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Monday, September 7, 2026

दिमाग़ी किल्ला

इंसान के दिमाग़ से ही शुरु करें?

बहुत चलता है ये 

सच में बहुत चलता है

दुनियाँ को कब्ज़ा रखा है इसने। 


हमारा दिमाग़ 

बड़े ही टेढ़े मेढ़े से 

डिज़ाइन वाला दिमाग़ 

खास तरह के चैम्बर में 

छुपा हुआ दिमाग 

कई तहों के अंदर 

बैठा ये दिमाग़ 


अपनी सुरक्षा के लिए 

कैसी कैसी चारदिवारियों 

और कैसे कैसे द्रव्यों की 

सेनाओं के सहारे 

चलाता है ये सिस्टम सारा?

जिसे हम शरीर कहते हैं?


सबसे ऊप्पर खोपड़ी पर 

बालों से ढका हुआ?

अलग अलग जगह 

अलग अलग 

मौसम के अनुसार 

बालों से ढका हुआ। 


बाल भी 

अलग अलग जगह के मौसम 

और वातावरण के अनुसार 

उन्हें झेलने के लिए  

अलग अलग रंग लिए? 

अलग अलग बनावट लिए?

अलग अलग तरह के 

डिज़ाइन जैसे?  

  

कोई छोटे 

तो कोई लम्बे?

कोई पैदाइशी भूरे? 

या काले? 

और 

इनके बीच भी 

कितने ही रंग?

सुनहरे?

ज्यादा भूरे?

कम भूरे?

बीच के?

ऐसे ही 

ज्यादा काले 

कम काले?

और इनके बीच के?


ऐसे ही सफ़ेद 

उम्र की रौशनी लिए? 

अनुभवों के गठ्ठर बाँधे जैसे?

या यूँ ही 

उम्र से पहले ही 

वातावरण या मौहाल के 

अलग अलग हादसों के शिकार जैसे?        


कहीं एकदम सिल्की?

और कहीं?

एकदम 

ऐठें, गुथे हुए जैसे?

घुँघराले या सिल्की बाल?

कहीं हल्के हल्के

हौले हौले हवा से तैरते जैसे?

और कहीं?

बधें जाने कैसे कैसे बंधनो में?


इनकी महिमा को 

थोड़ा और जानने की कोशिश करते हैं। 

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