आप जो कर रहे हैं,
क्या वो सब खुद ही कर रहे हैं?
या आपका सिस्टम (राजनितिक)
इतना आगे जा चुका है
वो आपको एक रॉबोट से ज्यादा
कुछ नहीं समझता?
और
उस रॉबोट का कंट्रोल अपने पास रखता है?
अगर हाँ,
तो उस कंट्रोल को वापस कैसे लिया जाए?
रॉबोट को वापस इंसान कैसे बना जाए?
रॉबोट को तो मालूम ही नहीं होता की वो रॉबोट है
सबसे पहले तो
उस रॉबोट बने इंसान को जगाया जाया
उसे बताया जाए
इंसान, रॉबोट कैसे बनते हैं
या बनाए जाते हैं?
ये कुछ कुछ ऐसे है
जैसे दो रोसोईये रोटी बना रहे हैं
एक जैसी
सामान एक जैसा,
तरीका एक जैसा
और रोटी भी एक जैसी-सी
दिखने में भी और खाने में भी।
कौन सी असली है?
और कौन सी कॉपी?
पता ये करना है
मगर
ये पता क्यों करना है?
क्यूँकि,
ऐसा सा ही कुछ
वो आपके स्वास्थ्य के साथ कर रहे हैं
ऐसे ही आपके रिश्तों के साथ खेल रहे हैं
आपके घर बाहर के सामान के साथ कर रहे हैं
नौकरी, पैसा,
ज़मीन जायदाद के साथ कर रहे हैं
उन्होंने हर जीव-निर्जीव को एक टैग दे दिया है
एक कोड सा कोढ़ दे दिया है
उस कोड के खेल
आपके जन्म से भी पहले से चल रहे हैं
आपका जन्म,
उसी सिस्टम के
कोड की जरुरत के अनुसार हुआ है
अहम है ये जानना
आपका जन्म जहाँ कहीं आप पैदा हुए हैं
उस सिस्टम की जरुरत के अनुसार हुआ है
मगर,
उस सिस्टम में कई और सिस्टम हैं
और पार्टियाँ हैं
जरुरी नहीं
आप उनके सिस्टम की भी जरुरत हों
ये भी हो सकता है
बाकी पार्टियों के सिस्टम का रोड़ा हों ?
उनकी कुर्सियों के टिके रहने में
अहम रुकावट हों?
तो वो रुकावट के लिए खेद है,
खेलने लगते हैं।
ऐसे ही,
जैसे कोई Herald House?
हर घर की तो नहीं,
मगर
बहुत से घरों की
ऐसी सी कहानियाँ हो सकती हैं
इसलिए,
वहाँ वाद विवाद
और लड़ाई झगडे भी
थोड़े जयादा ही होते हैं।
हालाँकि,
उन्हें कम
और ख़त्म करने के तरीके भी हैं
वो क्या हैं?
वो है,
ऐसे सिस्टमस को समझना
या ऐसे सिस्टम से दूर रहना।
संभव है क्या?
जानने की कोशिश करते हैं आगे