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Current Position Media Culture Lab  ( June 2021 - Continue)    Independent  Research, Writing,  Communication,  and  Experiential and Experi...

Saturday, October 24, 2026

Visual Appeal Or Visual Clutter?

 Visual Appeal Or Visual Clutter?

https://visualappealorvisualclutter.blogspot.com/


 मेरा नया ब्लॉग 

आपको यहाँ वो सब मिलेगा जो आँखों को भाता है और दिमाग को शुकुन देता है। आप किसी कबाड़घर या कुरड़ी पर बैठकर भी ऐसा अहसास कर सकते हैं। अब अहसास कर सकते हैं तो? बना भी सकते हैं?  


वैसे कबाड़ की घर में जगह ही क्यों?

कबाड़ 

आँखों को शुकुन नहीं देता 

बल्की चुभता है 

जो चुभता है

वो तनाव है। 


जितना तनाव है

उतना ही नुकसान

तनाव दिखता है

शरीर पर, बीमारी सा

और जेब पर दिमग सा।


दिमग खाता है

सिर्फ़ लकड़ी को ही नहीं 

बल्की 

उसके आसपास रहने वालों को भी। 


आपकी सूरत 

आपकी जेब 

आपकी सेहत 

आपकी खुशियाँ 

ज़्यादातर

आपके आसपास की 

सुन्तरता और सद्धभाव  

जितनी सी ही होती हैं। 


ख़ासकर अगर आपको 

आसपास के जहर के खिलाफ  

अपने दिमाग या घर की 

किल्ले बंदी नहीं आती तो। 


किसी भी परिस्तिथि में 

सबसे बड़ा किल्ला 

आपका अपना दिमाग़ है 

उसके बाद आपका घर 

उसके बाद आसपास। 

इसीलिए 

एक अच्छी ज़िंदगी के लिए 

एक अच्छा माहौल और मौहल्ला 

बहुत मायने रखता है।     

कबाड़ और किम्मती में फ़र्क

अपने घर से कबाड़ निकालना है 

किसी और घर का कबाड़ 

अपने घर नहीं इकठ्ठा करना 

चाहे वो अपने पुराने घर से ही क्यों ना हो। 


कबाड़ और किम्मती में फ़र्क होता है 

कबाड़ को किम्मती बनाया जा सकता है 

मगर 

कितना और वक़्त या पैसा लगाकर?


ऐसा क्या ख़ास है उस कबाड़ में 

जो इतना कुछ उस पर लगाया जाय?

और इतना कुछ लगाकर भी 

क्या दे रहा है वो आपको?

बदले में 

कहीं आपके आदमी तक तो नहीं खा रहा?  


या बचा रहा है उन्हें?

या बच्चों और युवाओँ तक को   

घर से ही बेघर करने की कोशिशें?

या ख़त्म करने तक के इरादे?


सबसे बड़ी बात 

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा 

बड़ों के साथ हो चुका है 

उसी को 

आगे फिर से दोहराने की  कोशिशें ?

हो सके तो बचो  

ऐसे ऐसे शिकारों से। 

दिवाली सफ़ाई अभियान

साथ का असर कुछ तो खास होता है?

शाँत इंसान के पास 

आप शाँत रहना सिखते हैं 

और भड़ाम भड़ाम के पास?


शाँत इंसान बुरे वक़्त को भी 

शाँति से,

आराम से निकाल देता है 

मगर 

भड़ाम भड़ाम माहौल? 

राई को भी पहाड़ बना देता है

ना हुई बिमारियाँ लगा देता है 

हल्की फूलकी, आम सी बिमारियों को भी 

जान लेने  वाली बिमारियों में बदल देता है। 


वक़्त जितना बुरा हो 

उतना ही बेहतर होता है 

खुद को निखारना 

खुद पर थोड़ा और ज्यादा वक़्त लगाना 

अपने घर 

और आसपास पर वक़्त लगाना। 


किसी भी ज़हर से भरे आसपास में 

ज़िंदगी आसान नहीं होती 

मगर जब तक 

आप ऐसे माहौल से ना निकल पाएँ 

या अपने आसपास को ना निकाल पाएँ 

तब तक जरुरी है 

खरपतवार से थोड़ा दूरी 

और अपने घर,

यहाँ वहाँ से पहुँचने वाली 

खरपतवार की सही जानकारी। 


क्यूँकि 

अगर जानकारी ही सही ना होगी

तो?

