उफ़ इत्ते रोड़े !
क्या किया इतने रोड़ों का?
थोड़ा स्क्रिबल
थोड़ा रैंट वेंट
थोड़ा कंस्ट्रक्ट
थोड़ा स्ट्रक्चर
थोड़ा आर्किटेक्चर
थोड़ा डिज़ाइन
थोड़ा पेंट
थोड़ा प्रोसेस
काफी सारी फाइल्स
काफी सारे केस स्टडी
काफी सारे लिंक्स
ये ईधर, वो उधर
ये वाला इधर
वो वाला उधर
उफ़ Too Much
Too भेजा फ्राई
और आवाज़ आई
और फाइल्स
और
केस स्टडी चाहिएँ?
नहीं
अब मैं दिए गए
या किए गए
प्र्शन के जाल में नहीं उलझती
वो ऐसे लगते हैं
जैसे मीडिया कल्चर के हेरफेर
जैसे मीडिया का प्रोपगैंडा
इस पार्टी का या उस पार्टी का
जैसे हकीकत को गोलमाल कर
सामने वाले के सवालों को
मुद्दों को दरकिनार कर
सामने वाले की जरुरतों को
हक़ीक़तों को धुँधलकार
अपने ही जाले बिछाना जैसे
इसलिए
अब मैं हर ऐसे प्र्शन पर
प्रशनचिन्ह लगाती हूँ
हर ऐसे प्रोपगैंडा को
अपने तर्क वितर्क की कसौटी पर रखती हूँ
हर न्यूज़ के पीछे छिपे
या छिपाने की कोशिश करते
सवालों
या मुद्दों को देखती समझती हूँ
उनमें मेरा अपना
या मेरे अपनों का
या आम आदमी का
कितना भला या बुरा है?
उस तथ्य को दिमाग़ में रख
उसे न्यूज़ या एब्यूज?
केटेगरी के हवाले कर देती हूँ
और उसके लिए मेरी अपनी
Culture Media Lab है।
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