले पुराने जमाने का कोई सफेद सिंगल एंकर कंपनी का शायद, और बाद में कोई डबल grey colour का NEO लगा जाए? कोई खास फर्क नहीं पड़ता शायद? ये कंपनी हो या वो? बिजली वाले को शायद लगा होगा, लगे हाथों ये भी कर देना चाहिए? आपको भी कोई खास फर्क नहीं लगा। हाँ। किसी की ट्विटर वाल पे कुछ देख-पढ़कर, कोई शक जरुर हुआ। उसके कुछ वक़्त बाद, आपने वो स्विच बदलवा दिया। सब ठीक? लेकिन कुछ तारों के हेरफेर भी थे शायद, वो तो नहीं करवाए। अब इलेक्ट्रिसिटी का ABC नहीं पता, तो वो भी क्या फर्क पड़ता है? क्या फालतू के चक्करों में पड़ना?
पीछे कूलर की जलने की काफी प्रॉब्लम आ रही थी। पर वो शायद सिर्फ यहाँ नहीं थी। लाइट फलेक्टुअट होना, बार-बार आना या जाना भी एक वजह हो सकता है। जो गाँवों में खासकर आम होता है। शिव इलेक्ट्रीशियन, बॉस वाटर पम्प, उसपे सॉफ्ट लाइन कूलर का भी कोई कनैक्शन हो सकता है?
इस सब में Internet of Things (IOT) का क्या लेना-देना? हो सकता है क्या? पता नहीं।
चलो छोड़ो, आओ थोड़ा IOT को समझने से पहले, एक रोबॉट से मिलते हैं।
Ghost Robotics कम्पनी का नाम है।
जिसके पास कई तरह के रौचक रोबॉट हैं।
जो सीधे सपाट रोड पे ही नहीं बल्की पानी और बर्फ पे भी मस्त चलते हैं।
Quadruped Unmanned Ground Vehicle (Q-UGV)
इसका नया अवतार NEO है।
ये मैं एक ब्लॉग पढ़ती हूँ, पिछले कई सालों से, वहाँ से पढ़ने को मिला। 2014 में जब मैंने H #16, Type-3 की शिकायत की थी यहाँ-वहाँ, उसके बाद खासतौर पे पढ़ना शुरू किया था, ऐसे-ऐसे विषयों के बारे में।
“NEO can enter a potentially dangerous environment to provide video and audio feedback to the officers before entry and allow them to communicate with those in that environment,” Huffman said, according to the transcript. “NEO carries an onboard computer and antenna array that will allow officers the ability to create a ‘denial-of-service’ (DoS) event to disable ‘Internet of Things’ devices that could potentially cause harm while entry is made.”
Bruce Schneier, Public Interest Technologist, Harvard Kennedy School
जो कुछ ऊप्पर लिखा है, उनका आपस में कोई सम्बन्ध हो सकता है? ये सब आप सोचो। जानने की कोशिश करते हैं आगे, की इंसान रुपी मशीन और इंसान द्वारा बनाई गई मशीनों में कितना फर्क है? रोबॉटिक्स इंसान का और इंसान रोबॉट्स का अवतार हो सकता है क्या? या ऐसा तो दुनियाँ भर में हो रहा है। ये सामान्तर घढ़ाईयोँ में एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं क्या? या ये भी बहुत पहले से हो रहा है?
जैसे एक NEO, Ghost Robotics कंपनी का, तो दूसरा डिज़ाइन, ये घर में बिजली वाला मेन स्विच बदलने वाला? और भी कितने ही ऐसे-ऐसे सामान्तर डिज़ाइन या घढ़ाईयाँ यहाँ-वहाँ, लोगों की असली ज़िंदगियों में। इनमें से किसी का एक दूसरे से कोई नाता नहीं। सोशल स्तर भी बहुत ही असामान्य। एक तरफ रोबॉट्स बनाने वाली कम्पनियाँ और अपने-अपने फील्ड के बेहतर एक्सपर्ट्स, तो दूसरी तरफ? तिनका तक ईधर से उधर होने पर, भड़कने वाले अंजान-अज्ञान लोग। ज्यादातर कम पढ़े-लिखे और मिडिल लोअर या गरीबी के आसपास लोग। अपनी अलग ही दुनियाँ में, जिन्हें कैसे भी और किसी भी नाम पे भड़का दो। कितना आसान है ना, ऐसे लोगों को रोबॉट बनाना? फिर आधी-अधूरी जानकारी तो, अच्छे-खासे पढ़े-लिखों को बना देती है। और यही गैप, इंसान द्वारा इंसान के शोषण के रुप में, जहाँ भर में हो रहा है, राजनीतिक पार्टियों और बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा।
Thursday, July 25, 2024
Jammers, Radio Control (RC), Frequency Controls and Remote (IOT)
दूसरी भाषा में, दूसरे शब्दों में, घुमाऊ-फिराऊ, या फिर सीधे-सीधे भी? उसपे फिट भी हो, आप पर या आपके आसपास पर? आपके हालात पर, उसके कारणों या निवारणों पर। कभी-कभी हकीकत भी हो सकती है। और कभी-कभी, सिर्फ हमें ऐसा लग सकता है या समझ आ सकता है। वो समाधान भी हो सकते हैं। यूँ की यूँ, हकीकत भी या बढ़ा-चढ़ा रुप भी। या उसे किसी और तरफ घुमाना भी। और भी बहुत-कुछ कहा और किया जा सकता है। बातों ही बातों में। आमने-सामने भी और रिमोट कंट्रोल से भी।
जैसे एक रौचक सी पोस्ट रोबोट डॉग इंटरनेट जैमर
https://www.schneier.com/blog/archives/2024/07/robot-dog-internet-jammer.html
आम आदमी को समझाने के लिए कोड की बात करें तो? कुत्ते (रोबॉट) ने, इंटरनेट को बंद किया या बैन किया या जैम किया। कुत्ते को बच्चा चाहिए और वो इंटरनेट से पैदा नहीं हो सकता। अब कुत्ता यहाँ रोबोट है। मशीन है। या फौजी है। क्यूँकि, युद्ध के फौजी भी मशीन ही होते हैं।
इसे शायद यूँ भी समझ सकते हैं
1. R O B O T
2. D O G
3. I N- T E R N -E T
4. J A M M E R
हालाँकि, कोड के हिसाब से तो कितनी ही तरह से लिखा जा सकता है और कितने ही मतलब हो सकते हैं। यहाँ सिर्फ आम आदमी की समझ के लिए है। कोई नाम हो सकता है, जगह का या स्थान का। कोई ग्रेडिंग हो सकती है। जैसे ABCD और कोई Block करना हो सकता है। जैसे R या M
इन सबके लिए आम आदमी को कहीं भी धकेला जा सकता है। खदेड़ा जा सकता है। हॉस्पिटल पहुँचाया जा सकता है। या दुनियाँ से ही उठाया भी जा सकता है। जैसे OXYGEN ख़त्म हो गई। और किसी R वाले या वालों को किसी खास तारीख, खास समय पर, खास जगह पहुँचाकर, खास तरीके से उठा देना। इनमें से ये खास तरीकों से इतना कुछ आम-आदमी की जानकारी के बिना होता है। कौन करवाता है, अहम है? या कहना चाहिए करवाते हैं। कैसे? उससे भी ज्यादा अहम है। इसे मानव रोबॉट बनाना बोलते हैं।
जैसे?





