Built in Environments And Social Simulations : Today's World Realities
हर जीव
एक तरह के मीडिया में जन्म लेता है
माँ के मीडिया से निकलकर
(Amniotic Fluid)
इस दुनियाँ के
अलग अलग तरह के मीडिया में
पलता और बढ़ता है।
वो पलने बढ़ने वाला मीडिया
कितना सुरक्षित है?
कितना आगे बढ़ने के लिए
उपजाऊ तत्वों से भरा है?
या कितना असुरक्षित
और नुकसान दायक तत्वोँ से?
सुरक्षित और उपजाऊ मीडिया में
उसे बहुत कम मेहनत में भी
काफी कुछ मिलता है
और असुरक्षित
और नुकसानदायक मीडिया में?
या तो वक़्त से पहले ही
ख़त्म हो जाता है
या
बहुत ज्यादा मेहनत करने पर भी
बहुत कम पाता है।
हमारे समाज के
किसी भी हिस्से की कहानी
बस इतनी भर है।
फिर क्या दोषारोपण?
और क्या निर्दोष?
किसी इंसान पर?
जब सब कुछ किया धरा
किसी भी तरह के
मीडिया का हो?
और मीडिया
डिज़ाइन और इंजिनियर
किया जा रहा हो?
तो?
कृत्रिम रुप से तैयार किए गए
वातावरण में उगे जीवों पर
कैसा दोषारोपण?
और कैसी सज़ा?
ख़ासकर तब
जब उन्हें ऐसा कुछ पता तक ना हो।
जिन्होंने
वो मीडिया
डिज़ाइन और इंजिनियर
किया है
उनका क्या?
माना
आम आदमी को
ये कम पता है
या पता ही नहीं है
ख़ास लोगों को तो पता है?
Manufactured Consents
Manufactured Identities
Synthetic Media
And
Built in Environment Realities
कृत्रिम रुप से तैयार किए गए
वातावरण की सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ
कहो कितने उदाहरण दूँ?
अपने ही घर से शुरु करूँ?
या आसपड़ोस से?
या खुद आप से?
और आपके बच्चोँ से?
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