Featured Post

Academic Journey?

Current Position Media Culture Lab (Independent Research and Writing),  June 2021 - Continue Experiential Learning, Research and Communicati...

Saturday, August 8, 2026

System, Code and Conflict of Interest Politics 6

सारा खेल डाटा में है?

डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने 

हथियार बना लिया है? 

कैसा हथियार भला?   


डाटा सिर्फ मिर्च मसाला नहीं है 

वो तो आम जनता को परोसने के लिए है 

डाटा यहाँ, वहाँ, जहाँ देखो 

सुनो, अनुभव करो या समझो 

वहीँ डाटा पॉइंट्स बनाने का 

या उसमें फ़ेरबदल करने का 

राजनितिक  हथियार है।


जैसे?

आपके यहाँ पानी कहाँ से आता है?

और क्यों?

कब से आता है?

कहीं और से क्यों नहीं?


उस पानी की गुणवत्ता क्या है?

मीठा है?

खारा है?

शुद्ध है?

या अशुद्ध है?


जहाँ से लाते हैं 

उस जगह का नाम क्या है?

उसके आसपास क्या है?

आपके घर से वो कितनी दूरी पर है?


कैसे लाते हैं?

पैदल या किसी व्हीकल में?

कैसे बर्तन या जार या कैम्पर में?

वो बर्तन साफ़ है?

रोज़ साफ़ होता है?

या गन्दा है?

कितने दिनों में साफ़ होता है?


आपके अपने घर में साफ़ पानी का बंदोबस्त क्यों नहीं है?

ये जहाँ आप रह रहे हैं 

वहाँ के सिस्टम की चाल है? 

वहाँ के सिस्टम का कंट्रोल है?

 

आपके पीने तक के पानी पर कंट्रोल?

क्यों?

ख़तरनाक है ये तो 

कैसा गन्दा सिस्टम है?

जो आपको साफ़ पानी तक देने लायक नहीं है ? 


सिस्टम के हिसाब किताब में पानी कुछ और ही है 

तो सोचो सिस्टम आपको कहाँ कहाँ कंट्रोल कर रहा है? 

सिर्फ़ एक पीने के पानी के जरिए?

या घर में इस्तेमाल होने वाले बाकी पानी के जरिए भी?


सिस्टम,

सिर्फ़ आपके स्वास्थ्य को ही कंट्रोल नहीं कर रहा 

वो आपके रिश्तों को कंट्रोल कर रहा है 

उनमें शाँति या झगड़ों को कंट्रोल कर रहा है। 


वो आपके यहाँ किसकी शादी होगी 

या किसकी नहीं, 

ये कंट्रोल कर रहा है 

वो आपके बच्चे होंगे 

या नहीं, 

ये तक कंट्रोल कर रहा है 

वो आपके कितने बच्चे होंगे

ये भी कंट्रोल कर रहा है। 


थोड़ा ज्यादा लग रहा है?

इससे आगे बहुत कुछ है। 

राजनितिक पार्टियाँ सिस्टम बनाती हैं 

और उन सिस्टम पर सीधा सीधा अपना कंट्रोल रखती है। 


उनमें कब, किस तरह का हेरफेर करना है ?

ये ऐसे ऐसे 

और कैसे कैसे सिस्टम बनाने वालों को पता है।

इसलिए, 

आपकी ज़िंदगी जहाँ आप रह रहे हैं 

वहाँ के सिस्टम पर काफी निर्भर करती है 


जितना उस सिस्टम से अपनी निर्भरता हटाते जाएँगे 

उतनी ही ज़िन्दगी बाहर वालों के 

या 

ऐसे ऐसे सिस्टम बनाने वालों के अधीन कम रहेगी। 


या फिर, 

किसी ऐसे सिस्टम में रहो 

जहाँ साफ़ और मीठा पानी आपके अपने घर आता है 

आपको कहीं से जाकर नहीं लाना पड़ता।


जहाँ लोग ऐसे सिस्टम में रहते हैं 

जहाँ साफ़ पानी उन्हें कहीं बाहर से नहीं लाना पड़ता 

या घर जैसा भी पानी आता है 

उसे वो अपने घर ही साफ़ कर 

पीने 

और प्रयोग करने लायक बना लेते हैं 

उनके यहाँ ज़्यादातर बिमारियाँ कम होती हैं। 


उनके रिश्ते ज्यादातर मधुर होते हैं 

क्यूँकि? 

बाहर वालों के शिकार कम होते हैं 

शादियों में दिक़्क़त कम होती है 

बाहर के रोड़े 

या जहर या काई आदि कम होते हैं 

बच्चे भी होते हैं 

और खेलते फूलते आँगन भी। 


अब एक सर्वे करो 

अपने घर का 

और अपने आसपास का 

किस घर में पानी कहाँ से आता है?

कैसा आता है?

किसमें आता है?

कौन लाता है?

उसका स्वाद कैसा होता है?


पानी का तापमान कैसा होता है?

जहाँ पानी है, उस तापमान के मुकाबले? 

बहुत कम या ज्यादा तो नहीं?    

अगर हाँ, 

तो सोचो, 

उसमें क्या मिला हो सकता है?


नहीं मालुम?

तो क्यों सोचना इतना?

घर पर एक Water Purifier लगाने में कितना लगता है?


वैसे, 

अगर आप किसी टैंकर से पानी लेते हैं 

तो उसका महीने का खर्च कितना होता है?

वो उतना ही क्यों होता है?

ऐसे ही जैसे 

आप अगर किसी व्हीकल में लाते हैं? 

तो ये उस पर भी लागू होता है।   


ऐसे ही खाने का है 

ऐसे ही हवा का है 

मतलब?

 

हवा, पानी और खाना 

अगर इन तीनों पर 

बाहर की बजाय 

या राजनितिक सिस्टम की बजाय 

आपका अपना कंट्रोल है 

तो ज़िंदगी की ज़्यादातर समस्याएँ ख़त्म हैं। 


Sustainable Living या Life Style 

गाँवों जैसी जगह तो ये बहुत आसानी से संभव है 

लोगबाग शहरों में कम जगह होते हुए इसे अपना रहे हैं। 

क्यों? 


ये सब Experiential Learning और आसपास के काफी Case Studies के बाद ही लिखा गया है। उनमें से कुछ एक केस स्टडी शायद आपको आगे पढ़ने को भी मिलें। 

धमाल कैसे कैसे, System, Code and Conflict of Interest Politics के?  

Friday, August 7, 2026

System, Code and Conflict of Interest Politics 5

सारा खेल डाटा में है?

डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने 

हथियार बना लिया है? 

कैसा हथियार भला?   


डाटा अगर भले लोगों के पास है?

तो वो भलाई करेंगे?

और बुरे लोगों के पास है?

तो?

लग गई नज़र समझो?


डाटा सिर्फ मिर्च मसाला नहीं है 

वो तो आम जनता को परोसने के लिए है 

डाटा यहाँ, वहाँ, जहाँ देखो 

सुनो, अनुभव करो या समझो 

वहीँ डाटा पॉइंट्स बनाने का 

या उसमें फ़ेरबदल करने का 

राजनितिक  हथियार है।


अब जो कुछ आप 

देख, सुन 

अनुभव कर सकते हैं 

या समझ सकते हैं  

वो सब अगर डाटा पॉइंट्स हैं 

तो?

आदमी को रोबोट बनाना कितना मुश्किल है?  


