सोच और खोज?
मगर उससे पहले
Conflict of Interest की राजनीती को समझना बहुत जरुरी है।
Conflict of Interest की राजनीती
सिर्फ़ रिश्तों में दरार पैदा नहीं करती
वो रिश्ते ही खा जाती है
रिश्तों का बिगाड़ इस स्तर तक कर देती है
की कोई स्तर ही ना बचे
उनकी "माँ बहन" करने लगे।
अपमानकर्त्ताओं की इस मानसिक गिरावट को
आप सिर्फ़ राजनितिक रैलियों या भाषणों में ही नहीं
बल्की,
आम बोलचाल के शब्दों
पहनाओं, वस्त्रों
खाने पीने की वस्तुओं
हवा, पानी की गुणवत्ता
पढ़ने लिखने के संसाधनों
खेलने, वर्ज़िश करने
या स्वास्थ्य के संसाधनों
आवागमन-यातायात, खेत-खलिहानों
अपने मकानों या दुकानों के नामो
या पतों से लेकर
गली मौहल्ले की पहचानों
रीती रिवाज़ों के तौर तरीकों
या यूँ कहो की
जो कुछ भी आप
देख, सुन, समझ और सोच सकते हैं
उन सबमें घुला मिला हुआ देख सकते हैं।
और
ये सब आपका और आपके घर का
आसपास का और गली मौहल्ले का
गाँव, शहर, राज्य या देश का स्तर बताते हैं।
इन्हे सुधारा भी जा सकता है
और ज्यादा बिगाड़ा भी।
सब आप पर और आपके आसपास पर,
समाज पर निर्भर करता है।
और इस सबको,
Conflict of Interest की राजनीती ने
मकड़ी के जाले-सा गूँथा हुआ है।
उधेड़ने की कोशिश करें
उस मकड़ी के जाले को?
जैसे जैसे
उस Conflict of Interest की राजनीती से निकलोगे
वैसे वैसे, बहुत कुछ अपने आप सुधरता जाएगा
जितना अपने अपने के चक्कर में उसमें घुसते जाओगे
उतना ही ना सिर्फ खुद ज्यादा उलझते जाओगे
बल्की,
अपनी आगे की पीढ़ियों को भी उलझाते जाओगे।
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