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Tuesday, August 11, 2026

System, Code and Conflict of Interest Politics 7

राजनितिक पार्टियाँ सिस्टम बनाती हैं 

और उन सिस्टम पर 

सीधा सीधा अपना कंट्रोल रखती है। 


उनमें तीन अहम चीज़ें हैं 

पानी, खाना और हवा  

किसी भी ढँग के सिस्टम में 


इन तीनों पर काफ़ी तरह के कंट्रोल होते हैं 

ताकी आपको ये सब 

साफ़ और आसानी से उपलभ्ध हो सकें 

जहाँ ऐसा नहीं है 

वहाँ गड़बड़ ही गड़बड़ है। 


सिस्टम ने जो कोड या कोढ़ बनाए हैं 

वो उस सिस्टम की जरुरत के अनुसार बदलते हैं 

सिस्टम अगर अच्छा है 

तो ज़्यादातर भले के लिए 

लेकिन सिस्टम अगर बुरा है तो?


इसलिए 

सबसे ज़्यादा मार 

समाज का सबसे नीचे वाला 

और 

कम संसाधनो वाला तबका झेलता है।  

उसके दुख दर्द भी ज़्यादा होते हैं 

और ज़िंदगी भी अकसर छोटी। 


बुरे सिस्टम में तो ये ख़ास जरुरी हो जाता है 

की आप जितना हो सके, 

कम से कम 

इन तीन संसाधनों पर तो अपना कंट्रोल रखें 

और ये बहुत मुश्किल भी नहीं है?

ये एक प्रशनचिंह है?

जैसे गाँव आने पर मुझे समझ आया? 


क्यों?

सिस्टम का किया धरा कबाड़? 

सिस्टम ताक़तवर? 

और उस पर बुरा भी? 

भला वो इतनी आसानी से ऐसा क्यों होने देगा?


उसपर

इस सबकी मार जो ज्यादा झेलते हैं 

वो अकसर कम पढ़े लिखे भी होते हैं 

उन्हें कैसे भी बहका दो 

और वो सँसाधन होते हुए भी 

ऐसा नहीं करेंगे 

और ना अपने आसपास वालोँ का होने देँगे?    

और शोषण सिर्फ कम पढ़े लिखों का हो 

ऐसा भी कोई जरुरी नहीं 

खुद भुगतभोगी हूँ मैं।  


यूनिवर्सिटी में जब पानी का खेल समझ आया 

तो नहाना 

और कपड़े तक फिल्टर्ड पानी से धुलने लगे थे 

हाँ, खर्चा ज्यादा आता था 

2 - 2 Water Purifier एक इंसान के लिए? 

उस पर 

हर 15 -20 दिन में फ़िल्टर बदलना? 

मगर 

हॉस्पिटल जाने से बेहतर था। 


कुछ ऐसी सी ही समस्याओँ की वज़ह से 

एक के बाद एक 

घर सहायकों को हटाना पड़ा 

बाहर खाना 

और बाहर से खाना भी बन्ध हुआ 

ऑफिस, 

केस के बाद केस फाइल्स 

और इतने ड्रामों के बीच 

खाना, सफ़ाई 

और लॉन तक खुद मैनेज करना?

मुश्किल था  

मग़र मरने से बेहतर था। 


उस पर ये भी समझ आया की कभी कभी 

इंसानों से मशीने बेहतर काम आती हैं 

गाँव आई तो लगा 

कम से कम ये समस्याएँ तो नहीं होंगी 

यहाँ क्या हुआ?

मेरा अपना घर 

या कहो 

आसपड़ोस ही आड़े आने लगा? 

ऐसे कैसे?


या कहना चाहिए 

उसके पीछे छुपी राजनीती? 

जो ईधर भी मार करती है?

और उधर भी?

मगर छुपे और गुप्त रुप से?  

  

कुछ तो 

थोड़े ज्यादा भोले होने की समस्या? 

और कुछ?

राजनीतीक सिस्टम की मार?

और कुछ?

लोगों के अपने अपने 

अपनी ही तरह के अजीबोग़रीब निहित स्वार्थ? 

और कहीं शायद लालच थोड़े ज़्यादा ही?


मगर      

ये सब कोई कहानी कह रहे थे 

सिस्टम की कहानी 

सिस्टम की ही जुबानी?


सिस्टम खुद कह रहा हो जैसे?

यूनिवर्सिटी जैसी जगह पर 

जहाँ इजाज़त के बिना 

परिंदा तक पैर नहीं मार सकता 

वहाँ ख़राब पानी सप्लाई कर सकता हूँ। 


जहाँ 24 घंटे साफ़ पानी उपलभ्ध होता हो 

2 या 3 बार रोज पानी की सप्लाई हो 

जिस सिस्टम में अपना खुद का 

वाटर सप्लाई सिस्टम हो  

वहाँ तक कभी कभार   

किसी खास जग़ह या घर 

बंद तक कर सकता हूँ। 


फिर गाँव जैसी जगह? 

इतनी तरह से 

और इतनी तरफ से 

समस्याओं से घिरे लोगों की औकात क्या?

गरीबी और कम पढ़ा लिखा होना 

अपने आप में बहुत बड़ी समस्याएँ हैं।  


एक बार तो लगा सच है 

मगर 

क्या सच में यही सच है?

सिस्टम 

सिर्फ़ बुरे लोगों से तो बना नहीं 

कुछ तो भले भी होंगे?

तभी थोड़ा बहुत सही है शायद?  

 

तो देखें समाधान क्या है?

उससे पहले थोड़ा यहाँ के सिस्टम को ही समझ लें?  

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