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Saturday, June 27, 2026

राजनीती, धर्म, आस्था, विश्वास, रीति रिवाज़ और लोकलाज?

धर्म? शाला? अपमानजनक (Pejorative)? या धर्मशाला?

राजनीती, धर्म, आस्था, विश्वास, रीति-रिवाज़, लोकलाज आदि को बड़े ही शातिर तरीके से खेलती है।  आम आदमी इन्हें राजनीती के चाल चरित्र और चेहरों के अनुसार पढ़ ही नहीं पाता। पढ़ेगा भी कैसे? उसे यही खबर नहीं है की ये सब घड़ता कौन है? 

इंसान भगवान ने बनाया है?

या भगवान को ही इंसान ने घड़ा हुआ है?

रीती-रिवाज़ बनाता और फिर उनमें वक़्त के अनुसार बदलाव करता कौन है?

शिव 16 नंबरी ही क्यों?

और हनुमान चालीसा (40) क्यों?   

ऐसे ही हर भगवान या भगवानी की कोई न कोई पहचान या ख़ासियत मिलेगी। कभी जानने की कोशिश की उनकी वही पहचान क्यों है? और वो पहचान राजनीती के काम कैसे आती है? उनके मंदिर जहाँ पर हैं, वहीँ क्यों हैं? कहीं और क्यों नहीं? Geolocation Matters 

उनकी पूजा जिस दिन होती है, उसी दिन क्यों होती है? किसी और दिन क्यों नहीं? उनका पहनावा या खान पान जो है, वही क्यों है? कुछ और क्यों नहीं? Codes Matter and changes happen as per political parties needs. 

क्या हो अगर 

हनुमान हो जाए 16 नंबरी और शिव चालीसा (40) पढ़ी जाने लगे?

संतोषी हो जाए काली और काली शीतला माता?

सूरज को पानी दें स्याम को या रात को और चाँद को दिन में निहारें?

रेगिस्तान के देवता पूजे जाएँ मैदानों या पहाड़ों पर? 

और मैदानों या पहाड़ों के रेगिस्तान में?

लड़कियों को समझने लगें लड़का और लड़के को लड़की?


थोड़ा ज्यादा हो रहा है ना? कैसा हो, अगर आपको पता चले की राजनीती आपके अपने घर में, खुद आपसे या आपके अपनों से ऐसा कुछ ही करवा रही हो, मगर चोरी छुपे, आपको अँधेरे में रख?    

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