अपने घर से कबाड़ निकालना है
किसी और घर का कबाड़
अपने घर नहीं इकठ्ठा करना
चाहे वो अपने पुराने घर से ही क्यों ना हो।
कबाड़ और किम्मती में फ़र्क होता है
कबाड़ को किम्मती बनाया जा सकता है
मगर
कितना और वक़्त या पैसा लगाकर?
ऐसा क्या ख़ास है उस कबाड़ में
जो इतना कुछ उस पर लगाया जाय?
और इतना कुछ लगाकर भी
क्या दे रहा है वो आपको?
बदले में
कहीं आपके आदमी तक तो नहीं खा रहा?
या बचा रहा है उन्हें?
या बच्चों और युवाओँ तक को
घर से ही बेघर करने की कोशिशें?
या ख़त्म करने तक के इरादे?
सबसे बड़ी बात
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा
बड़ों के साथ हो चुका है
उसी को
आगे फिर से दोहराने की कोशिशें ?
हो सके तो बचो
ऐसे ऐसे शिकारों से।
No comments:
Post a Comment