एक दूसरे को ही 

आपस में काटते मिलेँगे।   

चलो 

इस दिवाली सफ़ाई अभियान में 

ज़हर से भरे कुड़े कचरे 

या यहाँ वहाँ गुप्त रुप से बिमारियाँ फैलते 

तत्वोँ के बारे में  जानें। 


कुछ ऐसी ऐसी जानकारी देने वाले के 

ख़िलाफ़ ही भड़काते मिलेँगे 

मान के चलो वो खुद कहीं न कहीं 

ऐसे ही तत्व हैं। 

जाने या अनजाने। 

Thursday, October 22, 2026

I DO NOT SUPPORT ANY KIND OF VIOLENCE

I DO NOT SUPPORT ANY KIND OF VIOLENCE

I do not support using and abusing people for creating such kind of violence against anyone, not even criminals. Then to create Political Theatrics just for the sake of some political gains against any civil person, via social simulations is bigger crime.

Protests and Violence are Entirely Different Things and Issues.

In a world where humans are already caged to such an extent that they remain nothing more than human robots, what's the will of human? How will you judge such incidences?

Media Matter Matters

हम क्या देखते हैं?

क्या सुनते हैं? 

उसके बारे में क्या जानते हैं?

सच्चा या झुठा?  

फिर क्या सोचते हैं?  

जैसा सोचते हैं 

वैसा ही क्यों सोचते हैं?

क्या और भी वैसा ही सोचते हैं 

ख़ासकर जहाँ आप हैं, वहाँ?  


हम जो देखते हैं 

या जो सुनते हैं 

वो उस जगह पर है 

दुनियाँ में वैसा कहीं और नहीं है 

और ना ही हो सकता है 

जैसा हमने देखा 

जैसा हमें पता है 

वैसे जरुरी नहीं 

हर किसी ने देखा या समझा?

यही Media Matrix है


समझ का फ़र्क?

या जानकारी का फ़र्क?

या जानकारी से आगे 

Processing का फ़र्क?

या उससे भी आगे 

जानकारी जरुरी है 

मगर सही जानकारी?    


आप 

जिस Media Matrix से घिरे हैं?

उसी से क्यों घिरे हैं?

आप जहाँ हैं, वहीँ क्यों हैं?  

वहाँ आपको किसने और कैसे भेजा?

किस काम के लिए भेझा?

अपने काम के लिए?

या आपके काम के लिए?


आगे आते हैं 

Media Threatrix पर     

और Media Matrix?

ख़ास Media जानकारों के लिए 

या जो रिसर्च कर रहे हैं 

How Media Matter Matters?  

And How Systems Try So Hard to Control -

Each and Everything in Any Media Culture? 

Monday, October 19, 2026

कुर्सियों के Chess Board पर आप, आपका कोड और उसके हेरफेर?

आपकी कुछ ID स्थाई हैं  

और कुछ?

वक़्त और जगह के अनुसार 

बदलती रहती हैं। 


आप किस जगह हैं 

वो आपकी सिर्फ़ 

आज की ज़िंदगी के बारे में नहीं बता रहा  

बल्की 

कहीं न कहीं आने वाले वक़्त की 

दिशा और दशा भी तय करता है। 


ख़ासकर तब 

जब आपको किसी भी जगह की

या उसके Media Matrix  

या Culture के बारे में 

कुछ भी ना पता हो 

या ये ना पता हो 

उसके बुरे प्रभावों से कैसे बचना है। 


तो आपकी कौन सी और कैसी पहचान 

किसी और को दी जा रही है 

या कैसी आपको थमाई जा रही है 

ये कैसे पता होगा ?

सबसे बड़ी बात 

क्या पहचान को ऐसे बदलना संभव है?


शायद हाँ?

शायद ना?

हाँ, 

उससे खेला तो जा सकता है 

कितनी ही तरह से?     

वो भी आपकी जानकारी के बिना?

कैसे?


अरे !

आपने नाम भी बदल लिया?   

जैसे 

Riti, Ritu, Preeti, Priti

Sun Riya, P Riya, Su P Riya

Jaivir, Jaiveer, Jaibir, 

Yesvir, Yejvir, Jasbir, Jasvir

Jagvir, Jagbir, 

सिर्फ़ एक अकसर का हेरफेर? 

