Featured Post

Academic Journey?

Current Position Owner at  Media Culture Lab  ( June 2021 - Continue)    Independent  Research, Writing,  Communication,  and  Experiential ...

Tuesday, August 12, 2025

Migration, IDs and Interactions (MC) 8

 Migration 

आज की दुनियाँ का 

कोई भी माइग्रेशन अपने आप नहीं होता 

कोई भी Interaction ऐसे ही नहीं होती 

आप जो कुछ अपने आसपास 

देख, सुन या महसूस करते हैं 

वो सब जीव हों या निर्जीव 

उस वक़्त वहाँ पर 

वहाँ के सिस्टम के रखे हुए होते हैं। 


Migration और Interactions 

Design होती हैं, सिस्टम द्वारा 

जिसमें कुछ ऑटो होता है 

और बहुत कुछ?

Enforced (जबरदस्ती)।  

हर चीज़ आपके आसपास 

जीव हो या निर्जीव 

अपने आप में एक मैसेज होता है। 

कोड या कोढ़ 

जिनसे आप घिरे होते हैं हरपल जैसे। 


जी हाँ ! 

सही सुना आपने 

आप Designer World में हैं 

सामांतर घढ़ाईयोँ का राज यही है 

और इसी Designing के तहत 

आप 

आपको Surveill करने वालों के 

गोटी भर मात्र बनकर रह जाते हैं। 

यही इंसानो को रोबोट बनाने का तरीका है। 


इसमें सामान्तर घड़ाईयाँ 

सबसे बड़ा हथियार हैं कन्ट्रोल का। 

जो कोई राजनितिक पार्टी 

जितना ज्यादा सामान्तर घड़ाईयाँ 

अपने अनुसार कर पाती है 

वो वहाँ के सिस्टम पर 

उतना ही ज्यादा कन्ट्रोल करती है। 

और वो कन्ट्रोल जरुरी नहीं 

उन इंसानो या जीवों के लिए सही हो। 


इसलिए अच्छे सिस्टम में 

ज़्यादातर ज़िंदगियाँ सही चलती हैं 

और बुरे सिस्टम में बुरी। 

कोई भी सिस्टम अपने आप जैसे 

कहीं की भी राजनीती की तरफ 

एक इशारा होता है 

उसके अच्छे या बुरे होने की तरफ़। 


उनके पास आपकी सिर्फ IDs ही नहीं हैं 

बल्की, 

वो आपकी IDs 

अपने अनुसार Design करते हैं 

उन IDs में हेरफेर 

कुछ Policies के तहत होते हैं 

और बहुत कुछ?

Enforced (जबरदस्ती) 

जैसे धकाए और भकाये हुए।  


बहुत बार तो 

सिर्फ़ टाइपो  के नाम पर ही 

कितना कुछ बदल जाते हैं? 

और 

आपको पता तक नहीं चलता? 


ऐसे ही बहुत से हेरफेर 

आपके सामान 

और ज़िंदगी के साथ भी करते हैं 

कभी ऐसे वैसे झाँसे 

या इन्फ्लूंस में लेकर 

कभी छोटे मोटे लालच देकर 

और कभी यूँ ही 

खामखाँ से जैसे डरावे दिखाकर 

या बातों ही बातों 

या इशारों में ही समझाकर। 


सच में देखा जाए 

तो हक़ीक़त इससे भी ख़तनाक है। 

आम आदमी को अपनी IDs के बारे में 

उनमें छुपे या छुपाए गए 

रहस्यों के बारे में ही नहीं पता। 

यही गुप्त सँसार है 

जो आपकी ज़िंदगी हर तरह से 

गुप्त तरीके से   

अपने अनुसार धकेलता है। 


वो उस Location के सिस्टम द्वारा 

Enforced होता है 

आपके आसपास किस वक़्त आपको 

क्या दिखता है? 

क्या सुनता है?

क्या आप महसूस करते हैं?

ये उस Location का Media तय करता है 

सिस्टम तय करता है। 


ऐसे ही,

जैसे 

किसी Fetus का Amniotic Fluid 

जिससे आपका सिस्टम, 

आपका शरीर घिरा हुआ है 

वो चाहे फिर हवा हो 

खाना, पानी, पहनावा या बोलचाल  

इंसान, दूसरे जीव या निर्जीव   

या शिक्षा या समाज का स्तर। 


बहुत कुछ अपने आप जैसे 

ना चाहते हुए भी बदलता है 

ख़ासकर,

अगर आप ध्यान ना दें 

और बहुत कुछ

 विरोध के बावजूद 

अपने आप जैसे। 


जहाँ कहीं आप रहते हैं 

उस वातावरण 

या सिस्टम से होता हुआ 

आपको कहीं न कहीं 

अपने जैसा सा बनाने की कोशिश करता हुआ। 


कैसे?

My Experiment With My IDs?

शायद थोड़ा बेहतर बता सके आगे कहीं।  

No comments: