एक छोटा सा सिस्टम
आप खुद हैं
आपका शरीर है
जो दुनियाँ का अब तक का
सबसे बेहतरीन सिस्टम है।
उसके बाद
थोड़ा बड़ा सिस्टम
आपका घर
और उसके बाद
आपका आसपास
उसके बाद
आपकी सोसाइटी
मौहल्ला, गाँव
या शहर
राज्य या देश
और सबसे बड़ा
ये सँसार।
जितना ज्यादा आपका अपना सिस्टम
आपसे बड़े सिस्टम के
Compatible है
या नहीं है
उतना सा ही आपका जीवन
और उसकी तरक़्क़ी
या उसमें रोड़े हैं।
डाटा से आगे
डाटा के प्रयोग
और दुरुपयोग के खेल होते हैं।
क्यूँकि
DATA ही दाता है।
क्यूँकि
DATA ही दाता है।
देने या लेने वाला है?
तो वो आपका हितैषी?
या शुभचिंतक भी हो सकता है?
और
बुरा करने वाला भी?
जैसे कोई पूछे
मेरी बच्ची
या बच्चे के साथ ऐसा हुआ
भला एक बच्ची
या बच्चे का इसमें क्या दोष?
जहाँ कहीं बुरा होता है
वहाँ,
वहाँ के बुरे डाटा का प्रयोग
बढ़ा चढ़ा कर होता है
और भला डाटा दरकिनार।
दोष
उसके उस सिस्टम के भगवान का है?
या दाता का है?
वो डाटा कितने छोटे
या बड़े सिस्टम का है?
किसी एक इंसान का है?
या उस मौहल्ले या समाज का?
क्यूँकि
वो सिस्टम ही ख़राब है?
छोटा सिस्टम?
या बड़ा?
या हो सकता है
दोनों ही ?
सिस्टम में
ऊप्पर उस दाता से लेकर
उसे सलाह देने वाले
या उसकी कमिटी
या सिमिति से लेकर
उसका पुजारी
और भी न जाने
कैसे कैसे भक्त?
एक से बढ़ कर एक
खाने वाले?
या
कबाड़ करने वाले बैठे हैं?
या
भला करने वाले?
ये डाटा जरुरी नहीं
उस बच्चे
या बच्ची का हो
या उस इंसान का हो
हो सकता है
आसपास का हो?
इसे आदमी
किसी छोटे समूह की सँगत
या मौहल्ले
या ऐसे समाज की सँगत का
असर भी कह सकते हैं?
या दाता द्वारा शोषण भी?
क्यूँकि
वो बच्चा या बच्ची
या इंसान
उस बुरे सिस्टम में रह रहे थे?
इसलिए ऐसा हुआ?
भले में रहते तो शायद नहीं होता?
ये किसी भी
घर के सिस्टम पर भी लागू होता है।
और उससे बड़े सिस्टम पर भी।
ऐसा ही बिमारियों
या लम्बी
या छोटी ज़िंदगी
या खुशहाल
या बुरी ज़िंदगी का है।
अच्छा घर,
अच्छा आसपास
समाज या मौहल्ला
आपको अच्छा देगा?
और बुरा?
बुरा ही?
जैसे
जिसके पास जैसा होता है
वो वैसा ही बाँटता है।
अच्छे में
बढ़ा चढ़ा हुआ
अच्छा भी मिल सकता है?
और बुरे में
बढ़ा चढ़ा हुआ बुरा भी?
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