मैं पास में ही
एक चाचा के घर गई हुई थी
क्यों?
एक इंसान ने कुछ महीने से
शायद
शराब छोड़ी हुई थी
या कहो
वो पहले वाले हाल नहीं अब नहीं।
मगर
रक्षाबँधन वाले दिन के बाद
अचानक घर आना बँध
फ़ोन उठाना भी बँध
लो।
फिर पकड़ लिया लगता है?
ख़ास म ख़ास पार्टी वालों ने?
चाची चाचा उधर जाते हैं
जहाँ वो रहता है
तो सोचा खबर ले लूँ।
वापस घर की तरफ आई
तो गली में भीड़ और शोर
काफ़ी तार भी पड़ी हैं गली में
एक से पूछा
भैया मीटर लगा रहे हो?
हाँ।
मेरे यहाँ भी लगना है क्या?
दीदी हमें तो पता नहीं
उधर हैं ना वो उनसे पूछ लो
भाई के घर की तरफ
ईशारा करके।
मैं उधर गई
बैठक में कई बैठे हुए हैं
मैंने एक से पूछा
भैया,
उधर घर का भी लगना है क्या?
कोई जवाब नहीं।
दूसरे से पूछा
नहीं वहाँ का नहीं लगना।
क्यों?
और लो जी
भड़ाम भड़ाम शुरु।
सारा लिखना शायद
काफी पड़ जाएगा
किसी पे?
और क्यों?
या
क्या फ़र्क पड़ता है?
इतना वक़्त
बिजली मीटर के
नए कनेक्शन की
रिक्वेस्ट के बावज़ूद
मीटर का ना लगना
क्या कहलाता है?
शायद ये
"यहाँ तो सबका
ऐसे ही चलता है
आप भी चला लो?"
सच में ऐसा ही है क्या?
अब ये हक़ीक़त
बिजली विभाग
और
पढ़ने वालों को
मेरे से ज्यादा ही पता होगी।
आप क्या कहते हैं?
मगर जिस हिसाब से
मेरे मीटर कनेक्शन के साथ हो रहा है
उससे ऐसा कुछ लग रहा है?
नहीं तो ऐसे ऐसे काम तो
बिजली विभाग वालों को
बिना कहे कर देने चाहियें?
इतना वक़्त
इतना
अप्लीकेशन
फॉर्म
ये डॉक्यूमेंट
वो डॉक्यूमेंट खेलना?
क्या कहलाता है?
और
उनका कहा
सबकुछ पूरा करने के बाद
ये कहना
दुबारा फॉर्म भरो?
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