साथ का असर कुछ तो खास होता है?
शाँत इंसान के पास
आप शाँत रहना सिखते हैं
और भड़ाम भड़ाम के पास?
शाँत इंसान बुरे वक़्त को भी
शाँति से,
आराम से निकाल देता है
मगर
भड़ाम भड़ाम माहौल?
राई को भी पहाड़ बना देता है
ना हुई बिमारियाँ लगा देता है
हल्की फूलकी, आम सी बिमारियों को भी
जान लेने वाली बिमारियों में बदल देता है।
वक़्त जितना बुरा हो
उतना ही बेहतर होता है
खुद को निखारना
खुद पर थोड़ा और ज्यादा वक़्त लगाना
अपने घर
और आसपास पर वक़्त लगाना।
किसी भी ज़हर से भरे आसपास में
ज़िंदगी आसान नहीं होती
मगर जब तक
आप ऐसे माहौल से ना निकल पाएँ
या अपने आसपास को ना निकाल पाएँ
तब तक जरुरी है
खरपतवार से थोड़ा दूरी
और अपने घर,
यहाँ वहाँ से पहुँचने वाली
खरपतवार की सही जानकारी।
क्यूँकि
अगर जानकारी ही सही ना होगी
तो?
एक दूसरे को ही
आपस में काटते मिलेँगे।
चलो
इस दिवाली सफ़ाई अभियान में
ज़हर से भरे कुड़े कचरे
या यहाँ वहाँ गुप्त रुप से बिमारियाँ फैलते
तत्वोँ के बारे में जानें।
कुछ ऐसी ऐसी जानकारी देने वाले के
ख़िलाफ़ ही भड़काते मिलेँगे
मान के चलो वो खुद कहीं न कहीं
ऐसे ही तत्व हैं।
जाने या अनजाने।
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