Visual Appeal Or Visual Clutter?
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मेरा नया ब्लॉग
आपको यहाँ वो सब मिलेगा जो आँखों को भाता है और दिमाग को शुकुन देता है। आप किसी कबाड़घर या कुरड़ी पर बैठकर भी ऐसा अहसास कर सकते हैं। अब अहसास कर सकते हैं तो? बना भी सकते हैं?
वैसे कबाड़ की घर में जगह ही क्यों?
कबाड़
आँखों को शुकुन नहीं देता
बल्की चुभता है
जो चुभता है
वो तनाव है।
जितना तनाव है
उतना ही नुकसान
तनाव दिखता है
शरीर पर, बीमारी सा
और जेब पर दिमग सा।
दिमग खाता है
सिर्फ़ लकड़ी को ही नहीं
बल्की
उसके आसपास रहने वालों को भी।
आपकी सूरत
आपकी जेब
आपकी सेहत
आपकी खुशियाँ
ज़्यादातर
आपके आसपास की
सुन्तरता और सद्धभाव
जितनी सी ही होती हैं।
ख़ासकर अगर आपको
आसपास के जहर के खिलाफ
अपने दिमाग या घर की
किल्ले बंदी नहीं आती तो।
किसी भी परिस्तिथि में
सबसे बड़ा किल्ला
आपका अपना दिमाग़ है
उसके बाद आपका घर
उसके बाद आसपास।
इसीलिए
एक अच्छी ज़िंदगी के लिए
एक अच्छा माहौल और मौहल्ला
बहुत मायने रखता है।
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