आप जो खाते हैं 

वो वहाँ के और आपके सिस्टम का डाटा है 

आप जो पानी पीते हैं 

वो वहाँ के और आपके सिस्टम का डाटा है 


आप जिस हवा में साँस लेते हैं 

आप जो कपड़े पहनते हैं 

आप  जिस घर में रहते हैं 

आप जिन लोगों के साथ रहते हैं 

आपका अड़ोस पड़ोस 

उस अड़ोस पड़ोस में 

या खुद अपने घर में 

आप जो कुछ देख 

सुन, समझ सकते हैं 

या अनुभव कर सकते हैं 

वो सब आपके सिस्टम का, शरीर  

और आपके आसपास के सिस्टम का डाटा है। 


आपके अपने सिस्टम, शरीर 

और आपके आसपास के सिस्टम की 

interaction से बना डाटा है 

वो फिर चाहे जीव हों या निर्जीव 

इंसान हों या कुत्ते, बिल्ली 

गाएँ, भैंस हों 

या गधे, घोड़े 

कीड़ी मकोड़े हों या मछर मक्खी 

कुछ भी। 


मकान दुकान हों 

मोटरसाइकिल या गाडी  

इन सबके ऊप्पर लिखा 

जो कुछ आप पढ़ सकते हैं 

देख सकते हैं 

सुन या समझ सकते हैं 

या अनुभव कर सकते हैं 

वो सब आपके अपने सिस्टम, शरीर 

और आपके आसपास के सिस्टम का डाटा है। 


जैसे बनारस के पंडे (पाण्डे?)

इंसान की मर्त्यु के बाद 

आप जिस किसी की अस्थियाँ प्रवाहित करने जाते हैं 

उससे ही आपके पुरखों तक के नाम 

अपने बही खातों से बता देते हैं 

कुछ कुछ वैसे ही 

वैसी सी ही पद्धति पर बने 

आज के डाटा सैंटर हैं। 


मगर   

उनमें और आज के डाटा सैंटर्स में 

दिन रात का फर्क है 

टेक्नोलॉजी 

और उसकी स्पीड का फर्क है 

वो सिर्फ़ नाम बता पाते हैं?

या थोड़ा बहुत इससे आगे भी ?

मगर आज के डाटा सैंटर्स?

?

सोच सकते हो क्या करते हैं?


आपकी सोच समझ से 

बहुत बाहर की दुनिया है ये?

फिर भी सोचो 


आते हैं एक एक करके 

अहम अहम डाटा पॉइंट्स 

और डाटा सैंटर्स पर।  

और हमारी आज की अनोखी दुनिया पर 


अभी तक ज़्यादातर लोगों से छुपे 

तंत्र पर 

ख़ासकर, भारत जैसे देशों में। 

और उनके प्रभावों और दुस्प्रभावों पर। 

System, Code and Conflict of Interest Politics 4

सारा खेल डाटा में है?

डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने 

हथियार बना लिया है? 

कैसा हथियार भला?   


डाटा अगर भले लोगों के पास है?

तो वो भलाई करेंगे?

और बुरे लोगों के पास है?

तो?

लग गई नज़र समझो?


मान लो कोई लड़की 

किसी को अपने भाई के लिए पसँद है?

और?

किसी को अपने दोस्त के लिए?

क्या होगा?    


क्या लड़की को उनमें से कोई पसँद है?

क्या हो वो उनमें से ही किसी एक को 

या किसी और को ही पसँद करती हो?

क्या वो शादी होने देंगे उसकी ?


ये भी हो सकता है 

की वो लड़के किसी और को पसँद हों?

तो क्या होगा?

ऐसा ही लड़कों के केस में भी हो सकता है?


डाटा हथियार बन गया की नहीं?

कौन किस को पसँद करता है?

और कौन किस को नहीं?

यही डाटा ज्यादा पढ़े लिखे और कढ़े 

बदल भी सकते हैं?

उसमें हेरफेर या गोलमाल भी कर सकते हैं?

और हो सकता है 

आपको इसकी खबर तक ना हो?


कुछ कुछ ऐसे 

जैसे वो हॉस्पिटल में कई बार बच्चे बदल देते हैं?

