About Me

Happy Go Lucky Kinda Stuff! Curious, atheist, lil-bit adventurous, lil-bit rebel, nature lover, sometimes feel like to read and travel. Writing is drug, minute observer, believe in instinct, in awesome profession/academics. Love my people and my pets and love to be surrounded by them.

Thursday, April 11, 2024

संतुलन जरुरी है

जैसे स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार जरुरी है। संतुलित शरीर का प्रयोग जरुरी है, चाहे वो फिर घुमना-फिरना, साईकल चलाना, तैरना, व्यायम या कसरत करना हो। वैसे ही, जितना हम अपने आसपास से, पर्यावरण से या प्रकृति से लेते हैं, कम से कम उतना, उसे वापस देना भी जरुरी है। जहाँ-जहाँ ऐसा नहीं है, वहाँ का वातावरण उतना ही खराब है। फिर चाहे वायु हो, पानी या ज़मीन। पेड़-पौधे हों, जीव-जंतु, या पक्षी। जीव-निर्जीव, इन सबसे किसी ना किसी रुप में आप कुछ ना कुछ लेते हैं। कुछ ऐसा जो अनमोल है, जो आपके जीवन के लिए जरुरी है। इनमें से कुछ अहम कारकों को लेते हैं।  

वायु 

आप वातावरण से ऑक्सीजन लेते हैं, जो जीवनदायी है। अगर आपके वातावरण में उसी की कमी हो जाएगी या किसी और ज़हरीली गैस की अधिकता, तो साँस कैसे लेंगे? पेड़-पौधे वातावरण को शुद्ध करने का काम करते हैं। आपके आसपास कितने हैं? इसके इलावा बहुत कुछ इस वायुमंडल में ऐसा छोड़ते हैं, जो इसको साँस लेने के काबिल नहीं छोड़ता। उसके लिए आप क्या करते हैं? यहाँ सिर्फ हरियाणा, पंजाब, दिल्ली की सरकारों के एक-दूसरे पर राजनीतिक प्रहारों की बात नहीं हो रही। ये समस्या दुनियाँ में और भी बहुत जगह है या थी। उसके लिए उन्होंने क्या उपाय किए? तो शायद पता चले, की ज्ञान-विज्ञान को राजनीती से अलग समझना कितना जरुरी है। 

क्यूँकि, राजनीतीक उसी ज्ञान-विज्ञान का दोहन करके, राजनीतिक पॉइंट्स इक्क्ठे करने के लिए कहीं ज्ञान-विज्ञान का दुरुपयोग तो नहीं कर रहे? कुर्सियों के चक्कर में, हर तरह से लोगों को नुकसान तो नहीं पहुँचा रहे? 

इसीलिए हर आदमी के लिए भी इकोलॉजी की समझ बहुत जरुरी है। 

पानी 

मैं एक छोटा-सा उदाहरण अपने ही गाँव का लेती हूँ। क्यूँकि, बाकी गाँवोँ या शहरों में भी कुछ-कुछ ऐसा ही है। आपके यहाँ सप्लाई का पानी रोज आता है? कितनी बार आता है? साफ़ पीने लायक आता है? या पीने लायक नहीं होता, मगर बाकी घर के कामों के लिए प्रयोग कर सकते हैं? या इस लायक भी नहीं होता की लैटरीन तक में डालने में ऐसा लगे, की फ़ायदा क्या?

अगर आपके यहाँ सरकार साफ़ पीने लायक पानी हर रोज सुबह-श्याम, आज तक भी नहीं पहुँचा पाई, तो आप कैसी सरकारों को चुन रहे हैं, इतने सालों से? और क्यों?  

आजकल जहाँ मैं हूँ, वहाँ सप्लाई का पानी 7-10 दिन या 10-15 दिन में एक बार आता है। जी। सही सुना आपने। आजकल, वो फिर भी थोड़ा बहुत फर्श वगरैह धोने लायक होता है। दो साल पहले जब यहाँ आई, तो ऐसे लगता था जैसी गटर से पानी सप्लाई हो रहा हो। यूँ लगता था, ये सप्लाई ही क्यों करते हैं? इसका अहम कारण है, यहाँ का वॉटर सप्लाई सिस्टम, शायद मेरे पैदा होने से भी पहले का है। जितना मुझे पता है। 46 साल की तो मैं ही हो गई। मतलब, इतने सालों तक किसी ने नहीं सोचा की उसकी क्षमता बढ़ाई जाए, जनसंख्याँ के अनुपात में? कहेँगे नहर कम आती है, पानी कहाँ से आए? नहर तो शायद पहले भी इतनी ही आती थी या इससे भी कम। मगर पानी पूरा आता था। और अब जितना गन्दा भी नहीं होता था।  