ऐसे ही कितने ही शब्द?


ऐसे तो कुछ नहीं बदलता?

और सोचने लगो तो?

सबकुछ?

ऐसे ही 

अगर एक एक करके 

कोई आपकी सब IDs से ही खेल जाए तो?


या आपको यही ना पता हो 

आपके पास कुछ ऐसी IDs हैं 

जो आपकी ज़िंदगी का 

कायापलट कर सकती हैं? 

जिनको आप भूल चुके हैं 

ढूँढों कहाँ हैं वो?


किससे शुरु करें?

अपने से?

अपने ही घर से?

या आसपास से?

आपसे?

या 

जिस किसी से आप चाहें?   

कुर्सियों के Chess Board पर आप एक गोटी भर?

आपकी पहचान 

कुर्सियों वाले Chess Board पर

क्या है?

महज़ एक गोटी?

जिसे वो जैसे चाहें,

 वैसे चला सकते हैं?


जब चाहें, जहाँ चाहें 

वहाँ 

आपका डबल रख सकते हैं?

जहाँ चाहें वहाँ 

आपका twin रख सकते हैं?

जब चाहें, जहाँ चाहें 

वहाँ Odd Even बना सकते हैं? 

और Chess Board के 

किसी भी खाने में कुदा सकते हैं?

Migration?   


फिर?

जिसे चाहें उसे 

आपकी मेहनत थमा सकते हैं?

आपका कमाया उसपर लूटा सकते हैं? 

हैं कौन आप?

महज़ एक गोटी?  

कुर्सियों वाले Chess Board पर? 


यही नहीं 

जब चाहे तब आपको 

इस सँसार से ही खिसका सकते हैं? 


उससे भी अहम 

वक़्त उनका होगा? 

जगह उनकी होगी? 

बीमारी उनकी पसंद की होगी? 

डॉक्टर, नर्स, हॉस्पिटल 

आपके आसपास लोग 

खास, खास किरदार 

सब उनके धरे होंगे? 


फिर आप कौन?

कुर्सियों वाले Chess Board पर 

महज़ एक गोटी?


आओ कुछ उदाहरण लेते हैं 

उसके बाद ठीक ऐसे ही 

आपको 

अपने आसपास का जानना है 

और बताना है 

कितना सच है, या महज़ बहम? 

या शायद आसपास पहुँच चुकी मैं 

इस Puzzle को उधेड़ते उधेड़ते? 

Chess Board और आपकी पहचान की गोटी?

सोचो 

एक तरफ़?

टीम 1 या A? 

दूसरी तरफ?

टीम 2 या B? 

ऐसे ही कितनी ही राजनितिक पार्टियाँ  

या टीमें?

और 

बीच में Chess Board?


उस Chess Board पर 

आप और हम?

ज़िंदा, जीते जागते इंसान?    

तो Chess Board कितना बड़ा हुआ? 

जितना बड़ा आपका समाज?

या आपकी Constituency?

किसी भी इलेक्शन की 

छोटी या बड़ी यूनिट?


छोटी यूनिट जैसे 

कोई एक क्लास?

बड़ी यूनिट?

प्राइमरी, मिडल, सैकंडरी

कॉलेज या यूनिवर्सिटी?

या किसी राज्य 

या देश की यूनिवर्सिटी?


वहाँ पर आपकी पहचान क्या है?

या क्या क्या हैं?

आपका ID?

नाम, क्लॉस, कोर्स, सब्जेक्ट्स 

उनमें नंबर्स 

और उनके मिलाकर कुल नंबर्स?

किसी भी वक़्त के अनुसार 

उनकी अहमियत?


वक़्त के अनुसार क्यों?

क्यूँकि 

जो एक वक़्त में खास अहमियत रखता है 

जरुरी नहीं 

वो 

किसी और वक़्त में ऐसी ही अहमियत रखता हो?

जैसे किसी जमाने में 

अगर फर्स्ट डिवीज़न अच्छी होती थी 

तो किसी और जमाने में?

शायद 90s में फाइट होती है?

ऐसा क्यों?

