सारा खेल डाटा में है?
डाटा को पढ़े लिखे और कढ़े लोगों ने
हथियार बना लिया है?
कैसा हथियार भला?
डाटा सिर्फ मिर्च मसाला नहीं है
वो तो आम जनता को परोसने के लिए है
डाटा यहाँ, वहाँ, जहाँ देखो
सुनो, अनुभव करो या समझो
वहीँ डाटा पॉइंट्स बनाने का
या उसमें फ़ेरबदल करने का
राजनितिक हथियार है।
जैसे?
आपके यहाँ पानी कहाँ से आता है?
और क्यों?
कब से आता है?
कहीं और से क्यों नहीं?
उस पानी की गुणवत्ता क्या है?
मीठा है?
खारा है?
शुद्ध है?
या अशुद्ध है?
जहाँ से लाते हैं
उस जगह का नाम क्या है?
उसके आसपास क्या है?
आपके घर से वो कितनी दूरी पर है?
कैसे लाते हैं?
पैदल या किसी व्हीकल में?
कैसे बर्तन या जार या कैम्पर में?
वो बर्तन साफ़ है?
रोज़ साफ़ होता है?
या गन्दा है?
कितने दिनों में साफ़ होता है?
आपके अपने घर में साफ़ पानी का बंदोबस्त क्यों नहीं है?
ये जहाँ आप रह रहे हैं
वहाँ के सिस्टम की चाल है?
वहाँ के सिस्टम का कंट्रोल है?
आपके पीने तक के पानी पर कंट्रोल?
क्यों?
ख़तरनाक है ये तो
कैसा गन्दा सिस्टम है?
जो आपको साफ़ पानी तक देने लायक नहीं है ?
सिस्टम के हिसाब किताब में पानी कुछ और ही है
तो सोचो सिस्टम आपको कहाँ कहाँ कंट्रोल कर रहा है?
सिर्फ़ एक पीने के पानी के जरिए?
या घर में इस्तेमाल होने वाले बाकी पानी के जरिए भी?
सिस्टम,
सिर्फ़ आपके स्वास्थ्य को ही कंट्रोल नहीं कर रहा
वो आपके रिश्तों को कंट्रोल कर रहा है
उनमें शाँति या झगड़ों को कंट्रोल कर रहा है।
वो आपके यहाँ किसकी शादी होगी
या किसकी नहीं,
ये कंट्रोल कर रहा है
वो आपके बच्चे होंगे
या नहीं,
ये तक कंट्रोल कर रहा है
वो आपके कितने बच्चे होंगे
ये भी कंट्रोल कर रहा है।
थोड़ा ज्यादा लग रहा है?
इससे आगे बहुत कुछ है।
राजनितिक पार्टियाँ सिस्टम बनाती हैं
और उन सिस्टम पर सीधा सीधा अपना कंट्रोल रखती है।
उनमें कब, किस तरह का हेरफेर करना है ?
ये ऐसे ऐसे
और कैसे कैसे सिस्टम बनाने वालों को पता है।
इसलिए,
आपकी ज़िंदगी जहाँ आप रह रहे हैं
वहाँ के सिस्टम पर काफी निर्भर करती है
जितना उस सिस्टम से अपनी निर्भरता हटाते जाएँगे
उतनी ही ज़िन्दगी बाहर वालों के
या
ऐसे ऐसे सिस्टम बनाने वालों के अधीन कम रहेगी।
या फिर,
किसी ऐसे सिस्टम में रहो
जहाँ साफ़ और मीठा पानी आपके अपने घर आता है
आपको कहीं से जाकर नहीं लाना पड़ता।
जहाँ लोग ऐसे सिस्टम में रहते हैं
जहाँ साफ़ पानी उन्हें कहीं बाहर से नहीं लाना पड़ता
या घर जैसा भी पानी आता है
उसे वो अपने घर ही साफ़ कर
पीने
और प्रयोग करने लायक बना लेते हैं
उनके यहाँ ज़्यादातर बिमारियाँ कम होती हैं।
उनके रिश्ते ज्यादातर मधुर होते हैं
क्यूँकि?
बाहर वालों के शिकार कम होते हैं
शादियों में दिक़्क़त कम होती है
बाहर के रोड़े
या जहर या काई आदि कम होते हैं
बच्चे भी होते हैं
और खेलते फूलते आँगन भी।
अब एक सर्वे करो
अपने घर का
और अपने आसपास का
किस घर में पानी कहाँ से आता है?
कैसा आता है?
किसमें आता है?
कौन लाता है?
उसका स्वाद कैसा होता है?
पानी का तापमान कैसा होता है?
जहाँ पानी है, उस तापमान के मुकाबले?
बहुत कम या ज्यादा तो नहीं?
अगर हाँ,
तो सोचो,
उसमें क्या मिला हो सकता है?
नहीं मालुम?
तो क्यों सोचना इतना?
घर पर एक Water Purifier लगाने में कितना लगता है?
वैसे,
अगर आप किसी टैंकर से पानी लेते हैं
तो उसका महीने का खर्च कितना होता है?
वो उतना ही क्यों होता है?
ऐसे ही जैसे
आप अगर किसी व्हीकल में लाते हैं?
तो ये उस पर भी लागू होता है।
ऐसे ही खाने का है
ऐसे ही हवा का है
मतलब?
हवा, पानी और खाना
अगर इन तीनों पर
बाहर की बजाय
या राजनितिक सिस्टम की बजाय
आपका अपना कंट्रोल है
तो ज़िंदगी की ज़्यादातर समस्याएँ ख़त्म हैं।
Sustainable Living या Life Style
गाँवों जैसी जगह तो ये बहुत आसानी से संभव है
लोगबाग शहरों में कम जगह होते हुए इसे अपना रहे हैं।
क्यों?
ये सब Experiential Learning और आसपास के काफी Case Studies के बाद ही लिखा गया है। उनमें से कुछ एक केस स्टडी शायद आपको आगे पढ़ने को भी मिलें।
धमाल कैसे कैसे, System, Code and Conflict of Interest Politics के?