Media Culture Lab Around The World Amid Different Strata, Classes and Professions?
दूर से ही पता चल जाता है की कौन सा सब्ज़ी वाला होगा?
कैसे? बोलने के ढंग से?
जैसे कोई साईकल पे और खुद ही बोलता हुआ, ये ले लो, वो ले लो?
तो कोई बाइक पे? लॉउड स्पीकर से कुछ बेचता हुआ?, हिसार वालों का मशहूर अचार है और ब्लाह, ब्लाह।
या?
कुकर समरवा लो, गैस चूल्हा ठीक करवा लो, और ब्लाह, ब्लाह।
या?
चैन लगवा लो चैन! बैग की, तकिये की, पैंट की, चैन लगवा लो चैन और ब्लाह, ब्लाह।
या?
भैंस काटडा बेच लो, भैंस काटडा बेच लो। और ब्लाह, ब्लाह।
या?
कटिया बेच लो। और ब्लाह, ब्लाह।
या?
बर्तन ले लो बर्तन, बालां के बर्तन
या?
पैदल औरतें, सिर पे बड़ा-सा टोकरा, राजस्थानी बंजारा टाइप पहनावा और बोली, फाकी ले ले फाकी, पेट दर्द की फाकी, मुल्तानी मिटटी, काला सिंधा नूंण, सुई। फाकी ले ले फाकी।
या?
एक आदमी और औरत, राजस्थानी गढेलवार, बंजारा टाइप जाती, तसला ले लो, टब ले लो, बाल्टी ले लो। लेवअ सै के बेबे? ले ले, किमैं तो ले ले।
या?
लड़का पैदल जाता हुआ, सिर पर टोकरा जैसा-सा कुछ लिए हुए। मरमुण्डे ले लो, मरमुण्डे।
या?
लड़का पैदल जाता हुआ, सिर पर टोकरा जैसा सा कुछ लिए हुए। नारियल ले लो नारियल, कच्चा नारियल।
या फिर टैम्पू जैसा सा व्हिकल,
मेहंदीपुर के बाला जी
तेरे भवन मैं भूत घुमते देखे आज नज़ारे
सब्ज़ी बेचने वाले का लाल रंग का ऑटो, दूर से ही पता चल जाता है की कौन सा सब्ज़ी वाला होगा।
और अरे ये क्या? पोस्ट बड़ी हो गई ना थोड़ी सी? बाकी अगली पोस्ट?
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