जब हम छोटे थे तो यही पानी सुबह-श्याम आता था। और बहुत बार ऐसे ही बहता था। हालाँकि, पीने के पानी के लिए तब भी लोग ज्यादातर कुओं पे निर्भर थे। आजकल या तो टैंकर आते हैं पानी सप्लाई करने। वो भी सरकार के नहीं, बल्की प्राइवेट। या लोग, खेतों के हैंडपंप या समर्सिबल पर निर्भर हैं और वहाँ से लाते हैं। खेतों में भी हर जगह मीठा पानी नहीं है। जहाँ-जहाँ है, वहाँ की ज़मीन के रेट अक्सर ज्यादा होते हैं। जहाँ पे अक्सर मारकाट या धोखाधड़ी भी देखी जा सकती है। एक तरोताज़ा केस तो अभी भाई की सिर्फ दो कनाल वाली जगह का ही है। 

टैंकर सप्लाई कौन करते हैं? और कहाँ-कहाँ वाटर पुरीफायर घर पे कामयाब हो सकते हैं? ये फिर से अलग विषय हो सकता है। क्यूँकि, यहाँ पे ज्यादातर लोग घरों में भी हैंडपम्प्स या समर्सिबल पर निर्भर हैं। इसीलिए तकरीबन हर दूसरे घर में आपको ये देखने को मिलेंगे। मगर यहाँ घरों के एरिया का पानी इतना जहरीला है की बर्तनों पे दाग पड़ जाते हैं। कपड़े ढंग से साफ़ नहीं होते। दाँत पीले पड़ जाते हैं (Fluorosis) । फर्श पे पड़ेगा, तो सुखते ही सॉल्टी नमी या धब्बे। अब जब तकरीबन सब जमीन के पानी का प्रयोग करेंगे और वापस उस ज़मीन में जाएगा नहीं, तो क्या होगा? हर साल जहर का असर बढ़ता जाएगा। और बिमारियों का भी। जिनमें त्वचा की बीमारी भी हैं और बहुत-सी दूसरी भी। कम से कम, बारिश के पानी को वहीं ज़मीन में वापस पहुँचाकर, इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। 

या ऐसी जगहों को छोड़ के कहीं अच्छी जगह खिसको, इसका एकमात्र समाधान है? तो ऐसी जगहों की सरकारों को क्या तो वोट करना? और कैसे चुनाव? जब सारे समाधान ही खुद करने हैं? उसपे ऐसे चुनके आई सरकारें, बच्चों तक को बहनचो, माँचो, छोरीचो, भतिजीचो और भी पता ही नहीं, कैसे-कैसे कार्यकर्मों या तमाशों में उलझाए रखेंगी। इसपे पोस्ट कहीं और। Social Tales of Social Engineering में।                           

ज़मीन   

ज़मीन आपको क्या कुछ देती है? आप उसे वापस क्या देते हैं? ज़हर?

हमारे घरों से, खेतों से, फैक्ट्री-कारखानों से, कितने ही ज़हरीले कैमिकल्स रोज निकलते हैं। वो कहाँ जाते हैं? पानी के स्रोतों में और उन द्वारा ज़मीन में? या सीधा ज़मीन में? आज के युग में भी waste treatment, sewage treatment, proper disposal  या recycling जैसा कुछ नहीं है, हमारे यहाँ? क्यों? ये तो दिल्ली के आसपास के या किसी भी बड़े शहर के आसपास के गाँवोँ क्या, उस आखिरी बॉर्डर के पास या दुर्गम से भी दुर्गम जगह पे भी होना चाहिए। ज़मीन से शायद इतना कुछ लेते हैं हम। उसके बगैर हमारा अस्तित्व ही नहीं है। फिर किस बेशर्मी से उसे बदले में ज़हर देते हैं? बिमारियों की बहुत बड़ी वज़ह है ये।         

 पीछे आपने पोस्ट में पढ़ा     

इन सबमें तड़के का काम किया है, आज की टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग ने

और बढ़ते सुख-सुविधाओँ के गलत तौर-तरीकों ने। व्हीकल्स, ए.सी. (AC), घर बनाने में सीमेंट और लोहे का बढ़ता चलन। मगर, घर की ऊँचाई का कम और दिवारों का पतला होते जाना। खिड़की, दरवाजों का छोटा और कम होते जाना। बरामदों का खत्म होना। घरों का छोटा होना। पेड़-पौधों का घरों में ख़त्म होना। घरों में खुले आँगनों का छोटा होते जाना। सर्फ़, साबुन, शैम्पू, कीटनाशक, अर्टिफिशियल उर्वरक, हार्पिक, डीओज़, ब्यूटी पार्लर प्रॉडक्ट्स आदि का बढ़ता तीखा और ज़हरीला असर। और भी ऐसे-ऐसे कितने ही, गलत तरीक़े या बुरे प्रभाव या ज़हर। तो क्या इन सबका प्रयोग ना करें? जँगली बनकर रहें? करें, मग़र सही तरीके-से और सोच-समझ कर। ये जानकर, की कितना और कैसे प्रयोग करें। इतना प्रयोग ना करें, की वो जहर बन जाए। जितना इनका प्रयोग करें, उतना ही इनके दुस्प्रभावोँ को कम से कम करने के उपाय भी करें। कैसे? आगे पोस्ट में। 

इसमें से कितना इस पोस्ट में है? जनरल या आम समझ। सिर्फ लेने से काम नहीं चलेगा, वापस भी देना होगा। वापस कैसे करें? अगली पोस्ट में AC से ही शुरू करें?    

No comments: