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Thursday, July 30, 2026

Semiotic Lab Culture 1

इशारों ही इशारों में? 

बात बन जाती है? 

और बात बनते बनते? 

बात टल भी जाती है?

या बिगड़ भी जाती है? 


होते देखा है ऐसे भी कहीं?

गुप्तगू में?

मुस्कराहट में?

आंशुओं में?

मुँह फुलाने में?

तीखी नज़र में?

कड़वी नजर में?

घूरने में?

नजर घुमाने में?

आँखों की तिल्ली घुमाने में?


एक, दो या तीन?

या कितनी ऊँगली दिखाने में?

अंगूँठा दिखाने में?

एक ऊँगली आगे पीछे कर 

कड़वी नज़र दिखाने में?

किसी की तरफ ऊँगली करने में?

अंगूँठा और एक ऊँगली से 

जीरो बनाने में?


ऐसे ही 

Good? 

Bad? 

OK? 

OK? OK? 

Best of Luck?

Heart Shape?


और भी ना जाने कितने ही संकेत?

इशारों इशारों में ही? 

कर जाते होंगे?

जाने कहाँ कहाँ?

और किस किस किसको?

और कब कब?

या किसलिए?


ऐसे भी बातें होती हैं?

अब सिर्फ बातें होती हैं?

या उससे आगे भी कुछ होता है?

ये तो निर्भर करता है?

कितने सारे फैक्टर्स पर?

जैसे?

सँस्कारों पर?

संस्कृति पर?

विचारों पर?

प्रगति पर?


वक़्त के हिसाब किताब पर?

तारीखों, महीनों या सालों के 

नंबरो या कोडों पर?

और?

किसी भी जगह की राजनीती पर?


इशारों और संकेतों के इस जहाँ को 

या कोडों या कोढों को?

थोड़ा सा और उधेड़ें?

थोड़ा सा और इसका दायरा बढ़ाएँ?   

उससे हम ना सिर्फ़ खुद को बेहतर समझ पाते हैं 

बल्की,

अपने घर और आसपास को भी 

खुद के सिस्टम को भी 

और 

अपने घर और आसपास के सिस्टम को भी। 

 

मतलब?

ख़ामियों  को भी 

और 

ख़ास शक्तियों को भी 

जो हर एक इंसान के पास हैं 

क्यूँकि 

हर इंसान अनोखा है 

ख़ास है 

आपके जैसा ना कोई हुआ 

और ना होगा 

इसलिए खुद को पहचानों 

और डम्मी या मोहरे बनने से बचो। 


बस अपनी कमियों और शक्तियों को पहचानों  

कमियों को चलता करो 

और शक्तियों को निखारो

जो आपको अपना मोहरा बनाते हैं 

वो आपकी दुखती रगो को पकड़ते हैं 

और पकड़े ही रहते हैं 

उन्हें बढ़ाते चढ़ाते हैं 

और बढ़ाते चढ़ाते ही रहते हैं 

आपको उसके उल्टा करना है 


अपनी खासियतों को पकड़ना है 

और पकड़े रखना है 

उन्हें बढ़ाना चढ़ाना है 

खामियों को वक़्त ही नहीं देना। 

फिर आप एक ताकत हैं 

ना सिर्फ़ अपनी 

बल्की 

अपने घर की 

आसपास की और समाज की भी। 


Semiotic Lab Culture 

यही पढ़ाती और सिखाती है 

और 

वो हर कल्चर और जगह पर है 

हर जीव और निर्जीव में है। 

देखना, पढ़ना और समझना शुरु करें उसे?  


Semiotic?

साँकेतिक?

जो संकेतों से आगे भी  

बहुत कुछ बताता, समझाता है? 

ये तो जैसे ABCD हैं 

कोड या कोढों के जहाँ को 

और उनके मतलबों को समझने के लिए 

जैसे?  


Media Lab Culture 

और इसके Ingredients को समझने के लिए 

बहुत जरुरी है ये लैब 

Media Lab Culture का ही 

एक छोटा सा 

मगर अहम हिस्सा जैसे। 

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