दुनिया के बड़े बड़े झगड़े
ज्यादातर,
अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं
किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था में
ज़्यादातर सँसाधन प्रयोग में होते हैं
सबको उनके हिस्से का
उनकी मेहनत
और काबिलियत के अनुसार मिलता है।
और कमजोर अर्थव्यवस्था में?
ज़्यादातर सँसाधन चंद लोगों के कब्जे में होते हैं
ज़्यादातर संसाधनों का दुरुपयोग होता है
या शायद,
उन्हें पता ही नहीं होता,
सदुपयोग कैसे करना है?
जैसे
शरीर के अगर सभी हिस्से सही से काम नहीं करेंगे
तो कहीं न कहीं गड़बड़ जरुर होगी
ऐसे ही, किसी भी घर या समाज का है
और ये सब अक्सर
Conflict of Interest की राजनीती के कारण होता है।
Conflict of Interest Politics क्या है?
इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?
इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?
इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?
अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?
क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ
Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?
इससे आगे कुछ भी नहीं?
अगर इसे ही सच मान लें
तो
सविँधान लड़कियों को दादालाही ज़मीन में
उनका हिस्सा कैसे देता है?
उन ज़मीनो या प्रॉपर्टियों के नाम के
वहीँ बच्चे पैदा करवाता है क्या?
कौन हैं ये दोगले?
तर्क वितर्क वाले इंसान?
या कुतर्की?
अर्थ का अनर्थ करने वाले?
शिक्षा के सँस्थान?
या धब्बा शिक्षा के नाम पर?
जो समाज की भलाई के नाम पर
गरीबों के पैसे और ज़मीने खाते हैं?
या लड़कियों की ज़मीनो पर
ज़बरदस्ती
और धोखाधड़ी से कब्ज़े किए होते हैं।
बस ऐसा मौका हासिल हो
ना हो तो?
षड्यंत्र करके ही सही बना लें?
यहाँ Conflict of Interest Politics है
और सिस्टम भी
मगर कोड या कोढ़ क्या है?
कुछ एक और पोस्ट
और
शायद आप ही मुझे बताने लगें?
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