सामाजिक सामान्तर घड़ाइयाँ होती कैसे हैं?
उनके लिए क्या कुछ चाहिए होता है?
किसी बुरी सामाजिक सामान्तर घड़ाई के
दुष्प्रभाव से
खुद को
या अपने आसपास को कैसे बचा सकते हैं?
संभव है क्या?
अगर हाँ, तो कैसे?
ये जंतर मंतर तंत्र कोई जादू नहीं है
विज्ञान है
एक तरीका है
या कहो ढेरों तरह के तरीक़े हैं
जिन्हें समझकर ना सिर्फ़
कहीं और हुई ऐसी किसी
सामाजिक सामान्तर घड़ाई के
दुस्प्र्भाव से बचा जा सकता है
बल्की,
विरोधों के बावज़ूद
अपनी तय दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
Campus Crime Series में
ऐसे से ही कुछ
नुख्से
या तरीक़े छुपे हैं।
उनमें ना सिर्फ़ ये बताया हुआ है
सामाजिक सामान्तर घड़ाईयाँ कैसे होती हैं
जब सिस्टम को ये समझ आया
वो उनके तरीक़े छाप चुकी है
तो उन्होंने लिखने वाले को ही कैद कर दिया।
जो अब तक पब्लिश नहीं हो पाया
उसमें कहीं ज़्यादा बारीक़ी डिटेल हैं।
और दुस्प्र्भावों से निपटने के तरीक़े भी।
सबसे बड़ी बात
वो किन्हीं पेपर्स या फाइल्स में नहीं है
जिन्हे सिस्टम मिटा सके
वो Live है
जो चल रहा है
आपकी ज़िंदगी मैं
आपके आसपास के वातावरण में
उनमें छुपे या
छुपा दिए गए Ingredients में
Media Culture Lab के जैसे।
सिस्टम घड़ने वालों ने
सारे सँसार को ही
अपनी Media Culture Lab बनाया हुआ है।
No comments:
Post a Comment