कहानी या लड़ाई?
सत्ता और सट्टा
दोनों एक ही बात हैं क्या?
ऐसे ही
जैसे पत्ता और प्रशनचिंह?
सत्ता एक फिल्म आई थी?
या पत्ता?
तास के पत्ते जैसे?
इक्की, दुग्गी, तीगी वैगरह?
तास खेलते हैं आप ?
कौन से वाला खेल?
बच्चोँ वाले?
या थोड़े बड़ों वाले?
सिर्फ़ शीशा दिखाना है?
इक्की
मेरी भी इक्की
दुग्गी
मेरी भी दुग्गी?
कुछ कुछ ऐसे ही?
या आपके खेल में
इनसे आगे भी बहुत कुछ है?
आप सिर्फ़ इक्की, दुग्गी नहीं मिलाते?
उससे आगे भी रँग रुप है?
गुण अवगुण हैं?
तासीर हैं, तेवर हैं?
अपने पराये हैं?
और भी ना जाने
कैसी कैसी ऊँच नीच हैं?
जैसे?
आप राजे महाराजों वाली
सत्ताओं के खेल खेलते हैं?
वहाँ ऊप्पर
OFFICERS वाली दुनियाँ में
वही खेल खेले जाते हैं।
जो कोई,
कँधे से ऊप्पर जितना मजबुत होता है
वो जीत जाता है?
बाकी?
या तो हार जाते हैं?
या उनकी रक्षा में लगे होते हैं?
राजा रानी की रक्षा?
राजमहलोँ की रक्षा?
कितने स्तर की है?
4 - 5?
6 - 7?
10 - 11?
और आप?
इसके कौन से स्तर पर हैं?
वो समाज में आपकी हैसियत,
औकात, पिछड़ापन या आगे बढ़ते
दायरों और समुहों को बताता है।
आपकी या आपके अपनों की
घर की या आसपास की
सुरक्षा का दायरा क्या है?
राजा रानी को बचाना है?
राजमहल को बचाना है?
ये तो कल की बातें हैं ना?
आज?
ऐसे से ही कुछ ख़ास
औहदों को बचाना है?
कोढ़ों या कोडों को बचाना है?
वो कोड आपके अपने
या आपके अपनों के हैं?
या आप किन्हीं और के मोहरे
या डम्मी मात्र हैं?
कैसे जानेंगे ये?
अगर आपको आज के समाज के
कोड या कोढों का ही पता नहीं तो?
कौन हैं आज के वो ख़ास?
राजा रानी?
ओहदे?
या कोड?
वो कोड
आपके लिए
या आपके घर के लिए?
या आपके समाज के लिए?
कितने भले हैं?
या बुरे हैं?
क्या आज भी आप
कोई राम ढूँढ रहे हैं?
आज की सीता भी
ज़मीन में समाती है?
सिर्फ़ किसी सिरफ़िरे के
कुछ कहने भर से?
या जँगल भेझ दी जाती है?
किसी केकैयी द्वारा?
ऐसी सी ही कोई कहानी
आज की कुन्ती की भी है?
कितने पति थे उसके?
कितने बच्चे?
और कैसे?
आज भी कोई करण है?
और दुर्योधन और दुशाषन भी?
आज भी कोई दशरथ है?
केकैयी और धृतराष्ट्र भी?
आज भी कोई कंस है?
और
गाँधारी और द्रौपदी भी?
आज भी कोई औरत
बिना उससे पूछे
उसकी मर्जी के बिना
4 -5 में बाँट दी जाती है?
कहीं ऐसा कुछ
आपके बच्चों के साथ भी
शुरु तो नहीं हो चुका?
ये सब राजघराने हैं?
या लीचड़ों के अड्डे?
आज भी कोई भीष्म पितामह है?
जो काँटो की सेज़ पर सोता है?
वो सब जो आपने
पुराने जमाने की किताबों में पढ़ा है?
बड़ा ही अजीबोग़रीब
और ऊटपटाँग सा?
क्या वो सब आज भी होता है?
या?
आज उससे भी ज्यादा कुछ है?
भला भी और बुरा भी?
जैसे Conflict of Interest की राजनीती
कल थी, आज भी है
और आगे भी रहेगी
आप उसमें किसी के मोहरे ना रहें
डम्मी मात्र बनकर ना रह जाएँ
उसके लिए भी
इस खेल को जानना बहुत जरुरी है।
क्यूँकि
आज कन्धों से ऊप्पर का हिस्सा
थोड़ा ज़्यादा ही चलता है
और सिर्फ़ गिने चुने लोगों का ही नहीं
जितने ज़्यादा, जितना ज्यादा
पढ़ना लिखना और सोचना सीख जाएँ
उतना ही।
तो आप भी पढ़ते, लिखते हैं?
पढ़ना लिखना सिर्फ़ डिग्री वाला नहीं?
सिर्फ़ कुर्सियों या औहदों के लिए?
कुछ पन्ने
या सर्टिफिकेट या पॉइंट्स मात्र?
इकट्ठे करते जाने वाला नहीं
सच का जानने समझने वाला
या योगदान करने वाला ज्ञान?
पढ़े हुए भी और कढ़े हुए भी?
या कम डिग्री, सर्टिफिकेट होते हुए भी
कहीं ज्यादा कढ़े हुए?
तो तासों से आगे
और कौन से खेल खेलते हैं आप?
क्या आज के खेलों का
अंदाजा तक है आपको?
ख़ासकर उनका
जो आदमी को रोबोट बनाते हैं?
कोई भी नहीं?
तो भी, समझना तो जरुरी है
क्यूँकि
आदमी के रोबोट बनने में
या आदमी बने रहने में
बस इतनी सी जानकारी
या अज्ञानता की दूरी है।
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