Code, System and Conflict of Interest Politics
IDs and Codes
मैंने IDs को इतना ध्यान से
कभी नहीं निहारा
जितना, इन कुछ सालों में
आम आदमी के पास
इतना वक़्त ही कहाँ होता है?
IDs को भी Microscope सा निहारें?
हमारे यहाँ
हमारी IDs जैसे तैसे मिल जाएँ
वही बहुत नहीं होता क्या?
यहाँ तो कोई भी ID मिलने के बाद
ऐसा अहसास होता है
अरे! तू आ गई?
प्रसाद बाँटू क्या?
किसी ऐसी ही ID के बाद
कोई और ही बताता है
एक बार उसे पढ़ भी ले
उसपर यूँ लटके झटके से
देने वालों ने लिखा क्या है?
या क्या कुछ नया सा
अजीबोग़रीब सा उकेर दिया है?
उसके बाद तो एक के बाद एक
सब ID जैसे उधड़ती जाती हैं
सिर्फ़ मेरी अपनी नहीं
आसानी से
किसी की भी उपलब्ध हो
कितनी सारी तो
एक आम इंसान को भी
ऑनलाइन ही मिल जाएँगी।
पत्रकारों से
या कुछ परोपकारियों से पूछो
वो बता देँगे
कहाँ कहाँ आसानी से उपलब्ध हैं?
हमारी IDs?
और एक ये IDs देने वाले ऑफिस?
हमसे ही छुपाते फिरते हैं जैसे?
नहीं, नहीं
कभी कभी ID वाले ऑफिस नहीं
बल्की,
ख़ास राजनितिक पार्टियों के
कुछ ख़ास तरह के चमचे?
जैसे
एक ऑफिस ने एक ID
तीन बार बनाई
मतलब?
उस So Called ऑफिस के
तीन बार धक्के खिलाए
और उस पर फोटो वो लगाई
जो खुद मेरे पास नहीं।
उनके पास
वो इतनी पुरानी फोटो कहाँ से आई ?
उस सबके बावजूद
वो ID आपको कभी नहीं मिली
हाँ
ऑनलाइन जरुर मिल गई
वहीं से पता चला
जो उन्होंने फोटो ली थी
वो तो नहीं है ये?
ये फोटो तो मेरे पास भी नहीं।
फिर?
होता है?
चलता है?
कहो?
मेरा भारत महान है?
कौन सी ID थी ये?
सालों पहले कोई
वोट पहचान पत्र
उसके कुछ सालों बाद तो
मैंने वोट डालना ही बँध कर दिया
जबसे ये पता चला
इलेक्शन कैसे होते हैं?
और वोट पहचान पत्र क्या होता है?
हमारे पहचान पत्र IDs,
जो कुछ गुप्त गुप्त चल रहा है
उसी की गुप्त गुप्त कॉपी जैसे हैं
अब वो कॉपी
जो कुछ चल रहा है उसके
कितनी आसपास है?
या दूर है
ये निर्भर करता है
किस पर ?
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