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You duffer, D Grade?
Said in some context lightly. But?
A child has to listen something, "कुत्ती, कमीनी, रंडी और blah blah blah, 60 मैं तै 20 आए, अर तू मेरे तै छुपावै? ब्लाह, ब्लाह ब्लाह "
बच्चों से ऐसे बात कौन करता है? जो खुद डफर हो? या कोई पढ़ा-लिखा, सभ्य इंसान? पढ़ा-लिखा इंसान ये जानने की कोशिश करेगा, की ऐसा क्यों हुआ? यही बच्चा पिछली क्लास में मान लो फर्स्ट आया हो। तो अब क्या हो रहा है? या ऐसे माहौल में आगे क्या होगा, उस बच्चे के साथ? बाहरी कंट्रोल वालों को या कहो सत्ता के लिए बने जुआरियों को इस सबसे क्या लेना देना? उनके लिए वो बच्चा महज़ एक गोटी है, बाकी सब आम लोगों की तरह।
पिछली क्लास में उसके पास शायद थोड़ा बेहतर माहौल था। अब क्या हुआ? या शायद कहना चाहिए की क्यों हुआ? इस क्यों के लिए ज़िम्मेदार कौन हैं? या कहना चाहिए की कौन-कौन हैं? सीधी सी बात, वो इस बच्चे के या ऐसे माहौल को झेलने वाले बच्चों के शुभचिंतक तो नहीं हो सकते। फिर ऐसे उनके अपने क्या स्वार्थ हैं? या हो सकते हैं? या ऐसी कौन सी मजबूरियाँ हो सकती हैं? Beyond my understanding.
I call such people "ज़बरदस्ती के खसम होना"। क्या सभ्य भाषा है ना? यहाँ की भाषा की शायद abcd है। ऐसा हो ही नहीं सकता की आप ऐसे माहौल में इतना वक़्त रहकर भी, उससे अछूते रह जाएँ। कई बार तो यूँ लगता है, की ऐसे लोगों से आप अपनी भाषा में शायद बात ही नहीं कर सकते? समझ ही नहीं आएगा उन्हें, की वो कर क्या रहे हैं? बहन, बेटियों, बुआ, दादी, काकी, ताईयों तक के जैसे जबरदस्ती के ख़सम होना? जिधर निग़ाह उठाओ, जैसे ख़सम ही ख़सम नज़र आयेंगे? क्या बच्चा और क्या बुजुर्ग? मगर ऐसे कैसे?
वो जो हमारा so called शिक्षा तंत्र खेल रहा है ना, हर तस्वीर जैसे, हर प्रोग्राम जैसे, फिंगरप्रिंटिंग या थंब? राजनितिक पार्टियाँ और मीडिया उसी को भद्दे से भद्दे रुप में समाज को परोस रहा है। Mind Matrix के द्वारा आम लोगों तक के जीवन में उतार रहा है? वो स्पीकर क्या बोला था उस दिन? State Mirrors? Just Mirrors? Or even synthesize worse?
तो ये किसी एक बच्चे की कहानी नहीं है। हाँ। सुधार, उस एक बच्चे की ज़िंदगी के सुधार से जरुर शुरु हो सकता है। जो कुछ लोगों को खुद नहीं आता, वो उसको कुछ अच्छा बोलकर शायद समझा या पढ़ा नहीं सकते। वैसे भी हम तो हैं ही लठतंत्र। हमारे यहाँ क्या सभ्य और क्या असभ्य होना? सबसे बड़े असभ्य तो शायद कुर्सियों पर बैठे हैं? जैसे पीछे कहीं पोस्ट में लिखा, की किसी भी समाज की हक़ीक़त जाननी है, तो उसके शिक्षा के संस्थानों को जान लो, बहुत होगा।
This is not just one day observations but watching this special coded show now since last few years. Same way, I can talk about so many school going children in the surrounding. One extreme case observed last to last year in the form of so called suicide, in the neighbourhood.
पढ़ा कहीं की ये इस गुप्त समाज के खिलाडियों की illegal jail के हिस्से हैं। जो दुनियाँ भर में हैं। Detention Centres, even when people feel, that they are at home? And seriously, it looks like that.
Kidnapped by police में शायद थोड़ा बहुत ऐसा सा जिक्र है। After that watched the extended version of that show at so many levels. Interesting?

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