सुनी होंगी ऐसी सी कहानियाँ?

या हो सकता है 

आपके आसपास ऐसा कोई केस भी हो? 

या ऐसे ही किसी बच्ची को उठा दिया हो?

उसे हॉस्पिटल पहुँचाकर, दुनियाँ से ही?


क्या हुआ था उसे?

समझ ही नहीं आया?    

ये भी उस वक़्त के डाटा में कोढ़ सा छिपा है? 

इशारों सा, संकेतों सा?

पेपरों में?

Projects में?

Professors के उस वक़्त के प्रोफाइल में?

और infrastructure में भी?      


ऐसे ही जैसे 

मान लो आपने कोई पेपर दिया हो?

आपने ऑनलाइन देखा 

आपका और आपकी दोस्त दोनों का हो गया?

लेकिन शायद किसी को वो सही नहीं लगा?

और पता चलता है 

प्रिंट में किसी और का ही हुआ?


वापस ऑनलाइन जाकर देखो?

शायद वेबसाइट ही नहीं खुल रही? 

या कुछ गड़बड़ है? 

वहाँ ईमेल करो 

कोई ज़वाब मिला?

नहीं?

तो मान के चलें की  गड़बड़ घौटाला हुआ है?


ऐसे ही मान लो 

आपने अपनी डिग्री पर काफी मेहनत की है 

मगर सुपरवाइजर की कहीं ईगो आड़े आ गई?

साथ वाले जिन्हें कोई कुर्सी चाहिए 

उसका बवाल बना 

मामला ही कुछ और बना देते हैं?

जैसे तैसे आप उसे निपटा आगे चलते हैं। 


मगर 

सालों बाद? 

10 -15 साल बाद? 

या उससे भी ज्यादा सालों बाद पता चलता है? 

आपका कोई डाटा बदल दिया गया था ?

और आपको समझ ही नहीं आया?

किसने और क्यों?


वो सब इशारों सा, संकेतों सा 

उस थिसिस में ही रखा हुआ हो?

मगर 

तब आपको वो सब समझ आना तो दूर 

पता ही नहीं चला हो की हुआ क्या था?

और क्यों?


क्या हो अगर वही सब 

आपके रिसर्च पेपर्स में भी आड़े आने लगे?

दुशमन शायद काफी हैं आपके?

गुप्त और छुपे रुप से? 

वो ना आपके पेपर पब्लिश होने देंगे? 

और 

आपको कहीं और ही घुमा देंगे?


आप भी ऐसा कुछ होने के बाद 

पेपर पब्लिशिंग के लिए भेजना ही छोड़ देते हैं?

चाहिएँ ही नहीं ऐसे पेपर और ऐसे जर्नल?  

मगर ऐसे में वो बाहर हवा क्या देंगे?


ये तो ऐसी है?  

ये तो वैसी है?

ज़िंदगी कहाँ जाते जाते, 

ये कहाँ चलने लगी?

ऐसे में आपकी मेहनत 

और आपकी रुचि का क्या होगा? 


सबसे बड़ी बात 

इसका असर सिर्फ आप पर ही नहीं होता 

आपका आसपास भी भुगतता है ?

क्यों?


राजनितिक पार्टियाँ सच ना बताकर

गुप्त गुप्त और कोड कोढ़ खेलती हैं  

बढे चढ़े या घुमा फ़िराकर, 

अपनी अपनी तरह के 

सामान्तर केस घड़ती हैं। 


ये सामान्तर घढ़ाईयाँ ही Human Robotics हैं। 

यही लोगों को कंट्रोल करने के तरीके हैं 

और 

यही Conflict of Interest Politics है। 

Thursday, August 6, 2026

System, Code and Conflict of Interest Politics 3

दुनिया के बड़े बड़े झगड़े 

ज्यादातर, 

अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं?

 

Conflict of Interest Politics क्या है? 

इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?

इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?

इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?

अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?  

क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ 

Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?

इससे आगे कुछ भी नहीं?   


Child Production Factory जरुरी नहीं है 

मगर, 

बच्चे तो जरुरी हैं? 

और शादी भी? 

किसी भी इंसान के लिए ?

किसी भी घर के लिए ?

समाज के लिए? 

इस पर कोई प्रश्नचिन्ह हो सकता है क्या?

सारा खेल यही है?


सारा खेल डाटा में है?

डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने 

हथियार बना लिया है 

कैसा हथियार भला?   


किसकी शादी होगी?

और किसकी नहीं?

कब, किससे और कैसे?

कहाँ?

किस तारीख, महीना या साल?  

और करवाने वाले कौन होंगे?

या किसकी नहीं होगी?

ये जहाँ कहीं आप हैं 

वहाँ का सिस्टम निर्धारित करता है। 


किसके बच्चे पैदा होंगे?

और किसके नहीं?

कब, कहाँ और कैसे?

और कितने? 

किस घर या हॉस्पिटल?

या कहीं और?

पैदा करवाने वाले कौन होंगे?


किस तारीख, महीना या साल?

कितने बजे?

AM?

Before Noon?

Noon?

After Noon?

Evening?

After Evening?

Night?

Late Night?

Early Night?

At Dawn?                


कहाँ बच्चे पढ़ेंगे और कहाँ नहीं?

कहाँ तक पढ़ेंगे? 

और कब वो उन्हें स्कूल से ही 

या कॉलेज से चलता कर देंगे?   


किसकी नौकरी लगेगी और किसकी नहीं?

कब लगेगी?

और कब वो उन्हें वहाँ से चलता कर देंगे?


कौन अपना खुद का बिज़नेस करेंगे 
और कौन नहीं?
या?
किसे सिस्टम करने देगा?
और किसे नहीं?
किस किसकी उस सिस्टम को सर्विस चाहिएँ?
और किसकी नहीं?      


ऐसे ही और भी 

कितने ही जोड़ तोड़?

आपके और आपके सिस्टम के? 

डाटा के किए धरे?  


इसका मतलब?      

DATA ही दाता है?


इसमें छुपे हैं राज 

हर जीव 

और निर्जीव की कहानी के? 

उसके जन्म के 

और मौत के 

और 

इन दोनों के बीच 

जो कुछ होता है 

उस सबके? 


मतलब 

आज इंसान की हर समस्या का समाधान है 

मगर 

Conflict of Interest Politics को 

वो पसंद नहीं? 


और सबसे बड़ी बात 

वो समस्याएँ खड़ी करने वाले कौन हैं?

वो भी डाटा में ही छुपा है। 


आपके अपने सिस्टम में 

आपके घर के सिस्टम में 

और जहाँ कहीं आप रहते हैं 

वहाँ के सिस्टम में।   

ज़्यादातर 

जहाँ आप रहते हैं 

वहाँ के सिस्टम में। 


तभी हम बोलते हैं 

यहाँ का तो सिस्टम ही खराब है 

या 

यहाँ का सिस्टम बड़ा सही है। 


तो कोशिश करते हैं 

कुछ एक सिस्टम को पढ़ने की 

समझने की। 

System, Code and Conflict of Interest Politics 2

दुनिया के बड़े बड़े झगड़े 

ज्यादातर, 

अर्थव्यवस्था के इर्द गिर्द ही घुमते हैं 

किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था में 

ज़्यादातर सँसाधन प्रयोग में होते हैं 

सबको उनके हिस्से का 

उनकी मेहनत 

और काबिलियत के अनुसार मिलता है।  


और कमजोर अर्थव्यवस्था में?

ज़्यादातर सँसाधन चंद लोगों के कब्जे में होते हैं 

ज़्यादातर संसाधनों का दुरुपयोग होता है 

या शायद,

उन्हें पता ही नहीं होता, 

सदुपयोग कैसे करना है? 


