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Wednesday, July 22, 2026

सिस्टम और कोड 12

सिस्टम और  Conflict of Interest की राजनीती

आम आदमी से कैसे खेलती है?

और कैसे उसे अपना रोबॉट या गुलाम बनाती है?


ऑफिस से उदहारण लें या घर और आसपास से?

दोनों से लेते हैं एक एक करके  


ऑफिस 

9-10 सालों में कोई शिकायत नहीं 

मगर?

2014 में BJP के आते ही 

इस कमिटी से निकाला और उस कमिटी से 

तकरीबन अचानक 

मगर 

आपको धीरे धीरे, कुछ वक़्त बाद समझ आता है।    

क्लॉस में रोड़े, लैब्स में रोड़े 

घर पर रोड़े, रोड़ पर रोड़े 

मगर 

आपको धीरे धीरे, कुछ वक़्त बाद समझ आता है।   


और आप यहाँ वहाँ शिकायत करने लगते हैं 

मगर 

ये शिकायतों का दौर तो 2012 में ही नहीं शुरु हो गया था?

BJP उसके बाद ही आई है, 2014 में 

क्लॉस और लैब्स के रोड़ों से आप पहले ही तंग नहीं हो चुके थे?

सेक्रेटरी का इलेक्शन उसके बाद ही लड़ा था 

की चलो यहाँ कुछ नहीं हो रहा 

तो एडमिंस्ट्रेशन का रास्ता ही सही 

वरना, 

बच्च्पन से ही राजनीती से नफरत करने वाला इंसान 

और राजनीती में एंट्री?


शायद ये सोचकर 

की Higher Education System है 

यहाँ तो ऐसा क्या होता होगा? 

ये भूलकर,

लैब्स और क्लासेज में क्या हो रहा था?

और क्यों?

वो पता ही नहीं था। 


Reflection का सबसे बड़ा फ़ायदा?

उसने यही बताया है 

कोई भी समस्या, 

शायद ही कभी अचानक आती है 

उसके सब लक्षण पहले से धरे होते हैं 

हमारे आसपास ही। 

मगर 

हम अपनी भागदौड़ की ज़िंदगी में 

उनकी तरफ देखते ही नहीं 

उन पर सोचना समझना 

या आत्म विश्लेषण करना तो कहाँ?


भागदौड़ की ज़िंदगी वालों को 

शायद इसीलिए शुकुन नहीं होता?

क्यूँकि, 

वो अक्सर ज़िंदगी को ढो रहे होते हैं 

ज़्यादा, ज़्यादा और ज़्यादा की चाह?

इंसान को गधा बना देती है?

अगर 

2017 तक की कहानी ढंग से समझी होती 

तो यूनिवर्सिटी के बुलाने पर वापस शायद ही जाती। 


पर सुना है 

हर चीज़ के दो पहलू होते हैं 

उस दौबारा जॉइनिंग के बाद जो फाइल्स मिली 

अगर वो ना मिलती?

तो Campus Crime Series कहाँ लिखी होती?


और 2022 में अगर वापस गाँव न आती?   

कोशिश तो बहुत की, 

मगर राजनीती वालों ने चलने दी क्या?

ये भी इसी दौरान समझ आया 

यूनिवर्सिटी एक नहीं है 

कई धड़े हैं, कई पार्टियाँ हैं 

और उनमें आपस में खिंचतान

और राजनितिक कुर्सियों की मारामारी। 


सबसे बड़ी बात 

आप कहीं भी रहो 

कहीं भी जाओ 

ये समझकर कभी मत जाना 

वहाँ सब सही मिलेगा 

हो सकता है, वहाँ, यहाँ वाली समस्या ना हो 

या कम हों 

मगर 

वहाँ की अपनी ही तरह की समस्या होँगी 

यही राजनीती सारे  सँसार में है। 

 

गाँव ने सँसार को समझाया? 

ऐसे जैसे 

A Small Global Hub?

Oversurveilled and Overpaying? 

गाँव की राजनीती ने 

Social Simulations और Human Robotics समझाया?

अजब गज़ब दुनियाँ?   

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