जैसा की पहले भी कई बार कहा
कोई भी चीज़
जो आप देख, सुन सकते हैं
महसूस कर सकते हैं
या समझ सकते हैं
एक कोड है ।
वो कोड एक पार्टी की नज़र में
कुछ हो सकता है
और
किसी और पार्टी की नज़र में कुछ और।
या
अलग अलग पार्टियों की नज़रों में
एक होते हुए भी
अलग अलग तरह से
प्रयोग या दुरुपयोग हो सकता है
अलग अलग वक़्त पर
उनकी अपनी जरुरत के अनुसार।
मान लो
8 नंबर पर वो बच्चे पैदा करवाते हैं
या ऐसा ही कुछ करते हैं
ये 8
अलग अलग पार्टी के अनुसार
अलग अलग नंबर के साथ मिल सकता है।
ऐसे ही
मान लो
9 नंबर पर
वो किसी की ऎसी तैसी करवाते हैं
या
अलग अलग तरह के बँधे लगवाते हैं
हिज़ड़े, नपुँसक आदि बनाते हैं
ठीक ठाक लड़के या लड़कियों को।
सोच के देखो
कहीं भी ,
किसी के यहाँ भी
बच्चे पैदा करवाना
या लोगों को हिज़ड़े बनाना
ये काम राजनितिक पार्टियों के हैं क्या?
वो आम लोगों की ज़िंदगियों में
कहाँ कहाँ घुसे हुए हैं?
या कहो कहाँ नहीं घुसे हुए हैं?
जन्म करवाने से लेकर, मौत तक?
जन्म से पहले conceive करवाने से लेकर
दाह सँस्कार के तौर तरीकों तक।
बच क्या गया?
अज़ीब सँसार में हैं ना हम?
अब हर जीज़ एक कोड है
और अलग अलग पार्टी के हिसाब से
उसके अलग अलग हिसाब किताब?
इतना कुछ ये पार्टियाँ कैसे कर लेती हैं?
और
आम आदमी को
इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है?
राजनितिक पार्टियों के पास
दुनियाँ जहाँ के दिमाग हैं
जो या तो इनके लिए काम करते हैं
या इनके साथ मिलकर काम करते हैं
वो दिमाग़ इंटेलिजेंस विभाग से लेकर
डिफ़ेंस और सिविल ऑफिसर्स से लेकर
यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट में बैठे
प्रोफेसर, डॉक्टर और वैज्ञानिक सब हैं
और हाँ
कहीं की भी न्याय व्यवस्था भी
उनकी जानकारी के साथ
या बिना जानकारी के भी।
ये सब मिलकर
कहीं का भी सिस्टम बनाते हैं।
किसी भी इंसान का भी
उसके घर का
उसके आसपास का
समाज, मौहल्ले
गाँव, शहर राज्य देश का भी।
आम आदमी के
इतना कुछ कैसे समझ आ सकता है?
कोशिश करते हैं
शब्दों से शुरु कर
नंबरों
और तरह तरह के designs
और सिस्टम तक जाने
और उसे समझने की।
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