ये उस वक़्त के 

सिस्टम का हिसाब किताब बता रहे हैं। 


यही फाइट एक ही वक़्त में 

अलग अलग बोर्ड 

या यूनिवर्सिटी के सिस्टम में 

अलग अलग हो सकती है। 

जैसे आजकल 

कहीं 70s में ही चल रही है 

तो कहीं 100 के आसपास की होड़ मिलेगी। 

                         

ये डिग्रीयाँ ये तो बता सकती हैं 

हम किस तरह का काम करेंगे 

जैसे अध्यापक, डॉक्टर या कुछ और बनेंगे। 

क्या ये डिग्रीयाँ 

ये भी बता सकती हैं 

आपकी शादी कब होगी?

या कितनी होंगी? 

बच्चे कब होंगे?

या कितने होंगे?  

या जितने हैं 

उतने ही क्यों है? 

   

शायद हाँ?

और शायद ना?

क्या कभी आपने 

अपनी डिग्रीयों को इस नज़र से देखा?

या सोचा तक?

या ये कैसा बेतुका सा लॉजिक है?


ये Chess Board 

अभी पिछले कुछ सालों ने दिखाया है 

सच है या नहीं? 

ये आपको देखना बताना है 

खुद अपनी डिग्रीयों से 

और अपने आसपास की डिग्रीयों से 

अरे ! 

पिछली बार 

ऐसे से पहचान पत्र 

आपने कब देखे थे?


कौन सी अलमीरा में दबे पड़े हैं वो?

ढूंढों? और देखो 

जानो और पहचानो 

अपने खास पहचान पत्रों को। 

उनमें आपके होने वाले 

पति, पत्नी, BF, GF या BFF?  

या बच्चों तक का लिखा हुआ है क्या?

कैसे संभव है?


थोड़ा सा और पढ़ो 

उनपर किसके हस्ताक्षर हैं?

कैसी कैसी कुर्सियों के?

आपने कैसे कैसे पेपर दिए हैं?

वो पेपर किसी डिग्री के लिए थे?

या नौकरी के लिए दिए थे?

या?

सामाजिक सामान्तर घड़ाइयाँ होती कैसे हैं?

सामाजिक सामान्तर घड़ाइयाँ होती कैसे हैं?

उनके लिए क्या कुछ चाहिए होता है?

किसी बुरी सामाजिक सामान्तर घड़ाई के 

दुष्प्रभाव से 

खुद को 

या अपने आसपास को कैसे बचा सकते हैं?   

संभव है क्या?

अगर हाँ, तो कैसे?   


ये जंतर मंतर तंत्र कोई जादू नहीं है

विज्ञान है 

एक तरीका है 

या कहो ढेरों तरह के तरीक़े हैं 

जिन्हें समझकर ना सिर्फ़ 

कहीं और हुई ऐसी किसी 

सामाजिक सामान्तर घड़ाई के 

दुस्प्र्भाव से बचा जा सकता है 

बल्की, 

विरोधों के बावज़ूद 

अपनी तय दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। 


Campus Crime Series में 

ऐसे से ही कुछ 

नुख्से 

या तरीक़े छुपे हैं। 

उनमें ना सिर्फ़ ये बताया हुआ है 

सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ कैसे होती हैं 

जब सिस्टम को ये समझ आया 

वो उनके तरीक़े छाप चुकी है 

तो उन्होंने लिखने वाले को ही कैद कर दिया। 


जो अब तक पब्लिश नहीं हो पाया 

उसमें कहीं ज़्यादा बारीक़ी डिटेल हैं। 

और दुस्प्र्भावों से निपटने के तरीक़े भी। 


सबसे बड़ी बात 

वो किन्हीं पेपर्स या फाइल्स में नहीं है 

जिन्हे सिस्टम मिटा सके 

वो Live है 

जो चल रहा है 

आपकी ज़िंदगी में 

आपके आसपास के वातावरण में 

उनमें छुपे या 

छुपा दिए गए Ingredients में 

Media Culture Lab के जैसे। 

सिस्टम घड़ने वालों ने 

सारे सँसार को ही 

अपनी Media Culture Lab बनाया हुआ है। 

Sunday, October 18, 2026

Live Social Simulation, Delhi?

मैंने एक Review Series शुरु की है 

उसी के तहत पिछले कई दिन से पहला Review? 

Plants Tales: Andhere Ujaale?

ऐसा क्या है इस छोटी सी Case Study main?

और इसका भला दिल्ली के चल रहे विरोध से क्या लेना देना?

राजनीती या सिस्टम ऐसे ऐसे Social Simulations कैसे चलाता है?