सारा खेल डाटा में है?
डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने
हथियार बना लिया है?
कैसा हथियार भला?
डाटा अगर भले लोगों के पास है?
तो वो भलाई करेंगे?
और बुरे लोगों के पास है?
तो?
लग गई नज़र समझो?
डाटा सिर्फ मिर्च मसाला नहीं है
वो तो आम जनता को परोसने के लिए है
डाटा यहाँ, वहाँ, जहाँ देखो
सुनो, अनुभव करो या समझो
वहीँ डाटा पॉइंट्स बनाने का
या उसमें फ़ेरबदल करने का
राजनितिक हथियार है।
अब जो कुछ आप
देख, सुन
अनुभव कर सकते हैं
या समझ सकते हैं
वो सब अगर डाटा पॉइंट्स हैं
तो?
आदमी को रोबोट बनाना कितना मुश्किल है?
आप जो खाते हैं
वो वहाँ के और आपके सिस्टम का डाटा है
आप जो पानी पीते हैं
वो वहाँ के और आपके सिस्टम का डाटा है
आप जिस हवा में साँस लेते हैं
आप जो कपड़े पहनते हैं
आप जिस घर में रहते हैं
आप जिन लोगों के साथ रहते हैं
आपका अड़ोस पड़ोस
उस अड़ोस पड़ोस में
या खुद अपने घर में
आप जो कुछ देख
सुन, समझ सकते हैं
या अनुभव कर सकते हैं
वो सब आपके सिस्टम का, शरीर
और आपके आसपास के सिस्टम का डाटा है।
आपके अपने सिस्टम, शरीर
और आपके आसपास के सिस्टम की
interaction से बना डाटा है
वो फिर चाहे जीव हों या निर्जीव
इंसान हों या कुत्ते, बिल्ली
गाएँ, भैंस हों
या गधे, घोड़े
कीड़ी मकोड़े हों या मछर मक्खी
कुछ भी।
मकान दुकान हों
मोटरसाइकिल या गाडी
इन सबके ऊप्पर लिखा
जो कुछ आप पढ़ सकते हैं
देख सकते हैं
सुन या समझ सकते हैं
या अनुभव कर सकते हैं
वो सब आपके अपने सिस्टम, शरीर
और आपके आसपास के सिस्टम का डाटा है।
जैसे बनारस के पंडे (पाण्डे?)
इंसान की मर्त्यु के बाद
आप जिस किसी की अस्थियाँ प्रवाहित करने जाते हैं
उससे ही आपके पुरखों तक के नाम
अपने बही खातों से बता देते हैं
कुछ कुछ वैसे ही
वैसी सी ही पद्धति पर बने
आज के डाटा सैंटर हैं।
मगर
उनमें और आज के डाटा सैंटर्स में
दिन रात का फर्क है
टेक्नोलॉजी
और उसकी स्पीड का फर्क है
वो सिर्फ़ नाम बता पाते हैं?
या थोड़ा बहुत इससे आगे भी ?
मगर आज के डाटा सैंटर्स?
?
सोच सकते हो क्या करते हैं?
आपकी सोच समझ से
बहुत बाहर की दुनिया है ये?
फिर भी सोचो
आते हैं एक एक करके
अहम अहम डाटा पॉइंट्स
और डाटा सैंटर्स पर।
और हमारी आज की अनोखी दुनिया पर
अभी तक ज़्यादातर लोगों से छुपे
तंत्र पर
ख़ासकर, भारत जैसे देशों में।
और उनके प्रभावों और दुस्प्रभावों पर।
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