जैसे 

शरीर के अगर सभी हिस्से सही से काम नहीं करेंगे 

तो कहीं न कहीं गड़बड़ जरुर होगी 

ऐसे ही, किसी भी घर या समाज का है 

और ये सब अक्सर 

Conflict of Interest की राजनीती के कारण होता है। 


Conflict of Interest Politics क्या है? 

इंसान सिर्फ़ कप या कच्छा है?

इसे ही अर्थवयवस्था कहते हैं?

इससे आगे अर्थव्यवस्था कुछ भी नहीं?

अर्थ के अनर्थ कैसे कैसे?  

क्या इंसान का अस्तित्व सिर्फ और सिर्फ 

Child Production Factory के इर्द गिर्द घुमता है?

इससे आगे कुछ भी नहीं?   


अगर इसे ही सच मान लें 

तो 

सविँधान लड़कियों को दादालाही ज़मीन में 

उनका हिस्सा कैसे देता है? 

उन ज़मीनो या प्रॉपर्टियों के नाम के 

वहीँ बच्चे पैदा करवाता है क्या?


कौन हैं ये दोगले?

तर्क वितर्क वाले इंसान?

या कुतर्की?

अर्थ का अनर्थ करने वाले?

  

शिक्षा के सँस्थान?

या धब्बा शिक्षा के नाम पर? 

जो समाज की भलाई के नाम पर 

गरीबों के पैसे और ज़मीने खाते हैं?

या लड़कियों की ज़मीनो पर 

ज़बरदस्ती 

और धोखाधड़ी से कब्ज़े किए होते हैं।  

बस ऐसा मौका हासिल हो 

ना हो तो?

षड्यंत्र करके ही सही बना लें?    


यहाँ Conflict of Interest Politics है 

और सिस्टम भी 

मगर कोड या कोढ़ क्या है?

कुछ एक और पोस्ट 

और 

शायद आप ही मुझे बताने लगें?  

System, Code and Conflict of Interest Politics 1

दुनियाँ के किसी भी सिस्टम से शरीर का सिस्टम 

आज भी 

दुनियाँ के सबसे बेहतरीन सिस्टम में से एक है

या कहना चाहिए 

दुनियाँ का सबसे बेहतरीन सिस्टम है 

इसे पढ़कर 

कोई भी सिस्टम बेहतर बनाया जा सकता है 


वो फिर चाहे शिक्षा का हो 

या स्वास्थ्य का 

घर का हो, 

आसपास का या मौहल्ले का  

राज्य का हो 

या देश का 

या फिर 

देशो के आपसी रिश्तों का 

या वाद विवाद का 


वो फिर चाहे घर के अंदर का हो 

या उसकी सीमाओं का 

मौहल्ले का हो 

या उसके आसपास का

या सीमाओं का 

ऐसे ही राज्यों का हो 

या देशों का 

लेन देन का हो 

या सीमाओं की रक्षा का 


अंदर का सही 

तो बाहर का भी सही?

कोई जरुरी नहीं 

मगर, 

अंदर का सही, 

तो बाहर के हमलों से रक्षा बेहतर होती है 

अंदर की रक्षा मजबूत हो, 

तो बाहर के हमले भी कम होते हैं 


इसलिए 

किसी भी हमलावर का पहला काम 

अंदरुनी रक्षा को तोड़ना होता है 

जैसे फूट डालो और राज करो 

कमजोर रक्षा जल्दी ढह जाती है 

मगर, 

मजबूत रक्षा में कई किले होते हैं 


किले जितने मज़बूत, 

उतना ही वो सिस्टम मज़बूत 

वो फिर आपका शरीर हो, 

घर हो, 

रिश्ता 

या अर्थव्यवस्था

जहाँ कहीं की अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होती है  

अक्सर, उतना ही मज़बूत वो सिस्टम होता है।