SYSTEM
सिस्टम की अनेकों टाइप हैं
जैसे
आपके मोबाइल का अपना सिस्टम है
उसके अंदर भी कई सिस्टम हो सकते हैं।
अलग अलग कंपनी के
अलग अलग मोबाइल हैं
उनके नए और पुराने version।
या पीढ़ियाँ (Generations)।
आपका शरीर खुद एक सिस्टम हैं
आपके शरीर के अंदर
कितनी ही तरह के सिस्टम हैं
ऐसे ही जैसे आपका घर
आपका आसपास या मौहल्ला
छोटा, बड़ा और बड़ा सिस्टम।
फिर थोड़े राजनितिक
सामाजिक
या व्यवहारिक सिस्टम भी हैं।
जो जगह, समाज, तबके
और
राजनितिक पार्टी के अनुसार बदलते हैं।
KARMA
या DHARMA जैसे?
ऊंच या नीच जैसे?
अमीर या गरीब जैसे?
बड़ा या छोटा जैसे?
एक सिस्टम जैसे चलता है
कहीं और
दूसरी तरह का सिस्टम भी
कुछ कुछ वैसे ही
या एकदम बिलकुल विपरित भी।
जैसे?
जुबान?
पहनावा?
खाना?
पानी?
हवा?
जमीन?
ईमारत?
घर?
ऑफिस?
दुकान?
सड़क?
वाहन?
शिक्षा?
स्वास्थ्य?
जन्म?
पढ़ाई?
नौकरी?
व्यवसाय?
कुँवारे?
शादी?
बच्चे?
बीमारी?
एक्सीडेंट?
ऑपरेशन?
ईलाज?
मौत?
पुनर्जन्म?
पुनर्जन्म?
सच में होता है क्या?
या ये भी कुछ कुछ
भगवानों जैसी सी माया हैं?
और
धर्मों अधर्मों जैसे से अखाड़े?
आदमी के दिमाग़ पर
कब्ज़े के औजार कैसे कैसे?
या घड़ दिए हैं हथियार?
कैसे कैसे?
पढ़े लिखे
और कढ़े लोगों ने?
Psychological Fights
इन सबमें
कहीं के भी
सिस्टम में
और?
राजनीती में
आपस में
बड़ा अजीबोग़रीब सा
रिश्ता है।
ईधर ये?
तो उधर वो?
यहाँ ये हुआ?
तो उधर वो?
मगर कैसे?
और
सारी दुनिया में
थोड़ा या ज्यादा
ये ऐसे ही है।
इन्हीं में छिपे हैं
अलग अलग तरह के
सिस्टम बनाने के तरीके
या हेरफ़ेर
और Conflict of Interest Politics भी।
इन्हें आगे कहीं जानेंगे।
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