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Sunday, July 19, 2026

सिस्टम और कोड 11

 सिस्टम और  Conflict of Interest की राजनीती। 

इसे जानने से पहले थोड़ा समाज को समझने की कोशिश करते हैं। 


दो अलग अलग समाजों को देखना 

सुनना, पढ़ना, समझना 

और उसका हिस्सा होना 

उनमें ज़िंदगी का एक खास हिस्सा गुजारना 

अपने आप जैसे बहुत कुछ दिखा देता है 

सुना देता है या समझा देता है 

या उसके माध्यम से आपकी ज़िंदगी गुजार देता है   


एक?

अनपढ़ या कम पढ़ा लिखा समाज 

समाज के उस आखिरी 

या मध्यम या उससे थोड़ा नीचे समाज वाला हिस्सा 

हुलिया, देहाती या खिचड़ीनुमा?

ज़ुबान खड़ी हरयाणवीं, अखड्ड, गवाँरु?

बद्जुबाँ? 

और गाली गलौच तो जैसे? 

बात बात पे झड़ती हों फुलझड़ियाँ?

तीखा तेवर, ऊँचे बोल 

हर बात पे कटाक्ष 

काँटों से भरे झाड़ झाड़ी जैसे कोई?


दूसरा,

दिखने में साफ़ सुथरा, शालीन 

दाग रहित, एकदम नए नए जैसे 

खास फ़िटिंग और शरीर पर आकर्षक लगते कपडे 

जैसे एकदम पॉलिशड, निखरा निखरा सा 

जुबान में भी ऐसे ही मिठास, शालीनता 

हर शब्द जैसे सोच समझकर बोला हुआ 

हर बात पर खिलते हों फूल जैसे?


ये सिर्फ औकात का फर्क है? 

या थोड़े से प्रयासों का भी?

और काफी हद तक माहौल के तड़के?


एक तरफ,

आपने अभी अभी बर्तन साफ़ किए हैं 

और आपका भाई, बाप या घर का कोई पुरुष 

आपका बनाया हुआ खाना खाकर 

बर्तन ऐसे ही छोड़ जाता है 

वो भी अब आपको ही साफ़ करने हैं? 

ठीक ऐसे ही, जैसे घर की साफ़ सफाई?

या कपड़े धोने जैसे काम भी आपके ही हैं?


और आप बड़बड़ करते हैं? 

कम से कम भाई पर या शायद पति पर? 

या बेटे पर? 

अपने बर्तन खुद साफ़ किया कर 

या खाना एक बनाएगा तो बर्तन दूसरा साफ़ करेगा 

वो सुनता है क्या?


अरे?

हमारे यहाँ ये काम लड़कों के कहाँ होते हैं?

ये तो लड़कियों के काम होते हैं 

बचपन से ही आपको किसी ने सिखाया नहीं क्या?

या ज्यादा पढ़ गयी?

या जुबान बहुत चलती है तुम्हारी?

और भी कितना कुछ सुन लेते होंगे?

या सुनने से आगे भी कितना कुछ सह लेते होंगे?

अच्छा है, रिश्ते बने रहते हैं?

इतना सा तो रिश्ता बने रहने के लिए कर देना चाहिए?

ऐसी छोटी छोटी बातों पर भी क्या कीच कीच?      


दूसरी तरफ,

ये सब काम करने के लिए कोई सहायक है?

शायद कहीं कहीं तो कई सहायक होते हैं 

आदमी के रुप में या मशीने?

तो ऐसे मुद्दे ही कहाँ होंगे? 

या शायद वहाँ भी ऐसे ऐसे मुद्दे होते हैं?

या जाने कैसे कैसे मुद्दे होते हैं?  


जहाँ सहायक नहीं हैं?

वहाँ मिलजुलकर कर लेते हैं?

रिश्ते या घर कभी भी एक तरफ़ा नहीं चलते?

मिलजुलकर ही निभते हैं?

फिर वक़्त से कदम मिलाना भी जरुरी है 

खासकर, अगर दोनों बाहर काम करते हैं तो?

इतनी छोटी छोटी बातों पर भी क्या तकरार?


यहाँ सिर्फ समाज का हिस्सा ही नहीं बदल गया 

सोच का तरीका ही बदल गया 

सिस्टम ही बदल गया 

और उसके साथ उसके कोड भी 

जहाँ नहीं बदलते?

वहाँ तलाक़ ज्यादा होते हैं? 

क्यूँकि, उस सिस्टम में 

लड़कियाँ पराया धन या किसी की अमानत नहीं होती  

बराबर होती हैं। 


दोयम दर्जे की नागरिक नहीं होती 

उन्हें अपने घर ऐसा नहीं सुनना पड़ता 

ये काम लड़कियों के हैं और ये लड़कों के 

वो लड़कों की तरह ही पढ़ती हैं 

और उन्ही की तरह नौकरी भी करती हैं 

उनके अपने कमाए पैसे तो अपने होते ही हैं 

उनको अपने पैदाइशी घर से भी मिलता है 

भीख नहीं, हिस्सा, वो भी बिना माँगे 

उसके लिए उन्हें कोर्ट के धक्के नहीं खाने पड़ते? 

ठीक ऐसे, जैसे लड़कों को मिलता है पैदाइशी? 

वो किसी ससुराल के सहारे पर भी नहीं पलती 

आत्मनिर्भर होती हैं

बराबर की साझीदार होती हैं, घर चलाने में?    


इनके बीच में भी हज़ारों तरह की खिचड़ियाँ हैं 

आप भी ऐसे ही किसी खिचड़ी समाज का हिस्सा हैं?

खासकर, भारत जैसे देश में?

कहीं पैदाइशी घर के हाल बुरे हैं 

तो कहीं, ससुराल के?

जहाँ दोनों के बुरे हों?

वहाँ तो अब कहना ही क्या? 

 

सुना है, इन खिचड़ी समाजों में 

खिचड़ी सिस्टम के कोड काम करते हैं। 

जिनमें Conflict of Interest बहुत ज्यादा होते हैं 

वहाँ का सिस्टम बनाने वालों के 

इसलिए, वो इनको बदलना ही नहीं चाहते 

ये जैसे हैं, उसी में उनका भला है?


आगे जानते हैं 

ऐसे Conflict of Interest की राजनीती वाले समाज को 

और उसके कोडों को  

जिसमें वो घर के एक सदस्य को ही 

घर के दूसरे सदस्य के खिलाफ दुरुपयोग करते हैं? 

और ऐसे ही आसपास को भी? 

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