जब Don की गाड़ी
हाईवे पर दौड़ रही थी
तो दिमाग़?
आसमाँ में
जाने कैसे कैसे युद्ध लड़ता हुआ?
वो फाइल्स
वो हादसे
वो झूठ
वो केसों पर केस
समझ से बाहर जैसे
एक के बाद एक।
समझ से बाहर था सबकुछ
ये दोबारा बुलाकर
जॉइन करवाने का
आख़िर मतलब क्या था?
उस वक़्त मालूम नहीं था
कैसे कैसे कलाकार
दुनियाँ के किस किस
कोने में बैठकर
वो सब घड़ रहे थे?
ऐसे ही किसी कोने से शायद
कोई नाव उतरी थी स्क्रीन पर?
नहीं।
किन्हीं पुरानी डायरीयों से
निकले हुए पत्रों से चलकर
मीडिया पर चलती हुई जैसे?
और फिर कहाँ से कहाँ पहुँची वो?
अभी मुम्बई के किसी नेवी ऑफिस में
पन्ने खँगाल रही हो जैसे
किसी पापा के
उस वक़्त के
जिसके बारे में उसे बहुत कम पता है
बस, कहानियों सा सुना है
झूठी या सच्ची सी कहानियाँ?
Time Travel ऐसे भी होता है?
हाँ।
और भी बहुत तरह से होता है
कहो तो राम सिंह के दादा
और पड़ दादा के टाइम की
सैर पर भी चलें?
या इतने में ही गुजारा हो जाएगा?
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